सुविचार – बहन – 025

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अच्छे मित्र आयेंगे और चले जायेंगे, लेकिन एक बहन हमेशा मित्र के रूप में साथ देती है.
बहन – नदियों की तरह होती हैं जो सदैव अपने हिस्से का कुछ न कुछ देती रहती हैं .. और फिर भी अपने बहाव में बिन रुके बहतीं रहती हैं.
दुनिया में भाइयों की सबसे शक्तिशाली और ईमानदार रक्षक बहनें ही होती हैं.
बहनें हसीं बांटती हैं और आंसू पोंछती है.
बहनें खुशनसीबी का प्रतीक है.
बहना राखी पर तुम आ जाना,

अटूट बन्धन ये, जीवन भर का,

पड़ेगा तुझको निभाना ।

माना हम बहुत व्यस्त है,

सच कहता हूँ, मगर,

पूरी जिन्दगी अस्त व्यस्त है।

याद आता है बहना, वो पुराना जमाना,

छोटी छोटी बात में रूठना मनाना।

मेरी हर फरमाइशों को पल में पूरा करना,

मम्मी पापा के सो जाने पर,

चाय के साथ कुछ भी बना कर ले आना,

घन्टों घन्टों, रात भर कुछ मेरी सुनना,

कुछ अपनी सुनाना, दीदी बहन के साथ साथ

दोस्त भी बन जाना, दोस्ती निभाना ।

याद आता है वो लड़ना झगड़ना,

लेकिन फिर भी मुझे बचाने के लिये,

झूठ बोलकर मम्मी से पिट जाना।

अपने प्यार को फिर से,

राखी के धागे में सँजो लेना,

चली आना कलाई पर बाँधने,

ये वादा भी ले जाना बहना,

जब भी तुझको जरूरत होगी,

पलक झपकते ही मुझे सामने पायेगी,

सदियों की रीत मुताबिक,

राखी का सम्मान बहना पायेगी।

बहना तुम आ जाना,

ढेरों गिफ्ट साथ ले आना,

नही चलेगा कोई बहाना ।।

।। पीके ।।

नहीं चाहिए हिस्सा भइया,

मेरा मायका सजाए रखना.

राखी भैया दूज पर मेरा,

इंतजार बनाए रखना.

कुछ न देना मुझको चाहे,

बस अपना प्यार बनाए रखना.

पापा के इस घर में,

मेरी याद सजाए रखना.

बच्चों के मन में मेरा,

मान बनाए रखना.

बेटी हूं सदा इस घर की,

यह सम्मान संजोए रखना.

रक्षाबंधन के उपलक्ष्य में प्रसून जोशी की एक रचना:

बहन अक्सर तुम से बड़ी होती है
बहन अक्सर तुम से बड़ी होती है,
उम्र में चाहे छोटी हो,
पर एक बड़ा सा एहसास ले कर खड़ी होती है ।
बहन अक्सर तुम से बड़ी होती है,
उसे मालूम होता है तुम देर रात लौटोगे,
तभी चुपके से दरवाजा खुला छोड़ देती है,
उसे पता होता है तुम झूठ बोल रहे हो,
और बस मुस्कुरा कर उसे ढक लेती है ।
वो तुमसे लड़ती है पर लड़ती नहीं,
वो अक्सर हार कर जीतती रही तुमसे ।
जिसे कभी चोट नहीं लगती ऐसी एक छड़ी होती है,
बहन अक्सर तुम से बड़ी होती है ।
पर राखी के दिन जब एक पतला सा धागा बांधती है कलाई पे,
मैं कोशिश करता हूँ बड़ा होने की,
धागों के इस रार पर ही सही,
कुछ पल के लिए मैं बड़ा होता हूँ,
एक मीठा सा रिश्ता निभाने के लिए खड़ा होता हूँ,
नहीं तो अक्सर बहन ही तुमसे बड़ी होती है,
उम्र में चाहे छोटी हो, पर एक बड़ा सा एहसास ले कर खड़ी होती है ।
बस पढा जाए।

बहन हमारी जिंदगी का वो हिस्सा है जो सबसे खूबसूरत उपहार है दुनिया रचने वाले की ओर से। लेकिन समाज की दकियानूसी बातों की मानें तो वो परिवार की इज्ज़त है, मान-सम्मान है और उसके एक ग़लत कदम उठा लेने भर से दुनिया में हम मुंह दिखाने लायक नही है। ऐसी बातें थोपना यक़ीन मानिए बहनों के लिए किसी अभिशाप से कम नही है। पितृसत्ता यही है असलियत में बहने इससे आजादी चाहती हैं। आपका योगदान क्या है ? इस पर विचार करिए।
आपको सोचना चाहिए कि आपने अपनी बहन की नजर में अपनी इमेज क्या बनाई है एक खुर्राट भाई या एक सहज दोस्त? खुद से सवाल करिए अगर आप खुर्राट भाई हैं तो खुद को बदलिए एक बहन के लिए रक्षाबंधन पर आपके द्वारा दिया गया सबसे खूबसूरत उपहार होगा।
बहन की जिंदगी में भी उसका अपना एक स्पेस है। उसकी निजता है। लेकिन ज्यादातर भाई ख्याल रखने से ज्यादा मॉनिटरिंग करते है। उसका मन सुनने से ज्यादा जासूसी करते हैं। उसकी दिनचर्या पर बात करने से ज्यादा फोन कॉल्स, सोशल मीडिया एकाउंट की एक्टिविटी और उसके दोस्त कौन है? ये जानने की जुगत में रहते हैं। असलियत में बहन इससे सुरक्षा का भाव नही अपना स्पेस खत्म होना फील करती है। इससे भाइयों का थोड़ा बचना चाहिए। ख़्याल रखिए नज़र भी रखिए लेकिन उस हद तक जब तक उसे लगे की उसकी आज़ादी में सेंध ना लग रही हो।
घर का माहौल ऐसा बनाइए कि बहन जब महीने के सबसे मुश्किल चार दिनों में हो तो मां की तरह आप से भी सहज होकर आपसे पैंपर हो सके। ये सब तभी संभव हो सकता है जब आप एक सहज दोस्त की तरह व्यवहार रखेंगे। बहन को सुनाइए नही उसकी सुनिए। डांटने से ज्यादा प्यार से मुद्दे सुलझाइए। उसके पसंद की चीजें अगर आप बना नहीं सकते तो कम-से-कम बाहर ले जाकर क्वालिटी टाइम बिताकर साथ खाइए। वो क्या पहनना चाहती है, वो क्या अपनी जिंदगी में करना चाहती है, उसकी जिंदगी में उसके अपने सपने क्या है ये सब उसके हिस्से छोड़ दीजिए। भाईगिरी से बचिए।
ये सब कर के बहनों को उसके पसंद का उपहार आप दें सकते है। चीजें समान और पैसों से ज्यादा ये अनमोल है बहन के चेहरे पर बेफ़िक्री भरी मुस्कान और उसके हिस्से की आजादी। ये आप कर सकते हैं। कर के देखिए दुनिया का तो पता नही पर बहन खुद को खुशनसीब समझेगी आप जैसा भाई पाकर। इससे बेहतर कुछ और हो सकता है क्या ?
दुनिया की सारी बहनों को उनके हिस्से का जहां मिले आजादी मिले इन्हीं दुवाओं के साथ राखी की शुभकामनाएं और ढेर सारा प्यार।
– पथिक मनीष

सुविचार – बेटी – बेटियां – लड़की – 024

जब आप एक लड़की को शिक्षित करते हैं, तो आप देश का चेहरा बदलना शुरू कर देते हैं.

When you educate a girl, you begin to change the face of a nation. – Oprah Winfrey

बेटियों के हाथों की सुंदरता बढ़ाने के लिए उन्हें चूड़ियां नहीं, किताबें दीजिए..

_ताकि वे अपना भविष्य संवार सकें.!!

पहले बेटियां विवाह के बाद परदेश जाती थीं,

_ अब वे पढ़ाई और जॉब के लिए भी परदेश चली जाती हैं.!!
प्रकृति का नियन्ता जब हमसे बात करना चाहता है, तभी वह हमारे घर एक कन्या शिशु बनकर अवतरित हो जाता है,,, लेकिन हम कहां यह सूक्ष्म बात जान – समझ पाते हैं.

When the controller of nature wants to talk to us, he reincarnated in our house in the form of a girl child, but how are we able to know and understand the subtle thing.

लड़का लोग लड़की से बेहतर है के पीछे कोई साइंस नही बल्कि धूर्तता है. _ चूँकि धूर्त लोगो के शासन का दौर है तो धूर्तता राज कर रही है.
बेटियों को तितली नहीं मधुमक्खी बनाओ, पंख दो मगर डंक भी दो.
अपनी बेटी को और कुछ देने के बजाय उसे एक घर दें.!
लड़की का जॉब करना उसमें भरोसा पैदा करता है कि _वो कुछ कर सकती है.

_ जॉब सर उठाकर जीना और आत्मसम्मान पैदा करता है,
_ जॉब दुनिया की समझ कराती है, इंसानों की पहचान कराती है.
_ जॉब अच्छे बुरे की समझ पैदा करती है और दुनियादारी सिखाती है.
_ जॉब लड़की को खुद की इज़्ज़त करना सिखाती है, वो आर्थिक रूप से स्वतंत्र रहती है, _ उसे वैचारिक रूप से मज़बूत करती है,
_ बहुत कुछ हैं एक लड़की के लिए जॉब के मायने..उसे सिर्फ पैसों से मत तोलिये,
_ अगर आपके पास बहुत पैसा है _तब भी बेटी को जॉब करने दीजिये..
_उसे मज़बूत बनने दीजिये..!!
किसी क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना और आर्थिक रूप से आत्म निर्भर होना…

_ महिलाओं में इस बात की समझ शिक्षित होने के बाद ही आई.
_ पहले लड़कियां जैसे भी घर में ब्याही गईं, जो भी दुख-सुख मिले, उन्होंने घर में रहने में ही आराम महसूस किया.
_ न उन्होंने कभी स्वयं को उस स्तर से ऊंचा उठाने की बात सोची, न ही कभी घर में आर्थिक मदद करने की बात सोची.
_ न उन्हें अपने ऊपर हो रहे अत्याचार का पता था, न अपने अपमान का ख्याल था.
_ शिक्षा ने उनकी आंखें खोली, उनके सामने एक एक नई दुनिया का विस्तार किया और उन्हें इज़्ज़त से जीने की समझ दी, अपने अधिकारों के प्रति सचेत किया,
_ अन्यथा वे ‘नारी तुम देवी हो’ के भ्रम में ही अनादृत होती रहतीं.!!
– Manika Mohini
पढ़ती हुई, शिक्षा ग्रहण करती हूं लड़कियां खूबसूरत लगती हैं, खूबसूरत होती हैं,

_इधर-उधर घूमती लड़कियां वक्त बर्बाद करती हैं, इसलिए उनमें सोच और अक्ल की सुंदरता नहीं होती.!!
_ धाँसू लड़कियां सामान्यतः किसी को मुँह नहीं लगातीं..  और फुस्स लड़कियां किसी को भी दिल में बैठा लेती हैं.!!
– Manika Mohini
सुंदर लड़की आप मत बनो क्योंकि “ताकत” में “वास्तविक सुंदरता” है..

_ बाजुओं में बल और भीतर आत्मबल से परिपूर्ण रहो,
_ आप जिंदगी में इस तरह आगे बढ़ें कि आपको रोकने वाले भी कांपने लगें !!
बस इतना ही फर्क रहा लड़के और लड़कियों में,

_ कि लड़कों ने अपनी आजादी से, किताबें और नौकरी चुनी..
_ और लड़कियों ने अपनी आजादी के लिए, किताबें और नौकरी चुनी..!!
कमाना केवल पेट भरने के लिए ही जरूरी नहीं है, बल्कि साहसी और आत्मविश्वासी बनने के लिए भी जरूरी है.

_ आर्थिक आत्मनिर्भरता आपको असली आजादी देती है.
_ इसलिए, प्यारी लड़कियों, हर हाल में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनो.
_ सिर्फ समय बिताने के लिए नहीं, बल्कि अपनी आज़ादी के लिए कमाओ.
_ चाहे पति करोड़पति हो या पिता अरबपति — फिर भी कमाओ.
_ कमाने से आप में पूरी दुनिया अकेले घूमने का आत्मविश्वास और साहस आता है.
_ परिवार और समाज में आप इज्जत पाती हैं, लोग अपने महत्वपूर्ण फैसलों में आपसे सलाह लेने आते हैं.!!
घर आने पर दौड़ कर जो पास आये, उसे कहते हैं बिटिया

थक जाने पर प्यार से जो माथा सहलाए, उसे कहते हैं बिटिया

“कल दिला देंगे” कहने पर जो मान जाये, उसे कहते हैं बिटिया

हर रोज़ समय पर दवा की जो याद दिलाये, उसे कहते हैं बिटिया

घर को मन से फूल सा जो सजाये, उसे कहते हैं बिटिया

सहते हुए भी अपने दुख जो छुपा जाये, उसे कहते हैं बिटिया

दूर जाने पर जो बहुत रुलाये, उसे कहते हैं बिटिया

पति की होकर भी पिता को जो ना भूल पाये, उसे कहते हैं बिटिया

मीलों दूर होकर भी पास होने का जो एहसास दिलाये, उसे कहते हैं बिटिया

“अनमोल हीरा” जो इसीलिए कहलाये, उसे कहते हैं बिटिया.

बहुत “चंचल” बहुत “खुशनुमा ” सी होती है “बेटिया”.

“नाज़ुक” सा “दिल” रखती है “मासूम” सी होती है “बेटिया”.

“बात” बात पर रोती है “नादान” सी होती है “बेटिया”.

“रेहमत” से “भरपूर” “खुदा” की “Nemat” है “बेटिया”.

“घर” महक उठता है जब “मुस्कराती” हैं “बेटिया”.

“अजीब” सी “तकलीफ” होती है, जब “दूसरे” घर जाती है “बेटियां”.

“घर” लगता है सूना सूना “कितना” रुला के “जाती” है “बेटियां”

“ख़ुशी” की “झलक” “बाबुल” की “लाड़ली” होती है “बेटियां”

ये “हम” नहीं “कहते” यह तो “रब ” कहता है.

क़े जब मैं बहुत खुश होता हूँ तो “जनम” लेती है

“प्यारी सी बेटियां”

मैं बिल्कुल ठीक हूँ पापा….

_ रात के नौ बजते ही नजरें आपकी फोन पे होती हैं,
_ मम्मी बार- बार पूछती है पर आपको भूख नहीं होती है
_ हालचाल लेकर हमारा, एक सुकून सा पा जाते हैं
_ बात हो जाने पर ही आप खाने की टेबल पर जाते हैं
_ इतना सोचा मत करो पापा, आप मस्ती में जीया करो
_ मैं बिल्कुल ठीक हूँ पापा, मेरी फ़िकर ना किया करो
_ मेरे रूम की चादरें हर हफ्ते बदलवाते हो
_ मेरे खिलौने आज तक आप बड़े प्यार से सजाते हो
_ मेरे एक मामूली सी शर्ट लाने पर, सारे दोस्तों को बताते हो
_ ये रंग मेरी बिटिया की पसंद का है
_ पूरा घर उसी रंग से रंगवाते हो
_ बस हो गई हमारी पसंद, कभी अपने मन का भी किया करो
_ मैं बिल्कुल ठीक हूँ पापा, मेरी फ़िकर ना किया करो
_ मौसम है अब आम का, पता नहीं उसे वहाँ मिला या नहीं
_ मुझे सब मिल जाता है यहाँ पापा, आप मेरे बिना भी कुछ खाया करो
_ जब याद आये तो बोला करो, अपनी फीलिंग्स न छुपाया करो
_ मैं आ जाया करुँगी मिलने पापा, आप बिलकुल न घबराया करो
_ बिना सोचे जब भी दिल करे, मुझे फ़ोन किया करो
_ मैं बिल्कुल ठीक हूँ पापा, मेरी फ़िकर ना किया करो
_ हर तरह का वक़्त ये जिन्दगी मुझे दिखाती है
_ छोड़ आई वो बचपन ये कह कर मुझे चिढ़ाती है
_ पर सच बोलूँ पापा, आपका साथ है ये सोचकर
_ खुद को बेहद खुशनसीब पाती हूँ
_ कोई कितना भी बड़ा महारथी हो,
_ आपको देख कर मैं खुद को बड़ा अमीर पाती हूँ
_ बहुत जी लिया हमारे लिए, थोड़ा अपने लिए भी जीया करो
_ मैं बिल्कुल ठीक हूँ पापा, मेरी फ़िकर ना किया करो
_ पता है आज भी चोट लगने पर, मैं पापा- पापा चिल्लाती हूँ
_ लड़ाई जिससे भी हो, मैं आज भी सबको आपके नाम से धमकाती हूँ
_ वो हमारे नाम के फिक्स डिपाजिट, कभी अपने लिए भी इस्तेमाल किया करो
_ मैं बिल्कुल ठीक हूँ पापा, मेरी फ़िकर ना किया करो
_ सोचा था फादर्स डे है, कुछ लिखूं, चलो बचपन की यादों को संवारती हूँ
_ फिर लिखने बैठी तब अहसास हुआ, सिर्फ एक दिन_बिलकुल नहीं
_ मैं आप पर पूरी ज़िंदगी वारती हूँ
_ वो गाने जो साथ में गाते थे, उन्हें गुनगुनाते रहा करो
_ मैं बिल्कुल ठीक हूँ पापा, मेरी फ़िकर ना किया करो
— मैं बिल्कुल ठीक हूँ पापा….
पापा मुझे छोड़ने स्टेशन आया न करो ,

