सुविचार 4911
दूसरों से मदद की उम्मीद _ हर बुराई की जड़ है.
_ तो कोई बांसुरी बना कर बांस में सुर को भरता है.
मैं स्नेह का धागा हूँ _ मजबूरी की जंजीर नहीं..!!
ख़ाक हूँ मैं, ख़ाक पर क्या ख़ाक इतरा के चलूँ..
ख़ुशी के लिये ही अब ये तलाश बंद कर दी.”
दुःख इस बात का होता है, कि वह हमें भूल गया है… जिसे हम याद कर रहे हैं….