मस्त विचार 2167

यूं तो सब के साथ हंस लेता था मैं.

आज क्यूं बेवजह रोने लगा हूँ मैं.

बरसों से हथेलियां खाली ही रहीं मेरी.

फिर आज क्यों लगा सब खोने लगा हूँ मैं.

सुविचार 2292

जैसे पैदल चल पाने में असमर्थ लोग घोड़े की पीठ का सहारा लेते हैं, उसी तरह किसी दुर्बल पछ का समर्थन करने वाले वक्ता बहुत आवेश व तेजी के साथ बोलने लग जाते हैं.

मस्त विचार 2166

#जिंदगी बड़ी #अजीब सी हो गयी है.. जो #मुसाफिर थे…

वो #रास नहीं आये, जिन्हें #चाहा वो साथ नहीं आये !

सुविचार 2291

अगर आप किसी को छोटा देख रहे हो, तो आप उसे या तो “दूर” से देख रहे हो

या अपने “गुरुर” से देख रहे हो !

मस्त विचार 2165

-उड़ जाएंगे एक दिन …,तस्वीर से रंगों की तरह !

हम वक्त की टहनी पर…, बेठे हैं परिंदों की तरह !!

‘केनवास’ पर बनी ‘पेंटिग’ को रचने में रंगों को अपना अस्तित्व मिटाना पड़ता है.

सुविचार 2290

” नज़र रखो अपने ‘विचार’ पर, क्योंकि वे ”शब्द” बनते हैँ.

नज़र रखो अपने ‘शब्द’ पर, क्योंकि वे ”कार्य” बनते हैँ.

नज़र रखो अपने ‘कार्य’ पर, क्योंकि वे ”स्वभाव” बनते हैँ.

नज़र रखो अपने ‘स्वभाव’ पर, क्योंकि वे ”आदत” बनते हैँ.

नज़र रखो अपने ‘आदत’ पर, क्योंकि वे ”चरित्र” बनते हैँ.

नज़र रखो अपने ‘चरित्र’ पर, क्योंकि उससे ”जीवन आदर्श” बनते हैँ.

मस्त विचार 2164

तुमको देखा तो ये खयाल आया

जिंदगी धूप, तुम घना साया

आज फिर दिल ने एक तमन्ना की

आज फिर दिल को हम ने समझाया

तुम चले जाओगे तो सोचेंगे

हमने क्या खोया हमने क्या पाया

हम जिसे गुनगुना नहीं सकते

वक़्त ने ऐसा गीत क्यों गाया.

सुविचार 2289

स्वास्थ्य सब से बड़ी संपत्ति है. संतोष सब से बड़ा खजाना है.

आत्मविश्वास सब से बड़ा दोस्त है.

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