.. आँसू छिपाते हो फेर कर नज़रे,
..इतना झूठा मुस्कुराया न करो ..
पापा मुझे छोड़ने आया न करो
… किफ़ायत में घर भर की लाइट्स बुझाते,
… सोच कर भी न कितने सामान खरीदते,
.. . माइलेज चेक करते रिजर्व में स्कूटर हमेशा
… और मुझे ए टी एम थमाया न करो …
पापा मुझे छोड़ने स्टेशन आया न करो ।
…पानी की बॉटल रखी या नही,
टिकट कही मैं भूली तो नही,
…पर्स में खुले पैसे रखे या नही
..इतना नम प्यार जताया न करो ..
..पापा मुझे छोड़ने आया न करो ।
सीट के नीचे खुद बैग जमाते,
ध्यान रखना अकेली जा रही,
साथ की किसी महिला को बताते,
मेरी फिक्र में खुद को जलाया न करो
…पापा मुझे छोड़ने आया न करो ।
पहुँचते ही कर देना फोन,
अब कब होगा आना फिर तुम्हारा ,
रूह तक को कर दे जो तन्हा इस तरह
सर पर मेरे उदास हाथ फिराया न करो.
.आप स्टेशन आया न करो ।
मैं खामोश रीती हो जाती हूँ,
देर तक गले लगाया न करो,
देखती रहती हूँ खिड़की से प्लेटफार्म
ग़मगीन खड़े हाथ हिलाया न कर ,.. …
..आप स्टेशन आया न करो ।
चप्पा चप्पा कर देते हो वीरान,
रुन्धा गला बेमतलब बातो में छिपाया न करो,
मेरा आगा पीछा सोच सोच,
अपना कलेजा इतना दुखाया न करो,……
मुझे छोड़ने स्टेशन आया न करो
लो बात करो कह फ़ोन माँ को थमा,
बाद में पूछते हो उनसे ब्यौरा सारा,
नया मोबाइल किस काम का कहकर
हमारे नाम पाई पाई के कागज़ बनवाया न करो….
पापा मुझे छोड़ने आप स्टेशन आया न करो।
“बेटी” बनकर आई हु माँ-बाप के जीवन में,

बसेरा होगा कल मेरा किसी और के आँगन में,

क्यों ये रीत “रब” ने बनाई होगी,

“कहते” है आज नहीं तो कल तू “पराई” होगी,

“देके” जनम “पाल-पोसकर” जिसने हमें बड़ा किया,

और “वक़्त” आया तो उन्ही हाथो ने हमें “विदा” किया,

“टूट” के बिखर जाती है हमारी “ज़िन्दगी ” वही,

पर फिर भी उस “बंधन” में प्यार मिले “ज़रूरी” तो नहीं,

क्यों “रिश्ता” हमारा इतना “अजीब” होता है,

क्या बस यही “बेटियो” का “नसीब” होता है ??

