सुविचार 2689
प्रशंसा से पिघलना मत और आलोचना से उबलना मत.
कभी- कभी गुच्छे की आखिरी चाबी ताला खोल देती है.
देखा ये भी जाता है की पुकारा किसने है.
आज उसी घर में रहने से बैचेन है इंसान…
दरवाजा खोल दो तो, कोई पूछने भी न आयेगा.
तुम भी उठाओ “हाथ” के मौसम “दुआ” का है.
मिली तो इस “शर्त” पे कि किसी से ना मिलो..!!
सकारात्मक कार्रवाई करने के लिए हमें यहां एक सकारात्मक दृष्टि विकसित करनी होगी.
अदब से कही गई, हर बात का वजन होता है.