सुविचार 997
मस्त विचार – ज़िंदगी की कश्मकश में क्यूं ना आज थोड़ा जीया जाए – 874
दुख के इन कंबलों को मिल के आज सीया जाए. टूटे हुए रिश्तों पे क्यूं ना थोड़ा रोया जाए. प्यार का एक बीज उनमे मिल के आज बोया जाए. बचपन की उन उड़ानों में क्यूं ना आज थोड़ा खोया जाए. आँखों से छलकते आंसुओं की बारिश में आज भिगोया जाए. अपनेपन के जाल में क्यूं ना दुश्मनो को भी फसाया जाए. पुरानी नफरतें भूल कर उनको भी आज हंसाया जाए. पछतावे की आग में क्यूं ना थोड़ा नहाया जाए. अहंकार और घमंड को मिल के आज बहाया जाए. एक कतरा ज़िंदगी का क्यूं ना थोड़ा पीया जाए. ज़िंदगी की कश्मकश में मिल के आज जीया जाए…..
सुविचार 996
सुविचार 995
सुविचार 994
सुविचार 993
मस्त विचार 873
जो बीत गया पल उसे याद क्या रखना….. बस यही सोच कर मुस्कराते हैं हम, अपने ग़मो से दूसरों को उदास क्यों रखना.
मस्त विचार 872
” मंज़िल मिलती नहीं .. राह में रुक जाने से .. “ ” भरोसा रखना हमेशा .. अपने आप पर .. “ ” सब कुछ मिलता है .. सही वक़्त आने पर .. ”
मस्त विचार 871
जिसकी जगह और कोई नही ले सकता……