●~~”बेटियाँ कुछ लेने नहीं आती है पीहर”~~●

~~~~ ..बेटियाँ….पीहर आती है..

..अपनी जड़ों को सींचने के लिए..

..तलाशने आती हैं भाई की खुशियाँ..

..वे ढूँढने आती हैं अपना सलोना बचपन..

..वे रखने आतीं हैं….आँगन में स्नेह का दीपक..

..बेटियाँ कुछ लेने नहीं आती हैं पीहर..

..बेटियाँ….ताबीज बांधने आती हैं दरवाजे पर..

..कि नज़र से बचा रहे घर..

..वे नहाने आती हैं ममता की निर्झरनी में..

..देने आती हैं अपने भीतर से थोड़ा-थोड़ा सबको..

..बेटियाँ कुछ लेने नहीं आती हैं पीहर..

.बेटियाँ….जब भी लौटती हैं ससुराल..

..बहुत सारा वहीं छोड़ जाती हैं..

..तैरती रह जाती हैं….घर भर की नम आँखों में..

..उनकी प्यारी मुस्कान..

..जब भी आती हैं वे, लुटाने ही आती हैं अपना वैभव..

..बेटियाँ कुछ लेने नहीं आती हैं पीहर..

“बिटिया तेरी बहुत याद आयेगी”

बिटिया तेरी बहुत याद आयेगी,

पल पल मुझको रुलायेगी।

घर का कोना कोना तुझे पुकारेगा,

कण कण में तेरा चेहरा मुस्करायेगा।

क्या तूने जादु कर रखा था,

जन जन को मोह रखा था।

तुझे टीका लगाते लगाते, मम्मी की भी,

आँखें डबडबाई थी,

मम्मी की रोके नहीं रुकती रुलाई थी।

तुम माँ बेटी हो या सखी सहेली,

मेंरी समझ में कभी ये बात ना आयी।

किचन का menu तेरा, घर का सबका

Dress code था तुम्हारा,

मम्मी कौन सा पार्लर जायेगी,

पापा कहाँ हेयर कलर करायेंगे,

कौन सी साड़ी, कौन सी बिंदी,

कौन सी क्रीम मम्मी लगायेगी,?

पापा की कैसी ड्रेस आयेगी,

कब कौन सा क्या पहनना है ?

सबमें मर्जी तुम्हारी थी,

मम्मी की सारी जिम्मेदारी,

तेरे ही हवाले थी।

कलेजा मेरा फटता है,

कैसे गुजरेंगे दिन तेरे बिन,

ये सोच कर भी दिल फटता है।

आज है मेहन्दी तुम्हारी,

कल फिर जाने की तैयारी,

परसों तुम्हारा गठबंधन, फिर कन्यादान होगा।

सृष्टि के नियम के मुताबिक,

अपने कलेजे के टुकड़े को फिर,

एक बाप, अपने कलेजे से दूर कर देगा।

अब तेरी यादों का ही सहारा होगा,

हर चीज में अक्स तुम्हारा होगा,

भाई तेरा समय से पहले बड़ा हो गया,

मुझसे गम छुपाता है, मेरे सामने बस,

झूठे ही मुस्कराता है,

मुझे मालूम है उस पर भी पहाड़ टूट रहा है,

ऊपर से हँस रहा अन्दर से वो रो रहा है,

तुझे आशीर्वाद है हमारा,

तेरा जीवन सदा हो उजियारा,

हमेशा हँसती हँसाती रहना,

जिस घर जाओ, मन्दिर कर देना,

बड़ों को आदर, छोटों को प्रेम देना ।।

|| पीके ||

तू क्यों रोती है माँ,

बेटी है पराया धन,

ये तुझे भी पता था, माँ

दूर नहीं, तेरे पास हूँ माँ,

तेरे घर के कण कण में ,

मेरा निवास है माँ,

दूर होती तो कैसे में रोज़,

तुझसे बात कर पाती माँ,

तुम मेरे लिए आँसू ना बहाना,

मना लेना दिल को,

पापा को भी समझाना,

कैसे रो रहे थे लिपट कर,

हम बच्चों से भी

छोटा बच्चा बन कर,

टूट ना जाना, उनको हिम्मत बंधाना,

चिरिया थी तेरे घर की

चहक रही थी कोने कोने में,

मुझको तो उड़ना ही लिखा था,

रब ने मेरी किस्मत में, माँ .

किसने ये रीत बनाई,

प्रीत वही, पर बेटी परायी,

अब ना तुझसे झगड़ा करुँगी,

ना अब रूठी को मनाना, माँ,

स्कूल से लौटने में अब कभी,

देर ना होगी माँ,

कपड़ो के लिए अब ना रूठना ,

अब ना तेरा मनाना होगा माँ,

वो मेरी सारी कास्मेटिक,

जिसके लिए में नीत तुझसे,

लड़ती थी माँ,

अब तुम ही रख लेना,

किसी को न देना, माँ,

अब जब भी मेरी डिश बनाओगी,

तुम खा लेना, पापा और भाई को,

खिला देना माँ,

भाई को देखा माँ,

कैसे भैया बनकर मेरे,

मेरे माथे को चूम लिया,

लगा जैसे मुझको सुखी होने का,

आशीर्वाद दिया,

कितना बड़ा हो गया है,

फिर भी वो बच्चा है,

उसको मना लेना, कलेजे से लगा लेना,

तुमको गम कैसा, माँ,

एक घर से निकल कर,

और एक घर मिल गया,

यहाँ भी पापा का साया,

और माँ का आँचल मिल गया,

वहाँ घर की चिरिया थी,

यहाँ मै बुलबुल हूँ,

सबका आशीर्वाद है माँ,

बहुत ही प्यार करनेवाला,

हमसफ़र साथ है माँ …

..PK

” मै बोझ नहीं हूँ “

शाम हो गई अभी तो घुमने चलो न पापा,

चलते चलते थक गई कंधे पे बिठा लो न पापा,

अंधेरे से डर लगता सीने से लगा लो न पापा,

मम्मी तो सो गई,

आप ही थपकी देकर सुलाओ न पापा,

स्कूल तो पूरी हो गई,

अब कॉलेज जाने दो न पापा,

पाल पोस कर बड़ा किया,

अब जुदा तो मत करो न पापा,

अब डोली में बिठा ही दिया तो,

आंसू तो मत बहाओ न पापा,

आप ने मेरी हर बात मानी,

एक बात और मान जाओ न पापा,

इस धरती पर बोझ नहीं मै,

दुनियाँ को समझाओ न पापा,

” मै बोझ नहीं हूँ “

बेटी के प्यार को कभी आजमाना नहीं

वह फूल है, उसे कभी रुलाना नहीं

पिता का तो गुमान होती है बेटी

जिन्दा होने की पहचान होती है बेटी

उसकी आँखें कभी नम न होने देना

उसकी जिन्दगी से कभी खुशियां कम न होने देना

उंगली पकड़ कर कल जिसको चलाया था तुमने

फ़िर उसको ही डोली में बिठाया था तुमने

बहुत छोटा सा सफर होता है बेटी के साथ

बहुत कम वक्त के लिए वह होती हमारे पास

असीम दुलार पाने की हकदार है बेटी

समझो रब का आशीर्वाद है बेटी

पिता :- कन्यादान नहीं करूंगा जाओ,

मैं नहीं मानता इसे,

क्योंकि मेरी बेटी कोई चीज़ नहीं, जिसको दान में दे दूँ ;

मैं बांधता हूँ बेटी तुम्हें एक पवित्र बंधन में,

पति के साथ मिलकर निभाना तुम,

मैं तुम्हें अलविदा नहीं कह रहा,

आज से तुम्हारे दो घर, जब जी चाहे आना तुम,

जहाँ जा रही हो, खूब प्यार बरसाना तुम,

सब को अपना बनाना तुम, पर कभी भी

न मर मर के जीना, न जी जी के मरना तुम,

तुम अन्नपूर्णा, शक्ति, रति सब तुम,

ज़िंदगी को भरपूर जीना तुम,

न तुम बेचारी, न अबला,

खुद को असहाय कभी न समझना तुम,

मैं दान नहीं कर रहा तुम्हें,

मोहब्बत के एक और बंधन में बाँध रहा हूँ,

उसे बखूबी निभाना तुम ……………..

*एक नयी सोच एक नयी पहल*सभी बेटियां के लिए ;

🌿➖बोये जाते हैं बेटे..

🌿➖पर उग जाती हैं बेटियाँ..

🌿➖खाद पानी बेटों को..

🌿➖पर लहराती हैं बेटियां.

🌿➖स्कूल जाते हैं बेटे..

🌿➖पर पढ़ जाती हैं बेटियां..

🌿➖मेहनत करते हैं बेटे..

🌿➖पर अव्वल आती हैं बेटियां..

🌿➖रुलाते हैं जब खूब बेटे.

🌿➖तब हंसाती हैं बेटियां.

🌿➖नाम करें न करें बेटे..

🌿➖पर नाम कमाती हैं बेटियां..

🌿➖जब दर्द देते हैं बेटे…

🌿➖तब मरहम लगाती हैं बेटियां..

🌿छोड़ जाते हैं जब बेटे..

🌿तो काम आती हैं बेटियां..

🌿आशा रहती है बेटों से.

🌿 पर पूर्ण करती हैं बेटियां..

🌿हजारों फरमाइश से भरे हैं बेटे….

🌿पर समय की नज़ाकत को समझती बेटियां..

🌿बेटी को चांद जैसा मत बनाओ कि हर कोई घूर घूर कर देखे..

📍लेकिन📍 ———————– बेटी को सूरज जैसा बनाओ

ताकि घूरने से पहले सब की नजर झुक जाये..

” बेटियां “

चिड़ियों की झुंड सी चहचहाती हैं ” बेटियां “
पगडंडियों पर नीले पीले आंचल उड़ आती हैं ” बेटियां “
आंगन की तुलसी बनकर घर को महकाती हैं ” बेटियां “
हंसी ठिठोली कर सबका मन बहलाती हैं ” बेटियां “
पायल की रुनझुन सी गुनगुनाती हैं ” बेटियां “
पानी सी निर्मल स्वच्छ नजर आती हैं ” बेटियां “
क्यों देखते हैं दोगली निगाहों से इन्हें जमाने वाले –
किसी भी मकान को घर बनाती हैं ” बेटियां”
कुछ बरस बाद बेटी पराए घर चली जायेगी, _यह सोचकर मातापिता कुछ अधिक दुलार लुटाते हैं बेटी पर..कपड़े खिलौने, खाने पीने की ज़िदें पूरी करते हुए निहाल होते हैं कि _देखो जी हम अपनी बेटी को बहुत प्यार करते हैं,

_यह तो हमारी परी है… पर यह तब तक पापा कि परियां हैं..
_ जबतक उनकी इच्छाएं, आकांक्षाएं कपड़े लत्तों, खिलौनों तक हों..
_करियर हो या विवाह _उसमें इन्होंने ज़िद कि नहीं कि _उनके पर कतर दिए जाते हैं..
— बेटे को सहज स्नेह से पालने वाले माता पिता दया मिश्रित गर्व से बेटियों को पालते हैं कि उनका अहम इससे संतुष्ट होता है,
_ वह कहते हैं कि कल को इसे पराए घर चले जाना है सो इसके लाड़ उठा लो, इसकी ज़िदें पूरी कर दो..
_पर यदि बेटी अपनी ज़िन्दगी का कोई निर्णय स्वयं करना चाहे तो _पल भर में इनका प्यार काफ़ूर हो जाता है..
–इस दुनिया में अपना कहीं घर न होने के दर्द को लड़कियां ताउम्र झेलती हैं,
_मायके में उसकी जाने कितनी इच्छाओं को यह कहकर टाल दिया जाता है कि
_जब अपने घर [ ससुराल ] जाना तब वहां पूरी करना..
_और ससुराल में सुनने को मिलता है कि अपने घर से यही सीखकर आई हो क्या ?
–ज़िन्दगी भर ससुराल में मायके की तारीफ़ और मायके में ससुराल की तारीफ़ करके लड़कियां अपने लिए घर नहीं केवल छत जुटाती हैं…
_वह ससुराल में कभी नहीं बतातीं, _अपने साथ मायके में हुए दुहरे व्यवहार को
_और बरसों बरस ससुराल में हुए अत्याचारों को मायके में छुपाती हैं..
– समय आ गया है कि पापा की परियों को प्यार नहीं अधिकार मांगना चाहिए,
_दिखावे, झूठ और दया भरे जीवन के बजाय खुरदुरा सच स्वीकार करना चाहिए..
_पापा की परी के बजाय एक सामान्य इंसान होने पर ज़ोर देना चाहिए..!!
जब तक पिता जिंदा रहते है, बेटी मायके में हक़ से आती है और घर में भी ज़िद कर लेती है और कोई कुछ कहे तो डट के बोल देती है कि मेरे बाप का घर है.

पर जैसे ही पिता मरता है और बेटी आती है तो वो इतनी चीत्कार करके रोती है कि, सारे रिश्तेदार समझ जाते है कि बेटी आ गई है.

और वो बेटी उस दिन अपनी हिम्मत हार जाती है, क्योंकि उस दिन उसका पिता ही नहीं उसकी वो हिम्मत भी मर जाती हैं.
आपने भी महसूस किया होगा कि पिता की मौत के बाद बेटी कभी अपने भाई- भाभी के घर वो जिद नहीं करती जो अपने पापा के वक्त करती थी,
जो मिला खा लिया, जो दिया पहन लिया _क्योंकि जब तक उसका पिता था _तब तक सब कुछ उसका था _यह बात वो अच्छी तरह से जानती है.
आगे लिखने की हिम्मत नहीं है, बस इतना ही कहना चाहता हूं कि _पिता के लिए बेटी उसकी जिंदगी होती है, पर वो कभी बोलता नहीं, और बेटी के लिए पिता दुनिया की सबसे बड़ी हिम्मत और घमंड होता है, पर बेटी भी यह बात कभी किसी को बोलती नहीं है.
पिता बेटी का प्रेम समुद्र से भी गहरा है.
मैं नहीं सिखा पाऊँगी अपनी बेटी को बर्दाश्त करना एक ऐसे आदमी को जो उसका सम्मान न कर सके.

_ कैसे सिखाए कोई माँ अपनी फूल सी बच्ची को कि पति की मार खाना सौभाग्य की बात है ?
_ मैंने तो सिखाया है कोई एक मारे तो तुम चार मारो.
_ हाँ, मैं बेटी का घर बिगाड़ने वाली बुरी माँ हूँ, …..
….लेकिन नहीं देख पाऊँगी उसको दहेज के लिए बेगुनाह सा लालच की आग में जलते हुए.
_ मैं विदा कर के भूल नहीं पाऊँगी, अक्सर उसका कुशल पूछने आऊँगी.
_ हर अच्छी-बुरी नज़र से, ब्याह के बाद भी उसको बचाऊँगी.
_ बिटिया को मैं विरोध करना सिखाऊँगी..
_ ग़लत मतलब ग़लत होता है, यही बताऊँगी..
_ देवर हो, जेठ हो, या नंदोई, पाक नज़र से देखेगा तभी तक होगा भाई..!!
_ ग़लत नज़र को नोचना सिखाऊँगी, ढाल बनकर उसकी ब्याह के बाद भी खड़ी हो जाऊँगी.“
_ डोली चढ़कर जाना और अर्थी पर आना”, ऐसे कठिन शब्दों के जाल में उसको नहीं फसाऊँगी.
_ बिटिया मेरी पराया धन नहीं, कोई सामान नहीं जिसे गैरों को सौंप कर गंगा नहाऊँगी.
_ अनमोल है वो अनमोल ही रहेगी..
_ रुपए-पैसों से जहाँ इज़्ज़त मिले ऐसे घर में मैं अपनी बेटी नहीं ब्याहुँगी.
_ औरत होना कोई अपराध नहीं, खुल कर साँस लेना मैं अपनी बेटी को सिखाऊँगी.
_ मैं अपनी बेटी को अजनबी नहीं बना पाऊँगी.
_ हर दुःख-दर्द में उसका साथ निभाऊँगी,
_ ज़्यादा से ज़्यादा एक बुरी माँ ही तो कहलाऊँगी.
मां

⚜️⚜️
मां… कितना सिखाया तुमने,
रिश्ते के ताने बाने ,
कैसे बताया तुमने,
घर और जिंदगी को सजाने के सलीके.
क्यों नहीं बताया…
दुनिया तुम्हारी तरह सरल नहीं है.
⚜️
कलम किताबें पकड़ के पढ़ना सिखा दिया,
मुझे अपने कॉलेज का टॉपर बना दिया.
क्यों नहीं बताया लोगों के चेहरे,
फरेबी नजरों को पढ़ने का सलीका.
⚜️
बताना था ना मां..
पलट के जवाब देना भी आना चाहिए.
हमेशा चेहरे पर मुस्कुराहट वाली
संस्कारों की चाबुक क्यों थमा दिया .
⚜️
ये मुझे खुद से भी बगावत नही करने देती.
दुनिया के दोहरे चेहरे नही समझने देती
⚜️
लक्ष्मी सरस्वती बता दिया…
क्यों नहीं बताया??
जिंदगी रण क्षेत्र में कभी-कभी काली भी बनना होगा.
⚜️
बेटी हूं.
बहु हूं.
पत्नी हूं.
सब बहुत अच्छी हूं.
मगर मैं एक इंसान हूं
तकलीफ होती है.
मुझे भी थोड़ा बुरा बना देती.
मुझे भी थोड़ा जीना सिखा देती.
⚜️
संस्कारों की गठरी के साथ..
छोटी सी गठरी बदतमीजी की भी देनी थी ना मां.
तो शायद इतनी आहत ना होती.
तुम्हारी….बेटी.
सुनिए बेटियाँ #स्पेशल नहीं होती हैं।

उनके पास कोई #जादू_की_छड़ी नहीं होती है।
वे #परियाँ नहीं होती हैं।
वे #देवियाँ नहीं होती हैं।
वे रुन-झुन का #संगीत बजाने के लिए नहीं पैदा होती हैं।
वे #घर_छोड़ कर जाने के लिए भी नहीं होती हैं।
वे #दूसरा परिवार #गुलज़ार करने के लिए भी पैदा नहीं होती हैं।
बेटियाँ एकदम #वैसी ही होती हैं जैसे #बेटे
वैसी ही आँखें, वैसे ही हाथ, वैसे ही पैर और वैसा ही मन, वैसी ही #इच्छाएँ
न एक रत्ती कम और न एक रत्ती ज़्यादा।
#ख़ास कहलाने की उनकी कोई इच्छा नहीं होती।
ना ही उन्हें ख़ास बनना है।
उन्हें उतना ही #आम होना है जितना बेटे आपके लिए।
उन्हें उतने ही #अधिकार चाहिए जितना उनका #वाजिबन हक़ है और जितना आप अपने बेटों को हँसते-खेलते दे देते हैं।
बेटियाँ #हीरा नहीं है जिन्हें सहेजे जाने की ज़रूरत है।
वे भी वैसा ही अनगढ़ पत्थर का टुकड़ा हैं जैसे लड़के और जिन्हें अपनी मंज़िल ख़ुद तय करनी है अपने बूते।
बेटियों को ख़ास कहकर उनके हाथ से कमान #छीन लेने की दास्ताँ उतनी ही पुरानी है जितनी औरतों को #देवी कहकर उनकी इच्छाओं को दबा देने की।
इतना कीजिए कि अपना ख़ास वाला प्रेम अपने पास रखिए, बेटियों के लिए बस वही #समान_दृष्टि ले आइये, जिससे बेटों को देखते हैं।
इतना #हासिल हो जाए। बाक़ी दुनिया बराबर #अपने_बूते कर ही लेंगी वे।
पीहर से ससुराल……

पीहर में जन्म से मिल जाता हक़ का प्यार,
