मस्त विचार 2597
तुम इक दफ़ा मुझसे, मिलना कभी !!
तुम इक दफ़ा मुझसे, मिलना कभी !!
उनमे उतरो, और अपनी सामर्थ्य को चुनौती दो,
तुम हैरान रह जाओगे की कितनी सामर्थ्य है तुममें.
वक्त ही तो है….बदल जाएगा…
किन्तु किसी को दुख न पहुँचे, यह तो आप के हाथ में ही है !!!
हम चीजों को वैसे नहीं देखते जैसे वे हैं, हम उन्हें वैसे ही देखते हैं जैसे हम हैं.
जो खुशबु भी दूसरों को देता है और टूटता भी दूसरों के लिए ही है…
कि आपको हराने के लिए लोगों को कोशिशें नहीं…..साजिशें करनी पड़ें…
एक खुदा की इबादत ही थी जो, हर बार टलती गयी…
तूने रास्ता बदला तो मैंने मंज़िल बदल ली.
और एक सच ये भी है.. इसे और कहीं ढूँढना संभव नहीं.