मस्त विचार 2525
यह नींद भी कितनी अजीब चीज होती है,
आ जाये तो सब कुछ भुला देती है और न आये तो सब कुछ याद दिलाती है.
आ जाये तो सब कुछ भुला देती है और न आये तो सब कुछ याद दिलाती है.
फिर नसीब क्या, मुकद्दर क्या, क्या लकीरें हाथ की.
जब प्रतिभा कड़ी मेहनत नहीं करती है तो कड़ी मेहनत प्रतिभा को मात देती है.
नए चिराग जलाओ तो कोई बात बने.
सम्पूर्णता छिपकर रहती है, अपूर्णता प्रदर्शन करती है
– इसी तरह ज्ञानी सतह पर नहीं रहते, गहराई में जाते हैं.
और बुरे लोग हमारी जिंदगी में सबक.
“पर” काँटों को आज तक नहीं आया, “महक़ने का सलीक़ा”….!!