ससुराल में हर पल जिसका रहता इंतज़ार।
जहां अपनी पसंद की चीजें ही मिली
अब दूसरों के पसंद का रहता ख्याल
कितना कुछ बदलता है कितना कुछ छूटता है
एक लड़की को शादी कर जब ससुराल जाना होता है।
सुबह जहां मन भर सोने की आदत होती,
वहीं अब थोड़ी देर की न इजाजत होती
जहां आदत थी बात बात पर गुस्साने की ,
आज हो गई बिना बात यूहीं सुनने की
कितना कुछ बदलता है कितना कुछ छूटता है
एक लड़की को शादी कर जब ससुराल जाना होता है।
ख्वाहिशें अपनी सारी धूमिल हो जाती
जब खुद से पहले परिवार की बातें आतीं
अब वहां के इच्छाओं को ही अपना बनाना पड़ता है
उठें न संस्कारों पर खुद को जरा दबाना पड़ता है
कितना कुछ बदलता है कितना कुछ छूटता है
एक लड़की को शादी कर जब ससुराल जाना होता है.
आज बेटी दिवस है :

‘तू क्यों चली गई ?
खिलखिलाता बचपन
मुस्कुराती चितवन
तोड़ नेह का बंधन
तू क्यों चली गई ?’
आँगन की छम-छम
चौके की सिहरन
पूरे घर की धड़कन
तू क्यों चली गई ?’
मेज पर करती पढ़ाई
घर में सबसे लड़ाई
लेकर सबकी बड़ाई
तू क्यों चली गई ?’
सहमी सी मेज
सिसकती कुर्सी
सुबकती किताबें
तू क्यों चली गई ?’
कोने से घूरती
धूल भरी सायकल
भौंचक मोपेड
तू क्यों चली गई ?’
पुरानी चप्पलें
तह लगे कपड़े
चुप आलमारियाँ
तू क्यों चली गई ?’
वो उछलकूद
वो गहमागहमी
वो रूठना मनाना
तू क्यों चली गई ?’
हर बात पे गुस्सा
हर बात से आहत
हर बात की चिन्ता
तू क्यों चली गई ?’
बहना से भिड़ंत
लड़ाई-झगड़े अनंत
इस तरह करके अंत
तू क्यों चली गई ?’
ढूंढती सुबह
बेचैन दोपहर
सवालिया शाम
तू क्यों चली गई ?’
खिड़कियाँ सिसकती
दरवाजे चिहुंकते
परदे फड़कते
तू क्यों चली गई ?’
दरकते फर्श
सूनी दीवारें
उदास गलियारे
तू क्यों चली गई ?’
बेचैन हवाएँ
वीरान सा घर
सिसकता आँगन
तू क्यों चली गई ?’
मुरझाई पत्तियाँ
उदास कलियाँ
हैरान अमियाँ
तू क्यों चली गई ?’
बग़ीचे में बढ़ी तुलसी
मोंगरे की सुगंध सी
फागुन की बयार सी
तू क्यों चली गई ?’
पापा के सखा
मम्मी की सखियाँ
सबकी भीगी अँखियाँ
तू क्यों चली गई ?’
तेरा आना पुरवाई जैसा
तेरा रहना शहनाई जैसा
तेरा जाना रुसवाई जैसा
तू क्यों चली गई ?’
अपने भाई को देख
सूनी कलाई को देख
उसकी रुलाई को देख
तू क्यों चली गई ?’
क्या बस इतना ही साथ
स्वप्न सा छोटा सा साथ
इससे तो न होता साथ
तू क्यों चली गई ?’
अब क्या रह गया इस घर में
मम्मी-पापा के जीवन में
सब कुछ सूना एक पल में
तू क्यों चली गई ?’
– द्वारिकाप्रसाद अग्रवाल

सुविचार – बेटा – लड़का -लड़के – 023

तेरा बेटा बहुत बड़ा अदाकार बन गया माँ, _

_ ये अब अंदर से रोता है बाहरी मुस्कान लिए…!!

लड़का होना भी कहां आसान है, _

_ आधे से ज्यादा सपने तो दूसरों के पूरे करने पड़ते हैं..!!

“वो लड़का जो” नज़र एक अलहदा रखता था ज़माने को देखने की..

_ आजकल ढूंढता रहता है खुद को “ज़माने भर में..”

हम लड़के हैं साहब, _ _

_ घर बनाने के लिए अपना घर ही छोड़ देते हैं..!!

एक उम्र के बाद कहां लड़कों से हाल पूछता है,

_ कोई सैलरी को पूछता है तो कोई काम पूछता है..!!

सबसे बड़ा दुख तो तब होता है.. जब लड़के घर छोड़कर परदेश के लिए निकलते हैं,

_और अपनों को रोता हुआ देख कर.. उस समय कोई शब्द ना सुनायी देता है..
_ और न ही कुछ बोला जाता है..!!
लड़कों के हिस्से आता है अक्सर… ख्वाहिशों को दमन करने का तरीका,

_ परिवार की जिम्मेदारियां, घाम–सर्द से परे काम पे जाने की अनिवार्यता,
_ त्यौहार पे घर जाने को छुट्टी न मिलने की वज़ह से छाई उदासी,
_ सुख चुकी प्रेम की नदियां, और पहाड़ बन भावशून्य हो जाने का प्रयास.
_ इस बीच किसी का उनकी ओर हंसकर देखना, दो घड़ी बात कर लेना और उनका घर से परस्पर संपर्क साधे रखना..
…..सुकून से बढ़कर कुछ भी ग़र हो तो वही मिल जाता है !!
लड़के का जीवन उतना आसान नहीं होता, जितना समाज अक्सर समझ लेता है.

_ बाहर से देखने पर लगता है कि उसे सारी आज़ादियाँ मिली हुई हैं, चाहे देर रात बाहर घूमना हो, काम करना हो या अपने फैसले लेना हो.
_ लेकिन इन आज़ादियों के पीछे जिम्मेदारियों का इतना बड़ा बोझ होता है कि वह खुलकर जी भी नहीं पाता…!
मैं लाखों दर्द होने पर भी मुस्कुराता हूं ;

_ मैं लड़का हूं अगर रोया तो मेरी तौहीन होगी_

लड़के नहीं बताते अपनी परेशानियां किसी को,

_ वो बस चुपचाप बैठे रहते हैं चाय की दुकानों पर घंटो तक.!!

हम लड़के हैं साहब,, _ मुसीबतों में भी मुस्कुराते हैं…!!

_ हम लड़के कितनी भी कोशिशें कर लें, वो पूरी नही पड़ती और उस पे ये बोझ रहता है कि हम बता नही पाते कि ..हमने बहुत चाहा मगर कर कुछ ना सके,

_क्योंकि हम जानते है कि दुनिया परिणाम देखती है, कोशिशें नही…!

*एक उम्र के बाद लड़कों से खैरियत कौन पूछता हैं,*

*कोई नौकरी का पूछता है कोई सैलरी का पूछता है !!

एक उम्र के बाद कहां कोई लड़कों से हाल पूछता है,

_ कोई सैलरी को पूछता है तो कोई काम पूछता है.!!

वो टूटकर भी मुस्कुराएंगे, जमाने के साथ ख़ुद बीत जाएंगे..

_ लड़कों को बस सीने से लगाइए, वो हर जंग जीत जाएंगे.!!

एक लड़के का पूरा संघर्ष एक ही लाइन में तोल दिया जाता है “कितना कमाते हो ?”
इस समाज में लड़कों और पुरुषों के लिए सबसे मुश्किल काम है ‘बिना आँसुओं के रोना’
लड़के का सच में घर से चले जाना, मतलब सुख उम्मीद में..!!

_ लेकिन बहुत सी बातें उसके अंदर ही अंदर हलचल मचाती रहती हैं और भीतर बहुत कुछ उमड़ता घुमड़ता रहता है.

लो आ गई बेटे के ऊपर भी कविता ………

X

घर की रौनक है बेटियां, तो बेटे हो-हल्ला है,

गिल्ली है, डंडा है, कंचे है, गेंद और बल्ला है,

बेटियां मंद बयारो जैसी, तो अलमस्त तूफ़ान है बेटे,

हुडदंग है, मस्ती है, ठिठोली है, नुक्कड़ की पहचान है बेटे,

आँगन की दीवार पर स्टंप की तीन लकीरें है बेटे,

गली में साइकिल रेस, और फूटे हुए घुटने है बेटे,

बहन की ख़राब स्कूटी की टोचन है बेटे,

मंदिर की लाइन में पीछे से घुसने की तिकड़म है बेटे,

माँ को मदद, बहन को दुलार, और पिता को जिम्मदारी है बेटे,

कभी अल्हड बेफिक्री, तो कभी शिष्टाचार, समझदारी है बेटे,

मोहल्ले के चचा की छड़ी छुपाने की शरारत है बेटे,

कभी बस में खड़े वृद्ध को देख, “बाउजी आप बैठ जाओ” वाली शराफत है बेटे,

बहन की शादी में दिन रात मेहनत में जुट जाते है बेटे,

पर उसकी ही की विदाई के वक़्त जाने कहा छुप जाते है बेटे,

पिता के कंधो पर बैठ कर दुनिया को समझती जिज्ञासा है बेटे,

तो कभी बूढ़े पिता को दवा, सहारा, सेवा सुश्रुषा है बेटे,

पिता का अथाह विश्वास और परिवार का अभिमान है बेटे,

भले कितने ही शैतान हो पर घर की पहचान है बेटे.

“हर उस बेटे को समर्पित जो घर से दूर है”

*बेटे भी घर छोड़ जाते हैं.

जो तकिये के बिना कहीं…भी सोने से कतराते थे…

आकर कोई देखे तो वो…कहीं भी अब सो जाते हैं…

खाने में सो नखरे वाले..अब कुछ भी खा लेते हैं…

अपने रूम में किसी को…भी नहीं आने देने वाले…

अब एक बिस्तर पर सबके…साथ एडजस्ट हो जाते हैं…

बेटे भी घर छोड़ जाते हैं.!!

घर को मिस करते हैं लेकिन…कहते हैं ‘बिल्कुल ठीक हूँ’…

सौ-सौ ख्वाहिश रखने वाले…अब कहते हैं ‘कुछ नहीं चाहिए’…

पैसे कमाने की जरूरत में…वो घर से अजनबी बन जाते हैं

लड़के भी घर छोड़ जाते हैं.

बना बनाया खाने वाले अब वो खाना खुद बनाते है,

बीवी का बनाया अब वो कहाँ खा पाते है.

कभी थके-हारे भूखे भी सो जाते हैं.

लड़के भी घर छोड़ जाते हैं.

मोहल्ले की गलियां, जाने-पहचाने रास्ते,

जहाँ दौड़ा करते थे अपनों के वास्ते,,,

माँ बाप यार दोस्त सब पीछे छूट जाते हैं

तन्हाई में करके याद, लड़के भी आँसू बहाते है

लड़के भी घर छोड़ जाते हैं

नई नवेली दुल्हन, जान से प्यारे- भाई,

छोटे-छोटे बच्चे, चाचा-चाची, ताऊ-ताई,

सब छुड़ा देती है , ये रोटी और कमाई.

मत पूछो इनका दर्द वो कैसे छुपाते हैं,

बेटे भी घर छोड़ जाते हैं.

करते हैं ये फ़रमाहिशें पूरी सबकी, और अपनी जरूरतों का जिक्र तक नहीं करते..

_ जी हाँ ये लड़के ही हैं जनाब, जो उठाये रहते हैं जिम्मेदारियां कंधो पर
_ मगर उफ्फ तक नहीं करते..
_ यूँ तो दिल में समन्दर भरा है इनके, पर आँखों में कभी नमी नहीं होती.
_ और जितना सोचते हैं हम, लड़कों की जिंदगी उतनी आसान नहीं होती
_ घर में बड़े हैं या छोटे, कंधे हमेशा जिम्मेदारियों से भरे रहते हैं.
_ अपने ही परिवार की खातिर, ये अपनों से ही दूर रहते हैं.
_ घरवाले परेशान न हों इनकी फ़िक्र में, इसलिए फ़ोन पे हर बार मैं ठीक हूँ ही कहते हैं.
_ लड़की की बिदाई में तो ज़माना रोता, और इनके घर छोड़ जाने की चर्चा कोई खास नहीं होती.
_ जितना सोचते हैं हम, लड़कों की जिंदगी उतनी आसान नहीं होती.
_ माँ के लाडले बेटे हैं बेशक, पर अपनी अलग पहचान बनानी पड़ती है,
_ एक नौकरी की खातिर, सैकड़ों ठोकरें खानी पड़ती हैं.
_ कभी हर बात में ढेरों नखरे होते थे जिनके, बाहर रह कर सारी फ़रमाहिशें भुलानी पड़ती हैं.
_ कुछ लड़कों को जरूरतें जगाए रखती हैं, और कुछ को जिम्मेदारियां सोने नहीं देतीं.
_ और जितना सोचते हैं हम, लड़कों की जिंदगी उतनी आसान नहीं होती.
_ फिर एक वक़्त वो भी आता है, जब इन्हें प्यार होता है.
_ एक तरफ गर्लफ्रेंड तो दूसरी तरफ परिवार होता है.
_ जिंदगी को चुने तो घरवाले नाराज, घरवालों की सुनें तो सर पर बेवफाई का ताज होता है.
_ किसी भी हालत में उलझनें इनकी कम नहीं होती.
_ और जितना सोचते हैं हम, लड़कों की जिंदगी उतनी आसान नहीं होती.
_ किसी भी हाल में शांत रहने का हुनर, इनमें कमाल होता है.
_ चीजों को सोचने समझने का नजरिया भी बेमिशाल होता है.
_ छोटी छोटी बातों पर, ये अपना धीरज नहीं खोते.
_ पर इसका मतलब ये नहीं की इन्हें दर्द नहीं होता या इनके जज़्बात नहीं होते.
_ परेशानियां तो इनकी राहों में भी आती हैं, पर उनसे उनकी हिम्मत कभी कम नहीं होती.
_ और जितना सोचते हैं हम, लड़कों की जिंदगी उतनी आसान नहीं होती.
_ यारों के ये यार कहलाते हैं, निभाते हैं साथ तब भी, जब सब साथ छोड़ जाते हैं.
_ घर में पापा के सामने इनकी जुबां नहीं खुलती, वो बाहर निगाहों से ही कमाल कर जाते हैं.
_ माँ, बहन, गर्लफ्रेंड सबसे हर रिश्ता, बखूबी निभाते.
_ और दोस्तों की दोस्ती से बढ़ कर, इनके लिए कोई चीज नहीं होती.
_ और जितना सोचते हैं हम, लड़कों की जिंदगी उतनी आसान नहीं होती.
_ करते हैं फ़रमाहिशें ये पूरी सबकी, और अपनी जरूरतों का जिक्र तक नहीं करते..
अल्हड़ सा हुँ मे, मुझे अब भी अल्हड़ सा ही रहने दो ना ……

क्या हुआँ जो उम्र 26 की हो गई हैं,

मुझे अब भी 5 का रहने दो ना ….।।।

क्या हुआँ जो मे समझदार हो गया हुँ,

मुझे अब भी नाँदनियाँ करने दो ना ….।।।।

क्या हुआँ जो मान जाता हूँ मै सबकी हर बात,

मुझे अब भी बात – बात पर रुठने दो ना …।।।।

क्या हुआँ जो मे बड़ा लड़का बन गया,

मुझे अब भी बच्चा बने रहने दो ना …।।।।

अल्हड़ सा हुँ मे, मुझे अब भी अल्हड़ सा ही रहने दो ना …..

” बेटे भी पराए होते हैं “

उठ कर पानी तक न पीने वाले अब कपड़े खुद धो लेते हैं,

कल तक जो घर के लाडले थे, आज वो अकेले में रो लेते हैं.

बाप के डांटने पर अम्मी से शिकायत करने वाले,

आज वो अकेले में रो लेते हैं

सिर्फ बेटियां ही नहीं, बेटे भी पराए होते हैं.

खाने में सौ नखरे करने वाले, अब खुद पकाके कच्चा पक्का खा लेते हैं,

बहन को छोटी छोटी बात पर तंग करने वाले, अब बहन को याद करके रो लेते हैं,

अम्मी के बाज़ू पर सर रखकर सोने वाले, अब बगैर बिस्तर के ही सो लेते हैं,

सिर्फ बेटियां ही नहीं, बेटे भी पराए होते हैं.

हम लड़के हैं _

मन के अंदर उठे बवंडर को,
इन शब्दों ने ख़ुद में कैद कर लिया,
हम बोले तो बत्तमीज,
न बोले तो गुस्सा,
हम रोये तो कमज़ोर,
न रोये तो सख़्त,
हम उदास नहीं हो सकते,
हमें दूसरों के लिए कंधा बनना है,
हम सुकूँ को कमा कर सब पर लुटा देंगे,
लेकिन ख़ुद पर कभी नहीं,
हम ज़िद करें तो बड़े बना दिए जाते,
और बड़े बनने की कोशिश करें तो,
“बच्चे हो” कह कर चुप करा दिए जाते हैं,
कौन सा काम कब करना है हम ही बताते हैं,
“काम नहीं करता” का ताना सुना दिया जाता है,
मन में वेदनाएं नहीं हो सकती,
क्योंकि उसमें स्त्रियों का हक़ है,
मन की व्यथा नहीं हो सकती,
क्योंकि वो भी औरतों के हिस्से में आता है,
हर सपने को तुम्हारे,
उनके सपने का रोड़ा बनाया जाता है,
पैदा होते ही नौकरी कर लो,
ऐसा दबाव बनाया जाता है,
हर पल कम्पेयर की तलवार तुम्हारे गले से उतारी जाती है,
निकम्मा,
कामचोर,
गंवार,
बेढंगा और न जाने कितनी गालियाँ सुनाई जाती है,
कोई पूछेगा नहीं,
तुम उदास क्यों हो?
कोई पूछेगा नहीं,
तुम गुस्सा क्यों हो?
तुम्हारे नाराजगी को भी तुम्हारी नाकामयाबी से तौला जाएगा,
असफ़लता का दर्पण तुम्हें दिखाया जाएगा,
जिल्लत की चरमसीमा जब सर पर होगी,
आँसू आँख से तब भी बाहर न निकल पायेगा,
और दिल अंदर से रोयेगा,
हो सकता है तुम्हारा दिल आँसुयो से भीग जाएगा,
और शायद दिमाग़ में जीने मरने का ख़याल आये,
लेकिन फिर भी तुम उनके बारे में सोचोगे,
पाल-पोश इतना बड़ा किया,
ख़ुद को इसी बहाने रोकोगे..
और फिर एक नाकाम कोशिश करने में लग जाओगे,
और जैसे ही नाकामी हाँथ लगेगी,
तो शायद तुम हार जाओगे,
और कर लोगे,
वो जो सब चाहते हैं,
सुनाने लगेंगे सब तुम्हारी नाकामयाबी के किस्से,
तब तुम्हारे सपने को कोसा जाएगा,
“पता नहीं क्या कर रहा था”
हर व्यक्ति के सामने टोका जाएगा…
तुम तब भी,
एक पेड़ की भाँति खड़े रहोगे,
अपने आप के दबाए,
बवंडर से डरे रहोगे,
और फिर….
जैसे मैंने इसे शब्दों को सौंप दिया,
तुम भी किसी को सौंप दोगे,
और ख़ुद को शांत रखने की नाकाम कोशिश करोगे,
जब सब कि जीत होगी शायद तुम भी शामिल होगे,
ख़ुद का हार जाने का गम भी तुम छिपा लोगे,
“और भाई कैसे हो?”
“मज़े में हूँ”! इतना कहकर मुस्कुरा दोगे।
हम लड़कें हैं।
हम सबकी सुनेंगे…
लेकिन हमें कोई नहीं….
