Collection of Thought 608
मनुष्य का अपना चरित्र ही उसके भाग्य का मध्यस्थ होता है.
मनुष्य का अपना चरित्र ही उसके भाग्य का मध्यस्थ होता है.
उस को ख़ुश रहना भी आए ये जरुरी तो नहीं.
गलत लोग सदैव गलत राह पर ही ले जाएंगे और सही लोग सदैव सही राह पर… चुनना आपको है.
उसने तब – तब धोखा दिया.
आप यदि केवल स्वयं का ही ध्यान रखेंगे, स्वयं का हित साधने में लगे रहेंगे, तो धीरे धीरे अन्य लोग भी आप पर ध्यान देना बंद कर देंगे !
इसलिए सभी का ध्यान रखते हुए सब से मिल जुल कर चलें !!!
परेशान वो हैं जिनके घरों में भरे हुए तहखाने हैं.
जो स्वीकार करता है, वही आगे बढ़ता है.