सुविचार 997

आज को संभालने से कल संभल जाता है. भूत, भविष्य की चिंता मे सब कुछ चला जाता है.

मस्त विचार – ज़िंदगी की कश्मकश में क्यूं ना आज थोड़ा जीया जाए – 874

ज़िंदगी की कश्मकश में क्यूं ना आज थोड़ा जीया जाए.

दुख के इन कंबलों को मिल के आज सीया जाए.

टूटे हुए रिश्तों पे क्यूं ना थोड़ा रोया जाए.

प्यार का एक बीज उनमे मिल के आज बोया जाए.

बचपन की उन उड़ानों में क्यूं ना आज थोड़ा खोया जाए.

आँखों से छलकते आंसुओं की बारिश में आज भिगोया जाए.

अपनेपन के जाल में क्यूं ना दुश्मनो को भी फसाया जाए.

पुरानी नफरतें भूल कर उनको भी आज हंसाया जाए.

पछतावे  की आग में क्यूं ना थोड़ा नहाया जाए.

अहंकार और घमंड को मिल के आज बहाया जाए.

एक कतरा ज़िंदगी का क्यूं ना थोड़ा पीया जाए.

ज़िंदगी की कश्मकश में मिल के आज जीया जाए…..

सुविचार 996

उन्ही की बुद्धि स्थिर है जो अनुकूलता पा कर हर्षित नहीं होते हैं और प्रतिकूल स्थिति में दुखी नहीं होते हैं.

सुविचार 995

कमजोरी की स्थिति में अपने संकल्प को ढीला न होने दें. धन्य हैं वे लोग जो परीछा में खरे उतरते हैं. परीछा आप के चरित्र को प्रस्तुत करती है.

सुविचार 994

जीवन एक अनमोल निधि है. अगर आप किसी कारण से उस का समुचित लाभ नहीं उठा पाते हैं तो आप का पहला कर्तव्य है कि आप अपनी वर्तमान परिस्थिति का अच्छी तरह विश्लेषण करें. अपनी मुश्किलों को दूर करने का प्रयत्न करें. परिस्थितियों को अपने ऊपर हावी न होने दें.

सुविचार 993

सभ्यता में नवीनता लाने का प्रयास उस काल के श्रेष्ठ ज्ञानी ही कर पाते हैं.

मस्त विचार 873

अपनों के सितम का हिसाब क्या रखना..

जो बीत गया पल उसे याद क्या रखना…..

बस यही सोच कर मुस्कराते हैं हम,

अपने ग़मो से दूसरों को उदास क्यों रखना.

मस्त विचार 872

खुशियाँ मिलती नहीं .. कभी माँगने से .. “

” मंज़िल मिलती नहीं .. राह में रुक जाने से .. “

” भरोसा रखना हमेशा .. अपने आप पर .. “

” सब कुछ मिलता है .. सही वक़्त आने पर .. ”

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