कोई नहीं सुन सकता…
कौन कहता है हम लड़के अच्छे नही होतें

हम आपस में कितना भी मजाक कर लें, कोई बुरा नही मानता किसी बात का,

हम आजाद होते हैं जब आपस में बात करतें हैं, हम पर नैतिकता का बोझ नही होता,

हम पर कोई बनावटी उसूलो का दबाव नही होता, जब हम आपस में बात करते हैं,

हम स्वच्छंद और आजाद होते हैं, सच मुच हम लड़के बड़े दिल वाले हैं,

छोटी छोटी बातों को दिल पर नही लगातें, गैरो को भी अपना मानकर प्यार लुटातें,

हमारे लिए तो सबकुछ अपना ही होता, ना ओवर ईगो ना घमण्ड,

खुद खुश रहते हैं औरों को हंसाते हैं, साला हम लड़के कितने प्यारे हैं.

मैं मिला हूं उन लड़कों से जो घर से निकलते तो हैं खुद के सपने लेकर लेकिन समय की मार के आगे घुटने टेक कर वह अपनों के सपने पूरे करने में लग जाते हैं, हालांकि कुछ लड़के अपनों के सपनों के लिए भी घर से निकलते हैं, लेकिन उन सपनों को पूरा करते-करते वह खुद को खो देते हैं, वह लड़कपन खो देते हैं, वह भी घर छोड़ते हैं, उन्हें भी घर की याद आती है लेकिन वह रोते नहीं है क्युकी लड़के रोते नहीं हैं.

मैं मिला हूं उन लड़कों से, जो के बड़े बाल और बड़ी दाढ़ी में खुद को छुपा लेते हैं लेकिन धीरे धीरे इनके बाल और दाढ़ी भी उनके सपनों की तरह इनका साथ छोड़ने लगती है धीरे-धीरे वह भी पकने लगती है,

मैं मिला हूं उन लड़कों से, जो किताबों में खो गए हैं जो मशीनों की नीचे सो गए हैं, जो कंप्यूटर के आगे रो रहे हैं, जो फाइलों में खुद को खो रहे हैं, फिर भी जिंदगी से मिलते वक्त वह मुस्कुराते हैं, वह गुनगुनाते हैं और दुनिया की नजर में वह लड़के बेपरवाह बन जाते हैं.

मैं मिला हूं उन लड़कों से जिनके सपनों में खुद के लिए सपने नहीं होते हैं, जो दौड़ते हैं लंबी रेस में, जो की उनकी खुद की रेस कभी नहीं होती, ऐसे लड़कों का सपना तो महज इतना सा ही था, लेकिन खुद को खुद से मिलाते मिलाते वह खुद से बहुत दूर चले जाते हैं, मैं मिला हूं लड़कों से जो खुद के लिए जीने से पहले दूसरों के लिए जीना चाहते हैं.

मैं मिला हूं उन लड़कों से जिनकी मुस्कुराहट झूठी होती है, …

ऐसे लड़के जो हाथों में गिर्स लगाए उंगलियों में फाइलों को चिपकाए, दिमाग को काम लगाएं, कंप्यूटर पर नज़रे ठिकाए, अपने गांव अपने माटी से ना जाने कितनी दूर, मुस्कुराने की झूठी कोशिश में मुस्कुरा रहे हैं.

“लड़के भी घर छोड़ के जाते हैं,”

ये जहां रहते हैं, वहां आस पास के लोग भी इनसे वस्ता नहीं रखते हैं,

लोगो को सोचना चाहिए कि वो भी किसी के बच्चे हैं,

अपने घर से दूर अनजान जगह रह रहे हैं तो उनकी मदद करनी चाहिए,

बदले में वो भी आपको पूरी इज्जत देते हैं या कभी आपको जरूरत पड़े तो काम भी आते हैं.

लड़के ! हमेशा खड़े रहे.

खड़े रहना उनकी मजबूरी नहीं रही बस !
उन्हें कहा गया हर बार,
चलो तुम तो लड़के हो
खड़े हो जाओ.
छोटी-छोटी बातों पर वे खड़े रहे ,कक्षा के बाहर.. स्कूल विदाई पर जब ली गई ग्रुप फोटो,लड़कियाँ हमेशा आगे बैठीं,और लड़के बगल में हाथ दिए पीछे खड़े रहे.
वे तस्वीरों में आज तक खड़े हैं..
कॉलेज के बाहर खड़े होकर,
करते रहे किसी लड़की का इंतज़ार,
या किसी घर के बाहर घंटों खड़े रहे, एक झलक,एक हाँ के लिए. अपने आपको
आधा छोड़ वे आज भी
वहीं रह गए हैं…
बहन-बेटी की शादी में
खड़े रहे, मंडप के बाहर
बारात का स्वागत करने के लिए.
खड़े रहे रात भर
हलवाई के पास,कभी भाजी में कोई कमी ना रहे.खड़े रहे खाने की स्टाल के साथ,
कोई स्वाद कहीं खत्म न हो जाए.
खड़े रहे विदाई तक
दरवाजे के सहारे और टैंट के
अंतिम पाईप के उखड़ जाने तक.
बेटियाँ-बहनें जब तक वापिस लौटेंगी
वे खड़े ही मिलेंगे….
वे खड़े रहे पत्नी को सीट पर
बैठाकर,बस या ट्रेन की खिड़की थाम कर
.वे खड़े रहे
बहन के साथ घर के काम में,
कोई भारी सामान थामकर.
वे खड़े रहे
माँ के ऑपरेशन के समय ओ. टी.के बाहर घंटों. वे खड़े रहे
पिता की मौत पर अंतिम लकड़ी के जल जाने तक. वे खड़े रहे ,
अस्थियाँ बहाते हुए गंगा के बर्फ से पानी में.
लड़कों ! रीढ़ तो तुम्हारी पीठ में भी है,
क्या यह अकड़ती नहीं ?
बेटी पर तो बहुत लिखा जाता है
आज बेटों पर लिखने का मन किया …..
लड़के…

लड़के !
जब घर से जाते हैं तो,
साथ ले जाते हैं उम्मीदें,
प्यार से भरे मुट्ठी भर लम्हें,
और भाई बहनों के झगड़े,
लड़के !
जब घर से जाते हैं,
तो सूना कर जाते हैं,
बैठक का कमरा, गाँव की गालियाँ
बाहर के बरामदे की चारपाई,
और घर का आँगन,
लड़के !
जब घर से जाते हैं,
तो बहुत सारे झूठे वादे करते हैं,
जैसे माँ से जल्दी आने का,
पिता से दूर हो कर भी खुश होने का,
छोटी बहन से अगली बार बड़ा गिफ्ट,
और भाई से अगली बार ज्यादा दिन रुकने का,
लड़के !
जब घर से जाते हैं,
तो नम रखते हैं अपना हृदय,
लेकिन नही भीगने देते अपनी पलकें,
गला भर जाता है,
तो हँस कर छुपा देते है अपने आँसू,
और चले जाते हैं सबसे मुड़कर,
इसलिए!
कभी आसान नही होता,
लड़कों का घर से चले जाना…!!
© रत्नेश अवस्थी (उन्नाव, उत्तर प्रदेश)
लड़के मार डालते हैं अपनी मुलायमित को मर्द बनते ही !

_ज़िम्मेदारियों का बोझ टाँगे हर दिन एक सफ़र पर निकलते हैं.
_इस सफ़र में उसे सफल होने की जल्दी रहती है.
_उसे पति-बाप-बेटा सब बनना होता है.
_वो बन भी जाते हैं मगर अंदर के अपने उस लड़के को मार कर.
_जो शायद चित्रकार, क़िस्सागो, लेखक, नायक या फिर संगीतकार और गायक हो सकता था.
_मगर उसने चुना एक सफल पति या बाप होना.
_उसने बड़ी बेरहमी से पहले उस लड़के को मारा फिर शेष बचे प्रेमी को.
_वो सफल मर्द बन गया.
_लेकिन इन्हीं में से किसी सफ़र के दौरान कभी अंदर के चित्रकार को मेट्रो से उतरते वक़्त ढकेल दिया पटरियों पर और इल्ज़ाम भीड़ पर धर दिया.
_किसी दिन बाथरूम में ऑफ़िस जाने की जल्दी में, गुनगुनाते हुए गला दबा दिया उस गीतकार का जो सिरज सकता था प्रेम के कई नए गीत.
_कभी किसी दिन पुल के ऊपर से गुज़र रहे बस में से फेंक दिया बस्ता वो जिसमें कई कहानियाँ थीं.
_जो लिखा था कभी कॉलेज वाले अशोक के पेड़ के नीचे बैठ कर.
_उस लड़की की कल्पना में जो उसे किसी ऐड फ़िल्म के पोस्टर में दिखी थी.
_उस लड़की को देखते हुए उसने सोचा था कि एक दिन उसकी प्रेमिका जो होगी तो ऐसी ही होगी.
_और उसे तब सुनाएगा वो ये कहानी.
_लेकिन वो बजाय बनने के प्रेमी उसे समाज ने पति बना दिया.
_पति ऐसा जिसे निभाने थे सारे फ़र्ज़.
_पति के बाद बाप.
_जिसे कमाना था सिर्फ़ रोटी ही नहीं बल्कि पिज़्ज़ा, वीकेंड पर मूवी के लिए पैसा, गजरे के बदले साग-सब्ज़ी और हफ़्ते भर की ग्रोसरी. स्कूल का फ़ी, जूते और कराटे क्लास का फ़ी भरने के लिए पैसा और ख़ूब पैसा.
_वो कमाता गया. साथ अर्ज़ता गया शोहरत भी मगर अपने अंदर के उस लड़के को मार वो अब खोखला हो चुका है.
_वो बस मर्द है.
_मुलायमियत बाक़ी नहीं रही उसमें कोई.
_उसे अब पसीजना नहीं आता.
_उसे रोना भी नहीं आता.
_वो अब स्ट्रॉंग पापा और पर्फ़ेक्ट पति बन चुका है.
… लेकिन एक मुर्दा लड़का उसके अंदर कहीं अभी भी एकाध साँस में धड़क लेता है !
~अज्ञात
समाज में एक भ्रम है कि “लड़के रोते नहीं हैं”

“डिप्रेशन और एनजाइटी” [Depression and anxiety]
_ कितनी ख़तरनाक हो सकती है,
_ ख़ास कर हम छोटे शहरों या क़स्बों से आये हुए, देहाती व्यक्तियों के लिए,
_ जो प्रायः महानगरीय जीवन के अभ्यस्त होने में, लगभग पूरा जीवन गुज़ार देते हैं,
_ फिर भी उनको नहीं भाती ..महानगरीय सभ्यताएँ,
_ और न ही खुले मन से स्वीकार कर पाते हैं ..यहाँ की चुनौतियाँ,
_ क्योंकि वो शायद इस जीवन के कभी अभ्यस्त नहीं रहे,
_ गाँव क़स्बों में प्रायः अभी भी संयुक्त परिवार प्रणाली है,
_ हम बड़े हुए तो रिश्तों के साथ,
_ और उनके साथ ही जीना आ गया,
_ हम पड़ोसियों को केवल पड़ोसी न कहकर,
_ उनसे कोई न कोई रिश्ता जोड़ लेते हैं,
_ लेकिन फिर हम घर से निकलते हुए साथ ले कर चलते हैं,
_ न जाने भविष्य के कितने सपने,
_ और माँ-पिता से लेकर अपने पूरे मोहल्ले या गाँव की उम्मीदें,
_ सपनों को पूरा करने और सबकी उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए,
_ रात दिन एक करते हुए भूखे प्यासे,
_ लग जाते हैं भविष्य की अन्धी दौड़ में,
— उसमें क्या हासिल होगा,
_ ये सोचे बिना अपना बहुत कुछ दांव पर लगा देते हैं,
_ यहाँ तक कि अपना तन मन सब कुछ,
_ भागते हैं और तेज़ भागते हैं,
_ तब तक भागते हैं जब तक शरीर में प्राण शेष रहते हैं,
_ और इसी भागमभाग में जब सुस्ताने का मन हो,
_ और माँ की गोद न हो, पिता की छाया न हो,
_ भाई का साथ और बहन की खट्टी मीठी नोक झोंक न हो..
_ तब ये भौतिकता मूर्खता लगने लगती है,
_ कमाए हुए पैसे बस रंगीन कागज के टुकड़े,
_ और तब सवार हो जाती है ओवरथिंकिंग,
_ और धीरे धीरे हम जाने लगते हैं अवसाद के ढेर में,
_ जहाँ से वापस आना शायद कठिन होता होगा, बहुत कठिन..
समाज में एक भ्रम है कि “लड़के रोते नहीं हैं”
_ और लड़के इस भ्रम को बनाए रखने के लिए,
_ ज़बरदस्ती स्वयं को पत्थर बनाने लगते हैं,
_ तभी शायद लड़कों का न रोना भी उतना ही ख़तरनाक है..!!
–Ratnes Awasthi
लड़कों का जीवन इतना भी आसान नहीं होता, अपने करियर के दिनों में उन्हें अकेले ही सब कुछ करना होता है, मक्खन खाने वाले और उसकी वाहवाही करने वाले तो उसकी कामयाबी के बाद आते हैं..!

– Rhythm Raahi

सुविचार – पिता – बाप – पापा – 022

पिता कभी नहीं चुभे हमें, पर अकसर चुभी हैं उनकी बातें..

_ लेकिन उन्हीं चुभती हुई बातों ने गढ़ा है हमें.!!
– Prashant Kumar Mishra
पिता हमारे लिए सब कुछ है, क्योंकि उन्होंने हमारा शिशु अवस्था, बालपन, किशोरावस्था और गृहस्थी बसाने तक अपना कर्तव्य निभाया है.

_ उन्होंने न जाने कितने कष्टों को सहकर हमें बड़ा किया.
_ हम जीवन में चाहे कितने भी बड़े हो जाएं, लेकिन हमें कभी भी अपने पिता के सामने बड़ा होने का प्रयास नहीं करना चाहिए,
__ क्योंकि ये वो शख्स है.. जिसने हमें बड़ा बनाने के लिए न जाने कितने लोगों के सामने अपने आप को छोटा बनाया.
_ ज़िंदगी में उनका साथ नहीं सिर्फ़ साया ही काफी होता है.
_ दुनिया में एक ये ही ऐसे शख्स हैं.. जो ये चाहते हैं कि उनके बच्चे उनसे भी बड़े बने, उनसे भी ज़्यादा उन्नति करे.!!
हर पिता अपनी संतान को ’कंधे’ पर अवश्य बिठाता है.

पिता के ऐसा करने की दार्शनिक व्याख्या है कि “हर पिता अपनी संतान को अपनी दुनिया से ’बड़ी दुनिया’ दिखाना चाहता है, और इसके लिए आवश्यक ’सहारा’ और ’त्याग’ भी करता है.

लेकिन इसके लिए जरूरी है कि “पिता को पता होना चाहिए कि ’मुझसे बड़ी दुनिया’ है, जिसे वह स्वयं नहीं देख सकता या देख सका, लेकिन उसकी संतान के पास वो ’दृष्टि’ (vision) है, यह विश्वास भी होना चाहिए.

एक बच्चा पिता के साये में निष्फिक्र और निश्चिन्त होता है _क्यूंकि उसको पता होता है की वो दुनिया की हर मुश्किल से मेहफ़ूज़ है और अगर कोई मुश्किल आ भी जाए तो _पिता उसको सुलझा लेंगे …
पिता बनना और पिता होना दो बहुत अलग – अलग बातें हैं,

_ यदि पिता के ह्रदय पर बच्चों के लिए प्रेम हो तो.. वह उनके लिए जो भी करेगा..
_ कभी उसका रिटर्न नहीं चाहेगा,
_ बस प्रेम से जो किया.. वह वहीं समाप्त भी हो जाएगा,
__ उसक़े मन मे चाह की कोई रेखा नही बनेगी कि.. मैंने इसके लिए ये किया..
_ तो अब मेरे लिए बच्चे की तरफ से ये होना ही चाहिए.!!
सब माँ को महान बता देते हैं.. क्यूंकि हम उनकी बदोलत आये हैं, दर्द वगरह उन्होंने सहे..!

_ बाप का क्या है, बाहर ही खड़ा है !
_ हँस रहा है कोई और, कोई उसके मन से पूछे..
_ उसे बिल से ज्यादा दोनों की फ़िक्र हैं,
_ न ही बोल सकता, न ही रो सकता, अजीब ही विडबन्ना हैं पुरुष की,,
_ कोई पास बैठा के प्यार से हाथ रखो तो.. वो बहुत फुट फुट के रोएगा..
_ कोई रुला के देखो, शायद वो रोएगा___ शायद…!!!
बच्चों का जीवन कठिन होता है _लेकिन उससे कम कठिन नहीं होता _बच्चों के पिता का जीवन.!!

_ उनके सामने तमाम क्रूर क्षण आते हैं..
_ _ जब वे मन मारकर सब करते हैं.
_ कितना पीड़ादाई होता है _ जब वो चाहकर भी _अपनी संतान को रोक नहीं सकते.
_ जब वो चुप रहकर खुद को तसल्ली देते हैं.
_ जब वो कहते _जाओ खुश रहो..
_तब वो दरअसल _कहना चाहते हैं कि _थोड़ी देर रुक जाओ बेटा !
एक पिता कि अपने बच्चों के लिए सीख :

_ अब तुम समझदार हो.
_ हर जगह मैं तुम्हारे साथ नहीं रहूंगा.
_ अपना guardian खुद बनो.
_ यह ज़िम्मेदारी तुम्हारी है कि जो भी करो या जो भी निर्णय लो,
_ वह न केवल तुम्हारे लिए बल्कि हमारे के लिए भी सही हो..!!
सर पे डेढ़ किलो की टेंशन रहने के बावजूद भी चेहरे पे जो सौ ग्राम की हँसी बनी रहती है

_ और दिल में पाव भर का भरोसा कि “जो होगा ठीक ही होगा”; वही बाप है..

पिता के बस होने मात्र से ही मुसीबतें कम हो जाती हैं ; _ पिता के रूप में हमें एक ऐसा कवर मिला है, जो हमे जाड़ा, गर्मी और बरसात जैसे हर मौसमों से बचाते हैं.
पिता वो है जो जिंदगी भर अपनी सारी दौलत और ख़ुशी अपने बच्चों पर निछावर कर के खुश रहते हैं..!!
बाप के लिए, बच्चों की आवाज ही काफी होती है..

_ सब कुछ ठीक ठाक होने के लिए.!!

जब आप अपने पिता की ओर ध्यान से देखेंगे तो..

_ आप को अहसास होगा कि यह आदमी बहुत कुछ पाने का हक़दार है..!!

दुनिया में केवल पिता ही एक ऐसा इंसान है जो चाहता है कि

मेरे बच्चे मुझसे भी ज्यादा कामयाब हों.

औलाद के लिए बाप वहां भी हाथ फैला देता है, _

_ जहाँ वो पांव रखना भी पसंद नहीं करता है !!

वो दुःख अपने तुम्हें कभी बताएगा नहीं,

कितना प्यार करता है तुम्हें, ये कभी जताएगा नहीं,

जिम्मेदारियों को उससे अच्छे से, और कोई निभाएगा नहीं,

पिता से महान शख्स इस जन्म में, तुम्हें कभी मिल पाएगा नहीं ..

उनको कुछ कहने से पहले परख लिया करो, क्या क्या कह देते हो,,

हम पर आने से पहले दुःख पापा आप सह लेते हो,,,,,

