मस्त विचार 2481
अभी तो चाक पे जारी है रक़्स मिट्टी का,
अभी कुम्हार की नीयत बदल भी सकती है.
अभी कुम्हार की नीयत बदल भी सकती है.
जीवन खुद को खोजने के बारे में नहीं है, _ जिंदगी से तात्पर्य अपने आप को बनाना होता है.
एक को बिठाओ तो दूसरा फुदक जाता है..
लेकिन मरने से पहले मेरा जीवन कैसा होगा ये हम ज़रूर तय कर सकते हैं.
नींद, शांति, आनंद, हवा, पानी, प्रकाश और सबसे कीमती — साँसे
इतना भी क्यूँ जिद्दी बना बैठा है सीने में !!
तो कद नापना बेकार है आसमान का.
हमने अपने हमदर्द को हमारा दर्द बनते देखा है.