मस्त विचार 2965
थक गया है चाहतों का वजूद
अब कोई अच्छा भी लगे तो हम इजहार नहीं करते.
अब कोई अच्छा भी लगे तो हम इजहार नहीं करते.
पछतावा हमेशा सुधार की दिशा में जाता है.
मिलता ही नहीं वक़्त अपनों को अपनों के लिए.
जब से शहर में शुरू कमाना हुआ…
तो यकीनन आप एक खूबसूरत इंसान हैं.
फिर सुख में उन सम्बन्धों का कोई अर्थ नहीं रह जाता..
सब को आज़माते हो या मुझसे ही दुश्मनी है ….
_ चाहे आज़मा कर देख लीजिए..!!
अतीत को अपने आप में फंसाने न दें _ इससे सीखें, जाने दें और आगे बढ़ें.