आपके दुख में दुखी और आपके सुख में दिल से सुखी होने वाले..

_ सिर्फ एक ही इंसान होते हैं और वो आपके पिता होते हैं.

बिता देता है एक उम्र ” औलाद ” की हर ” आरजू ” पूरी करने में !

_ उसी पिता के कई ” सपने ” बुढ़ापे में ” लावारिस ” हो जाते हैं !!

पिता की भावनाएं, परिश्रम, त्याग उनकी अपेक्षाएं,

_ उन्हें सबसे ज्यादा चिंता किस बात की है, ये अक्सर अनकहा रह जाता है.!!

मुझे रख दिया छाव में खुद जलते रहे धूप में !

_एक ऐसा फरिश्ता देखा हैं मैंने पिता के रुप में !!

ज़िन्दगी भले ही हमें खुदा देता है, _

_ पर बिन कहे हमारी हर ज़रूरत पिता निभा देता है ..

मुश्किल है निभाना किरदार बाप सा..!!

_ औलाद पालने मे अपना पूरा जीवन जला देता है..!!

बोझ कितना भी हो कभी उफ़ नहीं करता_

_ कंधा बाप का है साहेब बड़ा मज़बूत होता है..

दुःख जिंदगी के तब तलक समझ नहीं आते, _

_ सर पर साया जब तलक पिता का होता है.

खुश देख कर भी, उसके चेहरे पर भरोसा ना करना ;_

_बाप है मियां, परेशानी मेँ भी हंसता बहुत है..

एक पिता अपनी मौत से नहीं डरता, उसको हमेशा यही फ़िक्र रहती है के

उसके न रहने पर उसके बच्चों का क्या होगा.

बेमतलब सी दुनिया में वह ही हमारी शान है,

किसी शख़्स के वजूद की ” पिता ” ही पहली पहचान है.

एक पिता कितने दुख कमाता है,

सिर्फ़ अपनी औलाद की खुशी खरीदने के लिए..

पापा ने पाला तो, रोटी गरम और मकान अपना मिला ;

_ जब अपने पे आई तो, रोटी ठंडी और मकान किराए का मिला.!!

पिता की असली जीत तब होती है जब उसका बच्चा वहाँ पहुंचता है,

_ जहाँ तक पहुँचने के लिए उसने अपना पूरा जीवन खपा दिया.!!

अपने पिता के कामों पर कभी शर्म मत करना,

_ वो शर्म खो देते है तुम्हारी अच्छी ज़िंदगी बनाने के लिए…

पिता वो शख्सियत है, जो “मैं हूँ तुम्हारे साथ” ये कभी नहीं कहता..

_ लेकिन हर मोड़ पर सबसे पहले वही साथ खड़ा मिलता है.!!

एक पिता का प्रेम भी शायद सागर जैसा होता है,_

_ गहराई होती बहुत है लेकिन दिखाई नहीं देती..

जब तक पिता का साया सिर पर है, वो रास्ते के हर कांटे को फूल बना देता है..

खुद लाठी टेकने लगता है, मगर आपको अपने पाँव पर खड़ा कर जाता है..

कोई कितना भी गरीब क्यूँ न हो…

अगर बाप जिंदा हो तो एक काँटा भी नहीं चुभने देता…!!

पिता की मौजूदगी सूरज की तरह होती है,

सूरज गर्म जरूर होता है लेकिन अगर न हो तो अंधेरा छा जाता है.

“पिता बिना घर क्या है” इसका अनुभव करना हो तो

सिर्फ एक दिन अंगूठे बिना सिर्फ उंगलियों से अपने सारे काम करके देखें,

“पिता की कीमत पता चल जाएगी”

बिता देता है एक उम्र, औलाद की हर आरजू पूरी करने में, _

_ उसी पिता के कई सपने बुढ़ापे में लावारिस हो जाते हैं.

पिता के साये में बच्चे शाही ज़िन्दगी गुजारते हैं,

और उनके चले जाने से अक्सर घर पर वीरान हवाओं की एक लहर आ जाती है !!

पिता से बेहतर कोई मेंटर [ उपदेशक ] नहीं है, जीवन में पिता से बेहतर कोई आदर्श नहीं है.

_ वे एक इस तरह के व्यक्ति हैं जो जीवन में आपका समर्थन करेंगे और आपको ताकत देंगे.

वो अपने सपनों को छोटा कर देता है, ताकि तेरा भविष्य बड़ा हो जाए…

_ वो पुराना फोन चलाता है, ताकि तुझे ऑनलाइन क्लास मिल सके.
_ वो खुद दो जोड़ी कपड़ों में गुज़ारा करता है, ताकि तेरा स्कूल का फ़ीस भर सके.
_ वो सिर्फ़ एक पिता होता है… जिसके लिए तेरी शिक्षा ही उसका सपना है.!!
बाप प्यार तो बहुत करता है लेकिन कहता नहीं..

_ और जब तक औलाद को समझ में आता है, तब तक बाप रहता नहीं !!

एक दिन जिऊंगा अपने लिए भी,,,,,_ये सोच कर

_ एक ” पिता ” अपनी सारी उम्र गुज़ार देता है !!

बहुत ही मजबूत है उस बाप का कन्धा,

जो तमाम उम्र…अपने परिवार की जिम्मेदारी को उठता है…

पापा अपने दुख नहीं बताते और बड़े होते बच्चे अपनी उदासी..

_ क्योंकि दोनों सोचते हैं, दूसरे समझ नहीं पाएंगे.!!

वो बाप ही है जो इस विश्वास के साथ तपती धूप में चलता है..

-“मैं जलूंगा तो मेरे घर में रोशनी होगी”

बाप का कांधे पर रखा हुआ हाथ

_ हर लड़के का हौसला सौ गुना बढ़ा देता है.

छाले हाथ में पड़े, किस्मत मिटी लकीर

खुशियां सबकी मांगता, बन कर पिता फ़कीर ..

ये हाथ जो मेरे पिता के मैले हैं और पैरों में छाले हैं, _

_ बस इसी की वजह से हमारे घर में उजाले हैं ..

है लहू जिनका मेरी रगों में, तेवर भी उन्हीं का वरदान है,

शान से जीना सिखाया जिसने, “पापा” उनका नाम है।।

पिता सघन दरख़्त, पिता अनंत आकाश है,,

पिता रूह की ठंडक, पिता ज़िंदगी का साज़ है..!!

बादशाह वाली इज्जत दिया करें अपने पिता को..

_ इनके रहते किसी बात की चिंता नहीं करनी पड़ती..!!

पिता की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी औलाद होती है,

जिसके लिए वो झुकता भी है और टूटता भी है.

बच्चों को पैरों पर खड़ा करना था,

पिता के घुटने इसी में जवाब दे गये.

पिता से ही परिवार में प्रतिपल राग है

पिता से मां की बिंदी और सुहाग है.

पिता खुश नहीं बेटी की ऊँची उड़ान से

वो तो फ़िक्रमन्द है आकाश में बाज़ बहुत हैं.

पिता की बस एक ही ख्वाहिश होती है कि बच्चे की कोई ख्वाहिश बाकी ना रहे.
पिता का मौन अगर तुम सुन सको तो, _ दुनिया के ताने सुनने की नौबत नहीं आएगी.
पुत्र की स्वस्थ बुद्धि माता – पिता को भी स्फूर्ति देती है.
पुत्र के चेहरे की थकान, पिता के मन की थकान बन जाती है.
पुत्र की लंबी परेशानी, पिता के लिए हर दिन चुभता काँटा है.
एक पिता को बच्चों की जिद पूरी करके भी खुश रहना पड़ता है.
एक पिता की सबसे बड़ी ताकत और सबसे बड़ी कमजोरी उसके बच्चे हैं.

_ पिता अपने बच्चों से भले ज्यादा बातें न करे, पर वो उन्हें चाहता बहोत है..!!

पिता बच्चों के साथ तेज भाग सकता है,

_ लेकिन बच्चे पिता के साथ धीमा नहीं चल सकते..!!

जो कहीं भी नहीं हारता, _ वह संतान से हार जाता है..

_ एक समय के बाद पिता बिना कुछ कहे कमरे में झाँक कर आगे बढ़ जाते हैं, किसी भी चीज में ज़बरदस्ती नहीं करते..!!

सारी दुनिया को हराने वाला पिता… अक्सर अपने बच्चो से बिना लड़े हार मान लेता है…!!
पिता उस प्रेमी की तरह है, जो प्रेम तो करता है _ किंतु जता नहीं पाता !
एक पिता होना इतना आसान नहीं है, डरना भी उसी को है और संभलना भी उसी को है.
दुनिया की जरुरत किसे है, संभालने के लिए तो पापा ही खड़े हैं.
एक पिता अपने संघर्ष को सह लेता है, _ लेकिन बच्चों के संघर्ष को नहीं.
बिना उसके न एक पल भी गंवारा है, _ पिता ही साथी है पिता ही सहारा है.
“पिता” एक ऐसा इंसान है __ जिसके साए में बच्चे राज करते हैं.
पिता वो बरगद होते हैं, जिनके बाहों की कोई परिधि नही..!!
नाराज़ होकर भी हमेशा साथ होता है, एक बाप हर मोड़ पर बाप होता है.
पिता वह रन वे है…जहाँ से, हमारी जिंदगी उड़ान भरती है.!!
जो बिना आवाज़ और बिना आंसुओं के रोता है, _” वह पिता है”
खुद कमाओगे तो पता चलेगा, बाप ने बाप का फ़र्ज़ कैसे निभाया..!!
एक पिता सौ स्कूल मास्टरों पर भारी पड़ता है.

One father is more than a hundred schoolmasters. – George Herbert

पिता – छाता की तरह होता है, आप पर होने वाली बारिश ( कष्ट) से स्वयं पूरी तरह भींग जाने के बाद भी

_ उसकी एक बूंद नहीं पड़ने देते हैं वो..

एक पिता वो, जिनके बच्चों के पास अपने सपने, अपनी काबिलियत होते हुए भी,

_ दिन-रात बचत में लगे रहता है कि आगे उनके लिए कुछ छोड़ कर जाना है..!!

एक पिता वो, जो अपने बच्चों की जिद के आगे यूँ नतमस्तक हो जाता है,

_ जैसे यही अब उसका एकमात्र लक्ष्य रह गया हो..!!

एक बाप अपने बच्चों की अच्छी ज़िन्दगी के लिए जिंदगी भर एक एक पैसा जोड़ता है, जाने क्या क्या सहता है. _ सारा दर्द अपने अंदर रखता है..!!
बाप वो अजीब हस्ती है _

जिसके पसीने की एक बूंद की कीमत भी औलाद अदा नहीं कर सकती.

शहर से बच्चे दूर चले जाते हैं लेकिन पिता के प्रेम से नहीं.

पिता अपने मन की आँखों से भी पुत्र जो देख रहा होता है, उसे देखने की कोशिश करता है.

बचपन में पुत्र- पिता के पास बैठकर और

बुढ़ापे में पिता- पुत्र के पास बैठकर अधिक सुख पाता है.

दिमाग़ में दुनिया भर की Tension और दिल में अपने बच्चों की फ़िकर

ऐसा होता है “पिता”

गर्दिश साथ लाती हैं,, ज़माने भर की तकलीफें,, _

_ सुना है बाप जिंदा हो तो कांटे भी नही चुभते..

वो भले ही जज्बात जाहिर नहीं करता,

पर पिता से ज्यादा प्यार कोई नहीं करता..

पुत्र जो भी लाभ भौतिक रूप से प्राप्त करता है, उसे पिता मानसिक रूप से अपने पास रखता है.
पिता का घर होने के बावजूद भी यदि बेटा अपनी कमाई से घर बनवाता है तो पिता को गर्व महसूस होता है.
पिता भले ही खुद को कुछ न दे पर

अपने बच्चे की ख्वाइश पूरी करने के लिए जी जान लगा देता है.

दुनिया का सबसे सक्षम इंसान बाप ही है, वो आपके लिए कुछ भी कर सकता है, कुछ भी.

खिलौनों की ज़िद में एक बच्चा ही नहीं रोता है,_ न दिला पाने की मज़बूरी में उसका बाप भी रोता है.

कठिन और अंजान रास्तों पर भी यह सफर आसान लगता है,

यह सब पिता की दुआओं और आशीषों का असर है,

कि धरती फ़तेह करने निकले हैं हम और कदमों में हमारे आसमाँ झुकता है.

” चार दिन भी कोई दूसरा नही निभा सकता,,”

” जो किरदार बाप पूरी जिंदगी निभाता है “

अपने परिवार के लिए वो अनेकों बलिदान देता है, _

_ पिता से महान इंसान भला कहां कोई और होता है ..

मुझको थकने नहीं देता ये ज़रूरत का पहाड़, _

_ मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा नहीं होने देते ..!!

गरीबी कितनी भी हावी हो किसी पर,

अगर बाप जिंदा हो तो, एक कंकड़ भी नही चुभता….

मुझको रखा छांव में, खुद तपते रहे धुप में

एक फरिश्ता देखा है मैंने, अपने पापा के रूप में..

पिता ज़मीर है पिता जागीर है

जिसके पास ये है_वह सबसे अमीर है..

कहने को सब ऊपर वाला देता है

पर खुदा का ही एक रूप_ _ पिता का शरीर है.

धरती सा धीरज दिया और आसमान सी ऊंचाई है,

जिंदगी को तरस के खुदा ने ये तस्वीर बनाई है,

हर दुख वो बच्चों का खुद पर सह लेते हैं,

उस खुदा की जीवित प्रतिमा को हम पिता कहते हैं..

मुश्किल है, बहुत ज़्यादा मुश्किल है,

_ एक पिता के मनोभावों को व्यक्त करना.
_ पिता का प्यार भी अथाह है, असीमित है.
_ नाम नहीं मिलता, क्रेडिट नहीं मिलता, शायद ही कभी कोई बच्चा समझता हो,
_ फ़िर भी उसी बच्चे पर सब न्यौछावर हमेशा रहता है.
_ अपने बच्चों के अंदर, अपने ही अस्तित्व की तलाश में रहने वाला एक पिता,
_शायद स्वयं भी अपनी भावनाओं को कभी समझ पाता हो, मुझे शंका ही है.
तुम्हारे पापा दिनभर धूप में मेहनत करते हैं, पसीने से भीगकर, थके हुए जिस्म के साथ घर लौटते हैं — सिर्फ़ तुम्हारे चेहरे की एक मुस्कान देखने के लिए.

_ वो शायद ज़्यादा कुछ कहते नहीं, ना ही अपनी आँखों में आंसू लाते हैं, लेकिन उनके हर ख़ामोश लम्हे में, एक गहरी ममता और असीम प्रेम छुपा होता है.
_ पापा अपना प्यार शब्दों में नहीं, अपने कामों में जताते हैं.
_ तुम्हारी स्कूल की फ़ीस समय पर देना, भूखे रहकर तुम्हारा पेट भरना, देर रात उठकर तुम्हारे सोते हुए चेहरे को निहारना — ये सब उनके बिना कहे इज़हार हैं, जो सिर्फ़ महसूस किए जा सकते हैं.
_ पापा वो साया हैं, जो अपने सपनों को किनारे रखकर, तुम्हारे भविष्य की रौशनी के लिए ख़ामोशी से लड़ते हैं.
_ अगर तुम उन्हें थोड़ा प्यार दो, थोड़ा मुस्कराकर उनका स्वागत करो — तो वही उनके सारे थकान का सबसे बड़ा इनाम होगा.”
_ पापा सिर्फ़ कमाने वाले इंसान नहीं हैं, वो एक परिवार का वो मौन सहारा हैं, जो अपने त्याग के पीछे निस्वार्थ प्रेम को छुपाकर जीते हैं.!!
पिता जीवन है, सम्बल है, शक्ति है,

पिता सृष्टि के निर्माण की अभिव्यक्ति है.

पिता अंगुली पकड़े बच्चे का सहारा है,

पिता कभी कुछ खट्टा कभी खारा है.

पिता पालन है, पोषण है, परिवार का अनुशासन है.

पिता धौंस से चलाने वाला, प्रेम का प्रशासन है.

पिता रोटी है, कपड़ा है, मकान है,

पिता छोटे से परिन्दे का बड़ा आसमान है.

पिता अप्रदर्शित अनन्त प्यार है,

पिता है तो बच्चों को इन्तजार है.

पिता से ही बच्चों के ढेर सारे सपने हैं,

पिता है तो बाजार के सब खिलौने अपने हैं.

पिता से परिवार में हर पल राग है,

पिता से ही माँ की बिंदी और सुहाग है.

पिता अपनी इच्छाओं का हनन और परिवार की पूर्ति है,

पिता रक्त में दिये हुए संस्कारों की मूर्ति है.

पिता एक जीवन का, जीवन को दान है,

पिता दुनिया दिखाने का अहसान है.

पिता सुरछा है अगर सिर पर हाथ है,

पिता नहीं तो बचपन अनाथ है.

वो पिता👤 होता है

वो पिता👤 ही होता है

जो अपने बच्चो👦 को अच्छे

विद्यालय में पढ़ाने के लिए

दौड🏃भाग करता है…

उधार लाकर donation भरता

है, जरूरत पड़ी तो किसी के भी

हाथ🙏 पैर भी पड़ता है

……. वो पिता👤 होता है ।।

हर कॉलेज🏬 में साथ👥साथ

घूमता है, बच्चे के रहने के

लिए होस्टल🏨 ढुँढता है…

स्वतः फटे कपडे पहनता है

और बच्चे के लिए नयी जीन्स👖

टी-शर्ट👕 लाता है

………. वो पिता👤 होता है ।।

खुद खटारा फोन📞 चलाता है पर

बच्चे के लिए स्मार्ट📱 फोन लाता है…

बच्चे की एक आवाज सुनने के

लिए, उसके फोन में पैसा💰 भराता है

……. वो पिता👤 होता है ।

बच्चे के प्रेम विवाह के निर्णय पर

वो नाराज़😔 होता है और गुस्से

में कहता है सब ठीक से देख

लिया है ना, “आप कुछ

समझते भी हैं ?” यह सुन कर

बहुत रोता😢 है

…….वो पिता👤 होता है ।।

बेटी की विदाई पर दिल की

गहराई से रोता😭 है,

मेरी बेटी का ख्याल रखना हाथ

जोड़👏 कर कहता है

……… वो पिता👤 होता है ।।

पिता का प्यार दिखता नहीं है

सिर्फ महसूस किया जाता है।

वो पिता👤 ही होता है.

मेरा साहस मेरी इज्जत मेरा सम्मान है पिता,

मेरी ताकत मेरी पूँजी मेरी पहचान है पिता,

घर की इक- इक ईंट में शामिल उनका खून- पसीना,

सारे घर की रौनक उनसे सारे घर की शान पिता,

मेरी इज्जत मेरी शोहरत मेरा रुतबा मेरा मान है पिता,

मुझको हिम्मत देने वाले मेरा अभिमान है पिता,

सारे रिश्ते उनके दम से सारे नाते उनसे है,

सारे घर के दिल की धड़कन सारे घर की जान पिता,

शायद रब ने देकर भेजा फल ये अच्छे कर्मों का,

उसकी रहमत उसकी नैमत उसका है वरदान पिता.

मेरे कंधे पर बैठा मेरा बेटा

जब मेरे कंधे पे खड़ा हो गया

मुझी से कहने लगा

देखो पापा मैं तुमसे बड़ा हो गया

मैंने कहा, बेटा इस खूबसूरत

ग़लतफ़हमी में भले ही जकड़े रहना

मगर मेरा हाथ पकड़े रखना

जिस दिन यह हाथ छूट जाएगा

बेटा तेरा रंगीन सपना भी टूट जाएगा

दुनिया वास्तव में उतनी हसीन नहीं है

देख तेरे पाँव तले अभी जमीं नहीं है

मैं तो बाप हूँ बेटा बहुत खुश हो जाऊंगा

जिस दिन तू वास्तव में मुझसे बड़ा हो जाएगा

मगर बेटे कंधे पे नहीं…

जब तू जमीन पे खड़ा हो जाएगा

ये बाप तुझे अपना सब कुछ दे जाएगा

और तेरे कंधे पर दुनिया से चला जाएगा.

अपने बच्चे की एक ख़ुशी के लिए

जो अपने सुख भूल जाते हैं।

जो जीवन भर कर्ज़ चुकाते हैं,

वो पापा ही तो हैं जो हर फर्ज़ निभाते हैं।

अपनी बेटी के चेहरे पर ख़ुशी देख

जो चेहरे पर मुस्कान लाते हैं,

वो पापा ही तो हैं जो हर पल साथ निभाते हैं ।

जब बेटा प्रणाम करता है,

वो पापा ही तो हैं जिन्हें सुख प्राप्त होता है।

हर पल जो अपने चेहरे पर मुस्कान रखे हुए रहते,

अपने दुख को कभी अपने चेहरे पर नहीं लाने देते,

वो पापा ही तो हैं जो बेटी की बिदाई पर आँखों में सुकून के आँसू लाते हैं।

जो बिना दिखाए भी इतना प्यार करते हैं

वो पापा ही तो है जो हमारी पहचान बनते हैं।

Written by – Ashvini Vyas

पिता की थाली में आई रोटी, पिता ने आधी दे दी

पिता की जेब में आये सिक्के, पिता ने आधे दे दिये

फिर एक दिन दुःख आए, पिता ने पूरे रख लिए

जब दुःख बांटने का समय आता है, सारे पिता स्वार्थी हो जाते हैं

*जाने क्यूं पिता हर बार पीछे रह जाता है*

तुम और मैं पति पत्नी थे, तुम माँ बन गईं मैं पिता रह गया।

तुमने घर सम्भाला, मैंने कमाई, लेकिन तुम “माँ के हाथ का खाना” बन गई, मैं कमाने वाला पिता रह गया।
बच्चों को चोट लगी और तुमने गले लगाया, मैंने समझाया, तुम ममतामयी बन गई मैं पिता रह गया।
बच्चों ने गलतियां कीं, तुम पक्ष ले कर “understanding Mom” बन गईं और मैं “पापा नहीं समझते” वाला पिता रह गया।
“पापा नाराज होंगे” कह कर तुम बच्चों की बेस्ट फ्रेंड बन गईं, और मैं गुस्सा करने वाला पिता रह गया।
तुम्हारे आंसू में मां का प्यार और मेरे छुपे हुए आंसुओं मे, मैं निष्ठुर पिता रह गया।
तुम चंद्रमा की तरह शीतल बनतीं गईं, और पता नहीं कब मैं सूर्य की अग्नि सा पिता रह गया।
तुम धरती माँ, भारत मां और मदर नेचर बनतीं गईं,
और मैं जीवन को प्रारंभ करने का दायित्व लिए
सिर्फ एक पिता रह गया…
फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है
माँ, नौ महीने पालती है
पिता, 25 साल् पालता है
फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है
माँ, बिना तानख्वाह घर का सारा काम करती है
पिता, पूरी कमाई घर पे लुटा देता है
फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है
माँ ! जो चाहते हो वो बनाती है
पिता ! जो चाहते हो वो ला के देता है
फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है
माँ ! को याद करते हो जब चोट लगती है
पिता ! को याद करते हो जब ज़रुरत पड़ती है
फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है
माँ की ओर बच्चो की अलमारी नये कपड़े से भरी है
पिता, कई सालो तक पुराने कपड़े चलाता है
फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है*
पिता, अपनी ज़रुरते टाल कर सबकी ज़रुरते समय से पूरी करता है
किसी को उनकी ज़रुरते टालने को नहीं कहता
फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है
जीवनभर दूसरों से आगे रहने की कोशिश करता है
मगर हमेशा परिवार के पीछे रहता है, शायद इसीलिए क्योकि वो पिता है ।
( पिता के प्रेम का पता तब चलता है जब वो नही रहता )
पत्नी जब स्वयं माँ बनने का समाचार सुनाये

और वो खबर सुन,
आँखों में से खुशी के आँशु टप टप गिरने लगे
तब … आदमी……,
” पुरुष में से पिता बनता है”
🙏 🙏
नर्स द्वारा कपडे में लिपटा कुछ पाउण्ड का दिया जीव, जवाबदारी का प्रचण्ड बोझ का अहसास कराये
तब …..,आदमी…..,
” पुरुष मिट पिता बनता है”
🙏 🙏
रात – आधी रात, जागकर पत्नी के साथ, बेबी का डायपर बदलता है, और बच्चे को कमर में उठा कर घूमता है, उसे चुप कराता है, पत्नी को कहता है तू सो जा में इसे सुला दूँगा।
तब……….,आदमी……,
” पुरुष में से, पिता बनता हैं “
🙏 🙏
मित्रों के साथ घूमना, पार्टी करना जब नीरस लगने लगे और पैर घर की तरफ बरबस दौड़ लगाये
तब …….., आदमी……,
“पुरुष में से, पिता बनता हैं”
🙏 🙏
“हमने कभी लाईन में खड़ा होना नहीं सिखा ” कह, हमेशा ब्लैक में टिकट लेने वाला, बच्चे के स्कूल Admission का फॉर्म लेने हेतु पूरी ईमानदारी से सुबह 4 बज लाईन में खड़ा होने लगे
तब ….., आदमी….,
” पुरुष मिट, पिता बनता हैं “
🙏
जिसे सुबह उठाते साक्षात कुम्भकरण की याद आती हो और वो जब रात को बार बार उठ कर ये देखने लगे की मेरा हाथ या पैर कही बच्चे के ऊपर तो नहीं आ गया एवम् सोने में पूरी सावधानी रखने लगे
तब …..,आदमी…,
” पुरुष मिट, पिता बनता हैं”
🙏 🙏
असलियत में एक ही थप्पड़ से सामने वाले को चारो खाने चित करने वाला, जब बच्चे के साथ झूठ मूठ की fighting में बच्चे की नाजुक थप्पड़ से जमीन पर गिरने लगे
तब…… आदमी……,
” पुरुष मिट पिता बनता हैं”
🙏 🙏
खुद भले ही कम पढ़ा या अनपढ़ हो, काम से घर आकर बच्चों को ” पढ़ाई बराबर करना, होमवर्क पूरा किया या नहीं”
बड़ी ही गंभीरता से कहे
तब ….आदमी……,
” पुरुष में से, पिता बनता हैं “
🙏 🙏
खुद ही की कल की मेहनत पर ऐश करने वाला, अचानक बच्चों के आने वाले कल के लिए आज comprises करने लगे
तब ….आदमी…..,
” पुरुष मिट, पिता बनता हैं “
🙏
ओफ़ीस का बॉस, कईयों को आदेश देने वाला, स्कूल के
POS में क्लास टीचर के सामने डरा सहमा सा, कान में तेल डाला हो ऐसे उनकी हर INSTRUCTION ध्यान से सुनने लगे
तब ….आदमी……,
” पुरुष में से पिता बनता है”
🙏 🙏
खुद की पदोन्नति से भी ज्यादा
बच्चे की स्कूल की सादी यूनिट टेस्ट की ज्यादा चिंता करने लगे
तब ….आदमी…….,
” पुरुष मिट पिता बनता है “
🙏 🙏
खुद के जन्मदिन का उत्साह से ज्यादा बच्चों के Birthday पार्टी की तैयारी में मग्न रहे
तब …. आदमी…….,
” पुरुष से पिता बनाता है “
🙏 🙏
हमेशा अच्छी अच्छी गाडियो में घुमाने वाला, जब बच्चे की सायकल की सीट पकड़ कर उसके पीछे भागने में खुश होने लगे
तब ……आदमी….,
” पुरुष मिट पिता बनता है”
🙏
खुद ने देखी दुनिया, और खुद ने की अगणित भूले बच्चे ना करे, इसलिये उन्हें टोकने की शुरुआत करे
तब …..आदमी……,
” पुरुष से पिता बनता है”
🙏 🙏
बच्चों को कॉलेज में प्रवेश के लिए, किसी भी तरह 💵 पैसे ला कर अथवा वर्चस्व वाले व्यक्ति के सामने दोनों 🙏 जोड़े
तब …….आदमी…….,
” पुरुष से पिता बनता है “
🙏 🙏
“आपका समय अलग था,
अब ज़माना बदल गया है,
आपको कुछ मालूम नहीं”
” This is generation gap “
ये शब्द खुद ने कभी बोला ये याद आये और मन ही मन बाबूजी को याद कर माफी माँगने लगे
तब ….आदमी……..,
” पुरुष में से पिता बनता है “
🙏 🙏
लड़का बाहर चला जाएगा, लड़की ससुराल, ये खबर होने के बावजूद, उनके लिए सतत प्रयत्नशील रहे
तब …आदमी……,
” पुरुष मिट पिता बनता है “
🙏 🙏
बच्चों को बड़ा करते करते कब बुढापा आ गया, इस पर ध्यान ही नहीं जाता,और जब ध्यान आता है तब उसका कोइ अर्थ नहीं रहता
तब ……,आदमी…….,
” पुरुष से पिता बनता है”…….
” पापा “कहता नहीं हूँ मैं आपसे कि कितना प्यार करता हूँ

सारे जहान की खुशियाँ आप पर कुर्बान करता हूँ

अपनी सारी कमाई आपने मुझे पर लगा दी है

आपने अपने लिए कहाँ आराम की ज़िन्दगी जी है

अनगिनत कुर्बानी आपने मेरे लिए दी है

बिन कहे ही मेरी हर ज़रूरत पूरी की है

आप मेरी ज़िन्दगी का नूर हो

आप मेरी ज़िन्दगी का ग़ुरूर हो

आप मेरे हर दुःख को हर लेते हो

सारे सुख मेरे आगे कर देते हो

आपसे मुझे इतना प्यार है

जान मेरी आपके लिए निसार है

दुःख आप अपना मुझे बताते नहीं हो

ख़ुद सहते हो मुझे एहसास कराते नहीं हो

हर मुश्किल में आप मेरा साथ निभाते रहे हो

ख़ुद दुःख में होने पर भी आप मुस्कुराते रहे हो

सब धन-दौलत आपके आगे व्यर्थ है

आप हो तभी मेरी ज़िन्दगी स्वर्ग है

मैं हूँ आपका अंश अभी ये भी तो आपको दिखाना है

गले लगा कर आप को अभी प्यार अपना जाताना है..

~ Imtarun

” # मेरे_पापा #”

खुद के लिए बूँद नही पानी की,

मेरे लिए समुंदर ही लाते हैं पापा,

ख्वाहिशों के जाहिर होने से पहले,

मेरी गोद तक सब पहुँचाते हैं पापा,

उँगलियाँ पकड़ कर चलना सिखाते हैं पापा,

काँधे पर बिठा कर मेला घुमाते हैं पापा,

रात को जगाकर खुद हाँथ से खिलाते हैं पापा,

गोद मे सुलाकर घंटों कहानियाँ सुनाते हैं पापा,

अच्छा बुरा रास्ता सब बताते हैं पापा,

रूठ कर भी मुझसे मुझको मनाते हैं पापा,

कोई फर्ज से पहले अपना फर्ज निभाते हैं पापा,

खुद दर्द मे भी रहकर मुझको हंसाते हैं पापा,

मेरी जीत का हर जश्न मनाते हैं पापा,

मेरी हार पर सीने लगा समझाते हैं पापा,

दुनिया मे सभी है जो संग मे हैं पापा, !!

#कुछ दो पंक्तियां

❤️🌹मन_से 🌹❤️
कहना चाहता हूं पापा के लिए…
🍫🍫🍫🍫🌻🍫🍫🍫🍫
मेरे पापा हमेशा कहा करते हैँ की,
अपने बाप से भी पहले अपनी मां की इज्जत करो।
क्योंकि मां से तुम्हारा रिश्ता
इस दुनिया के किसी भी इंसान से 9 महीने पुराना होता हैं,
▪️▪️❤️
ये बात मुझे इतनी अच्छी लगती हैं की,
मां के लिए तो इज्जत हैं, ही दिल में,
पापा के लिए भी 4 गुना बढ़ गई
▪️▪️▪️❤️
मतलब यार एक पापा ही तो होते हैं
जो खामोश रह के भी हम सबकी खुशियों
और जरूरतों को आगे कर देते हैं,
▪️▪️▪️▪️❤️
ताकि उन्हें जिन चीजों की कमी रही हो
वो कभी उनके बच्चों को ना रहें,
दुनिया से प्यार का इजहार कर देते हैं
▪️▪️▪️▪️▪️❤️
लेकिन जिस शख्स की वजह से ये दुनिया देखी
उसी इंसान को सारी जिंदगी नहीं बता पाते
की सबसे ज्यादा प्यार अगर हैं तो वो सिर्फ आपसे हैं
▪️▪️▪️▪️▪️▪️❤️
उनके लिए चार अच्छी बातें तो लिखो ही,
अगर कुछ वक्त निकाल सको तो
उनके पास जाके बैठ जाना,
▪️▪️▪️▪️▪️▪️▪️❤️
चाहे कुछ बोलना मत
पिता से है नाम तेरा…..

………………………..
_ अर्ज़ किया है…
_ वह पिता है..
_ केवल वह जानता है..
_ कि संतान को कैसे पालता है..
_ मेहनत की काटता है..
_ दर दर नहीं झांकता है..
_ दर्द दिखाता नहीं..
_ अंदर ही अंदर खुद को काटता है..
_ स्वयं को कोटि दफा दरकिनार कर..
_ नैया हमारी पार लगाता है..
_ जिंदगी पिता की उतनी भी सरल नहीं..
_ जितनी वह दर्शाता है..
_ तभी संतान का नाम पिता से होता है..
_ जब वह वाडिल हो जाता है..
_ इच्छाएं कभी नहीं जताता..
_ किंतु उनको पूरा करता गुजर जाता है..
_ पिता ऐसी हस्ती बनाई है खुदा ने..
_ इस शिद्दत से की अग्नि स्वयं झेल ले..
_ उसका साया भी काफी हो जाता है।।
!! विचार कीजिए!!
हर पिता को समर्पित……

मैंने एक शख्स को हालात से लड़ते देखा है,
फिर एक बाप को अपनी ख्वाहिशों को मारते देखा है।।
औलाद की ख्वाहिश की खातिर मैंने,
एक बाप को पैदल सफर तय करते देखा है।
खुद की वो बरसो पुरानी कमीज़ आज भी नई लगती है,
मैंने एक बाप को औलाद के लिए नए कपड़े खरीदते देखा है।।
जो ना था उसके कभी अपने मुस्तकबिल में मिला,
मैंने उस बाप को अपनी औलाद की हर ख्वाहिश को पूरा करते देखा है।।
कितने गम छुपे हैं उसके सीने में,
मैंने एक बाप को अपनी औलाद के लिए हर खुशियां लाते देखा है।।
टूटा है ओ हालात से जाने कितना दफा,
मैंने एक बाप को अपनी औलाद के हौसले बुलंद करते देखा है ।।
सिसक लेता है वो अक्सर किसी कोने में जाकर,
मैंने एक बाप को अपनी औलाद के साथ मुस्कराते देखा है।।
दिन कैसी तकलीफ में गुजरा, पिता घर पे कहाँ बताता है।

कितने दर्द अपने दिल में छुपा कर, वो कमा कर लाता है॥
दिन कैसी तकलीफ में गुजरा, पिता घर पे कहाँ बताता है।
काम में हुई हर गलती पर, डाँटे जो पिता ने सही होगी,
न जाने कमाते हुए किस किस ने, क्या क्या कही होगी,
दबा कर रखता है दिल में शिकन, चेहरे पे कहाँ लाता है॥
कितने दर्द अपने दिल में छुपा कर, वो कमा कर लाता है॥
दिन कैसी तकलीफ में गुजरा, पिता घर पे कहाँ बताता है।
कभी दिन भर जला कङी धूप में कभी, रातों को न सोना पङा,
बेईज्जत जो कमाने के लिए दौलत, कभी उसको होना पङा,
फिर हँस हँस कर दौलत कमाई हुई अपने, बच्चाें पर लुटाता है॥
कितने दर्द अपने दिल में छुपा कर, वो कमा कर लाता है॥
दिन कैसी तकलीफ में गुजरा, पिता घर पे कहाँ बताता है।
जो जेब से खुद के लिए रुपया खर्च कर, इक बोतल दवा की न उठा पाए,
बिना दवा लिए काम करता है वो, बिमारी उसे कहाँ मिटा पाए,
वो पिता खुद के वजन से कहीं ज्यादा, बौझ रुपयों के लिए उठाता है॥
कितने दर्द अपने दिल में छुपा कर, वो कमा कर लाता है॥
दिन कैसी तकलीफ में गुजरा, पिता घर पे कहाँ बताता है।
Lekhak MAHESH KUMAR CHALIA.
” Miss You Papa “

सब नजर आते हैं एक आप ही नहीं !

आज भी लगता है आप आओगे और पूछोगे “ठीक है बेटा”

पर ये शब्द कानों तक आते ही नहीं !

ज़िन्दगी में बहुत उलझनें हैं, पापा पास आप भी नहीं,

कोई नहीं है जो आकर बोले, “बेटा घबराना नहीं”

मन करता है पहले के जैसे आपसे घंटों बातें करूँ,

पर अब ये मेरी किस्मत में ही नहीं !

आप यादों में जिंदा हो पापा,

फिर भी ये दिल चुपके चुपके रोता है !

कोई नहीं है आंसू पोछने वाला, खुद ही चुप होना पड़ता है !

आज भी वो पल याद है, लगता है कल ही की बात है !!

पिता का कर्ज कैसे चुकाओगे ?

_ वह पिता का तुम्हारे लिए खुद भूखे रहकर भोजन कराना..
_ खुद गर्म पानी पीकर तुम्हें ठंडा पानी पिलाना..
_तुम कैसे भूल जाओगे _ पिता का कर्ज कैसे चूकाओगे..??
_ वह पिता का पंखा बंद कर के खुद का _ तुम्हारे लिए पंखा चालू करके रखना..
_ खुद बिजली बचाने के लिए _अंधेरे में रह कर _तुम्हारे लिए लाइट का इंतजाम करना..
_ क्या तुम भूल पाओगे _ पिता का कर्ज कैसे चूकाओगे..??
_ वह तुम्हारे बचपन में _रात को तुम्हें गोदी में ले कर _खुद की नींद खराब कर के _कमरे में घूम कर सुलाना..
_ तुम्हारी मां की नींद खराब ना हो जाए _ इसलिए तुम्हारे रोने की आवाज सुनकर _खुद उठ कर _फौरन तुम्हें लेकर कमरे में घूमना..
_तुम भुला पाओगे _पिता का कर्ज चुका पाओगे ?
_ तुम्हारे खाने में अच्छी सब्जी _ अच्छा टिफिन बनाने के लिए _ तुम्हारी मां के पीछे लगे रहना..
_ कोई तुमसे कोई दो शब्द बोल दे तो _उनसे भिड़ जाना..
_ तुम्हारे खाने-पीने में कोई कमी ना रह जाए _क्या भूल जाओगे ??
_गर्मी में तुम्हारी नींद खराब ना हो, _तुम्हें कष्ट न हो _उसके लिए सदैव इन्वर्टर लगा कर रखना _अपने खर्चे बचाकर बैटरी खरीदना,
_घर में तुम्हारी मां _और तुम्हारे लिए कभी पानी की परेशानी ना हो _ उस के लिए खर्च बचा बचा के _बोरिंग करवाना _भूल जाओगे,
_खुद पर खर्च बिल्कुल भी ना करना _यह सब पिता के द्वारा निभाए कर्तव्य – त्याग तुम कैसे भूल पाओगे..
_क्या तुम पिता का कर्ज चुका पाओगे ?
_ लगभग सभी लोग जेब खर्च करते हैं, लेकिन तुम्हारे पिता ने अपने शौक को भी भुला दिया, _ सिर्फ तुम्हारी खातिर,
_ क्या पिता का कर्ज चुका पाओगे..??
__ खुद पैदल चल के, खुद मेहनत कर के _ तुम्हे चिंताओं से मुक्त रखना _ताकि तुम अच्छी शिक्षा ले सको, जीवन में आगे बढ़ सको..
_ पिता का मन ही मन घुटकर भी सब करते रहना, क्या भूल जाओगे..
_पिता का कर्ज चुका पाओगे ??
_ ज़िन्दगी में सिर्फ समझौते ही करते रहना, असहनीय होने पर भी सहन करना _सिर्फ तुम्हारी खातिर..
_ खुश नहीं रहने पर भी मुस्कुराते रहना __ भूल जाओगे..
क्या पिता का कर्ज चुका पाओगे…??
वह दोबारा नहीं आएगा

_ तुम अपने बूढ़े पिता से मधुर मुस्कान की उम्मीद न रखो,
_ देखो कितना धीरे-धीरे टहलता है,
_ धरती कितनी छोटी हो गई है
_ भोजन की तरफ भी हाथ धीरे-धीरे बढ़ाता है
_ हाथ छोटे हो गए हैं, जीवन छोटा हो गया है
_ उसे तो जी भर जी लेने दो
_ चाहे दवा के सहारे या प्यार के सहारे
_ अंतिम मौका है जो हाथ से छूट रहा है
_ अब वह दोबारा नहीं आएगा, तुम्हें जन्म देने के लिए.!!
– नरेश अग्रवाल, जमशेदपुर
“हम अपने पिता को कभी जान ही न पाए”

कभी सोचा था, पिता क्यों इतने चुप रहते हैं?
क्यों उनके शब्द हमेशा नियमों में बंधे लगते हैं?
क्यों उनकी आँखों में प्रेम नहीं, कठोरता दिखती थी?
क्यों उनका चेहरा जैसे किसी अदृश्य बोझ से झुका दिखता था?
हमने समझा वो सख्त हैं, ठंडे हैं, दूर हैं।
पर अब समझ आता है वो थके हुए थे, टूटे नहीं थे।
वो भावहीन नहीं थे, बस थकान में छिपे हुए इंसान थे।
जो मुस्कुराना भूल गए थे क्योंकि ज़िन्दगी ने मुस्कुराने की वजहें छीन ली थीं।
१. हमने आदमी देखा, उसका युद्ध नहीं
हमने पिता को देखा मगर उनका संघर्ष नहीं।
हमने उनके आदेश सुने मगर उनके डर नहीं।
हमने उनका गुस्सा देखा मगर उनकी भूख नहीं देखी।
सुबह के नाश्ते में जब रोटी कम पड़ती थी,
वो कहते थे “मुझे भूख नहीं”
पर सच ये था वो भूख निगल लेते थे,
ताकि हम भर पेट खा सकें।
रात को जब हम सो जाते थे,
वो छत की ओर देख सोचते थे
“कल की फीस कहाँ से आएगी?”
“किराया कैसे दूँगा?”
“क्या बच्चों को मुझसे बेहतर ज़िन्दगी मिलेगी?”
हम कहते थे “पापा मुस्कुराते नहीं।”
पर कौन मुस्कुराए जब ज़िन्दगी रोज़ सज़ा सुनाए?
हम कहते थे “पापा बात नहीं करते।”
पर किससे करें? कौन सुनता था उनका दिल?
उनकी ख़ामोशी कमजोरी नहीं थी
वो उनका कवच थी।
वो टूट सकते थे, मगर टूटे नहीं।
क्योंकि अगर वो गिरते,
तो पूरा घर बिखर जाता।
२. हमने माँ के आँसू देखे पिता के ज़ख्म नहीं
माँ ने दर्द रोकर जताया, पिता ने सहकर।
माँ ने शिकायत की, पिता ने सहमति दी।
माँ के आँसू हमें दिखे, पिता का रक्त नहीं।
क्योंकि औरत की पीड़ा आवाज़ बन जाती है,
और आदमी की पीड़ा खामोशी।
वो सुने गए क्योंकि वो बोले।
वो भूले गए क्योंकि वो चुप रहे।
हमने सुना “वो गुस्सैल हैं, ज़िद्दी हैं।”
पर कभी किसी ने नहीं कहा
“वो टूटे हुए हैं, मगर टिके हुए हैं।”
वो हर तूफ़ान में दीवार बन खड़े रहे,
जबकि भीतर से वे भी बिखरे हुए थे।
वो आख़िरी इंसान थे जो हार नहीं माने,
और शायद पहला जो कभी धन्यवाद नहीं पाया।
३. वो नायक नहीं बनना चाहते थे बस ज़िन्दा रहना चाहते थे
बचपन में हमने उन्हें सुपरहीरो समझा,
बाद में कठोर इंसान कहा।
पर अब समझ आता है
वो बस जीवित रहने की जंग लड़ रहे थे।
हम उनके समय चाहते थे
और वो हमारे भविष्य के लिए समय बेच रहे थे।
हम हँसी चाहते थे
और वो हमारी सुरक्षा खरीदने जा रहे थे।
हर “ना” जो उन्होंने कहा प्यार था।
हर सख़्ती परवाह थी।
हर चुप्पी ममता का दूसरा नाम थी।
हमने उनकी कड़वाहट को गलत समझा,
अब ज़िन्दगी ने वही स्वाद हमें चखाया।
अब जब थकान हड्डियों में उतरती है,
तो हम समझते हैं
वो क्यों देर से घर आते थे,
क्यों कभी मुस्कुराते नहीं थे।
४. जब बड़े हुए तब समझ पाए
अब जब हम पिता बने हैं,
बिल चुकाते हैं,
रातों को करवटें बदलते हैं,
तो समझ आता है
मर्द होना कोई गर्व नहीं, एक तपस्या है।
ज़िन्दगी हर दिन थोड़ा-थोड़ा छीनती है
सपने, सुकून, और संवेदनाएँ।
और फिर भी दुनिया कहती है “और दो, और सहो।”
अब आईने में अपनी ही आँखों में वो थकान दिखती है,
जो कभी पिता की आँखों में दिखती थी।
वो चुप्पी अब हमारे भीतर भी बस गई है।
वो कठोरता अब हमारी ढाल बन गई है।
हमने कहा था “वो और अच्छे पिता हो सकते थे।”
अब हम कहते हैं “पता नहीं, वो कैसे संभल गए थे।”
५. जब समझ आया तब वो चले गए
जब वो थे हम व्यस्त थे।
जब वो गए हम टूटे थे।
उन्होंने घर बनाया,
हमने कोना दिया।
उन्होंने जीवन लगाया,
हमने जज किया।
वो हमें छोड़ गए बिना कुछ कहे,
और अब उनकी चुप्पी हमारे दिल में गूंजती है।
अब जब हम अपने बच्चों को सुलाते हैं,
तो उनकी याद जैसे सिरहाने बैठ जाती है।
अब समझ आता है
उनकी डांट में दुआ थी,
उनके नियमों में रक्षा थी,
उनकी सख़्ती में स्थिरता थी।
वो खलनायक नहीं थे
वो नींव थे, जिस पर ये घर खड़ा है।
हमने पिता को कभी जाना ही नहीं।
हमने उनके स्वभाव को देखा, उनके संघर्ष को नहीं।
हमने उनके शब्दों को सुना, उनके मौन को नहीं।
हमने माँ के आँसू समझे पिता के बलिदान नहीं।
अब जब वही बोझ हमारे कंधों पर है,
अब जब वही थकान हमारे दिल में है,
तब समझ आता है
वो मर्द नहीं, एक मौन योद्धा थे।
अगर वो ज़िंदा हैं तो गले लगाओ।
अगर वो चले गए हैं तो सिर झुका कर दुआ करो।
क्योंकि इस धरती पर कोई रिश्ता इतना सच्चा नहीं,
जितना पिता का
जो सब कुछ देता है,
और बदले में “धन्यवाद” भी नहीं माँगता।
– राहुल कुमार झा

सुविचार – माँ – 021

माँ बनना पृथ्वी पर सबसे कठिन काम है.

हर जगह महिलाओं को इसकी घोषणा करनी चाहिए.

Being a mother is the hardest job on earth. Women everywhere must declare it so. – Oprah Winfrey

” माँ ” सबकी जगह ले सकती है, मगर इस दुनिया में कोई भी माँ की जगह नहीं ले सकता.
” माँ ” – धरती की तरह होती हैं .. आपकी तमाम नादानियों, प्रताड़नाओं के बावज़ूद केवल जीवन और पोषण ही देतीं हैं.
दुनिया में ” माँ ” ही एकमात्र वो शख्स होती है, जो हमारी तमाम गलतियों को भुला कर हमे माफ कर देती है.
बेटी पीहर से विदा होते और उसकी मां उसे विदा करते.. लाख चाहकर भी आँख नम करने से नहीं रोक सकती और यह इस रिश्ते का महत्व ही नहीं.. शाश्वत सत्य है.

_ माँ नहीं थी वह, आँगन थी, द्वार थी, किवाड़ थी, चूल्हा थी, आग थी, शुकुन थी, छाया थी, नदी की धार थी.
_ मां सिर्फ प्यार थी, माँ सब कुछ थी.
_ अब माँ “यादें” है, तड़प, एक खालीपन है.!!
शर्ट के टूटे बटन से लेकर टूटे हुए आत्मविश्वास को जोड़ने का हुनर सिर्फ माँ में ही होता है.
एक बच्चा आपके बुढापे तक, माँ के प्यार को अनगिनत रूपों में देख चुका होता है.
कोई भी माँ अपने दुखों से बच्चों की खुशियों को ढकना नहीं चाहती है.
माँ की तरह कोई और ख्याल रख पाये, ये तो बस ख्याल ही हो सकता है.
माँ होना आसान है, _लेकिन माँ का फर्ज निभाना बड़ा कठिन है.!!
” माँ के लिए क्या लिखू, _उसकी ही तो लिखावट हूँ मैं “
महज़ एक इत्तेफ़ाक़ नहीं था वो जनाब, _

_ जनम लेते ही मां का दर्द, बच्चे को भी रुला गया ..!!

कांपते हाथों से भी …पिरोना जानती है,

वो मां है …..घर सजाना भी जानती है..

माँ कभी ये नहीं कहती, बेटा तू मुझे खुश रखना,_

_ माँ कहती है, बेटा तू सदा खुश रहना !!

मुश्किलों को वो मेरे ख्वाबों में भी पहचान ही लेती है, _

_ माँ ना जाने कैसे बिन कहे मेरी हर बात जान लेती है ..

मां कभी अपने लिए नहीं मांगती,

_ उसकी हर प्रार्थना में सिर्फ़ अपने बच्चों का नाम होता है.!!

कहां होता है इतना तजुर्बा किसी हकीम के पास ! _

_ मां आवाज सुनकर बुखार नाप लेती है !!

माँ की तरह….कोई ओर “ख्याल” रख पाये…_

_ ये तो बस….. “ख्याल” ही हो सकता है…

माँ मेरे दिल की हर इक बात जान लेती है, _

_ कह के ना ना मेरी हर बात मान लेती है !!

माँ ही एक ऐसी होती है जो हमारे मन की बात बिना कहे जान जाती है,

और जो अपने बच्चों से बदले में कुछ भी उम्मीद किए बिना असीम प्रेम करती है.

बिन बोले जो बोली समझ लेती है, _ चाहे कितने ही बड़े हो जाएँ हम

_ जो खुद से भी शायद नहीं कह पाते, _ वो माँ सुन लेती है ..

मां अलमारी में रखे संदूक की तरह होती है, जो भले ही कोने में पड़ा रहता है,

पर सारा कीमती सामान उसी में छुपा रहता है.

किसने कहा फ़रिश्तों के, जग में दीदार नहीं होते,

माँ की गोद में एक झपकी, सपने साकार सभी होते.

तुम क्या जानो साहब ज़ादू का असर,

खिल उठता हूँ जब पड़ती है मुझ पर मेरी माँ की नज़र.

भीड़ में भी सीने से लगा के दूध पिला देती है,

बच्चा गर भूखा हो तो माँ शर्म को भुला देती है.

बच्चों के दिलो में बसती, उसकी जाँ होती है ।

रहे किसी भी शरीर में माँ तो फिर माँ होती है ।।

शहर में थी नासाज तबियत बेटे की,,

गांव में बैठी मां ने खाना छोड़ दिया..

दवा असर ना करे तो _ नज़र उतारती है,_

_ माँ है जनाब _ वो कहाँ हार मानती है..

तेरे डिब्बे की वह दो रोटियां कहीं बिकती नहीं मां..

महंगे होटल में आज भी भूख मिटती नहीं मां..!

ज़िंदगी धूप है तो तुम गहरी छाव हो माँ,_

_ धरा पर कौन भला तुझसा स्वरुप है माँ !!

हमारी बड़ी से बड़ी गलतियों को भी वो बस एक छोटी-सी धमकी देकर भुला देती है,

_ जबकि उसे खुद भी पता होता है कि उससे कोई खास फर्क पड़ने वाला नहीं..
_ कभी-कभी कठोर रूप भी अपना लेती है, डांटती है, नाराज़ होती है,
_मगर उसके भीतर का मन हमेशा रुई से भी ज़्यादा कोमल रहता है, खैर!…
_ इतना निस्वार्थ स्नेह, इतनी सहज ममता शायद सिर्फ माँ के हिस्से में ही आती है.!!
माॅं का प्यार कितनी मासूमियत भरा होता है,

_ हम कितने बडे क्यों न हो गये हो माँ के लिए हम बच्चे ही रह जाते हैं !
_ घर से हम कही के लिए प्रस्थान करते हैं तो माँ का फिक्र भरा वाक्य सुखद होता है कि गाड़ी में सम्भल कर बैठना; खाना समय से खा लेना, वगैरह वगैरह !
_ और हम नादान और अबोध बालक की तरह खामोशी से मान लेते हैं !
_ सचमुच माँ सा प्रेम, वात्सल्य और परवाह कोई रिश्ता नहीं कर सकता !!
#मेरी_प्यारी_मां

मैं कई बार आँखों से ओझल होने तक दूर निकल आती थी,,
वो जो मुझे देख रही होती थीं
जब तक देख पाती थी तब तक देखती थीं
जब मैं ओझल होना शुरू होती थी उसकी नज़रों से
तब सब एक एक कर मुड़ने लगते थे,,,
पर माँं उनमें सबसे अन्त में मुड़ती थी
वो अनन्त तक देखती रहती थी मेरा जाना..
– Roop
एक घर था, जहाँ माँ थी ;

स्वागत में चेहरों को हाथों में लेकर चूमती,

विदा में सिर पर हाथ रख कर देती आशीष..

घर अब भी है, लेकिन माँ नहीं..

विदा के समय, मुड़ कर देखने पर, अब वह दिखाई नहीं देती..!!

जब टूटती थी प्लेट बचपन में तुझसे,

अब माँ से टूट जाये तो, कुछ मत कहना,

जब मांगता था गुब्बारा, बचपन में माँ से,

अब माँ चश्मा मांगे तो, ना मत कहना,

जब मांगता था चॉकलेट, बचपन में माँ से,

अब माँ दवाई मांगे तो, तू ना मत कहना,

जब डांटती थी माँ, शरारत होती थी तुझसे,

अब वो सुन ना सके तो, बुरा उसे मत कहना,

जब चल नहीं पाता था, माँ पकड़ के चलाती थी,

अब चल न पाए वो, उसे सहारा तुम देना,

जब तू रोता था तब, माँ सीने से लगाती थी,

अब सह लेना दुःख तुम, माँ को रोने मत देना,

जब पैदा हुए थे तुम, तब माँ तुम्हारे पास थी,

जब अंतिम वक्त हो तो, तुम उसके पास रहना.

।। माँ ।।

मेरे इस वजूद की, तू वजह है माँ।

कैसे कह दूँ बस एक mother’s day, तेरा है माँ।

मेरी हर साँस है तू, माँ,

मेरी हर आस है तू माँ ।

उँगली पकड़ कर चलना सीखा,

मेरे हर एक कदम में, तेरा ही साहस है माँ ।

मेरे हकलाने को तूने जुबान दी है,

मुझे इस दुनिया में, मेरी पहचान दी है

मुँह में दूध की धार, अब तक है उधार,

उठना,बैठना, चलना फिरना,

सब में तेरी छाप है माँ,

तुझे ढूंढ़ता है, मन विचलित है,

तेरा बेटा उदास है, माँ ।

कैसे कह दूँ ?

सिर्फ एक ही दिन तेरा है,

मेरे जीवन का एक एक पल,

हर दिन, हर छण, तेरा ही है माँ ।

।। पीके ।।

” माँ “

माँ संवेदना है, भावना है, अहसास है

माँ जीवन के फूलों में खुशबू का वास है

माँ रोते हुए बच्चे का खुशनुमा पलना है

माँ मरुथल में नदी या मीठा सा झरना है

माँ लोरी है, गीत है, प्यारी सी थाप है

माँ पूजा की थाली है, मंत्रों का जाप है

माँ आखों का सिसकता हुआ किनारा है

माँ गालों पर पप्पी है, ममता की धारा है

माँ झुलसते दिनों में कोयल की बोली है

माँ मेहंदी है, कुमकुम है, सिंदूर की रोली है

माँ कलम है, दवात है, स्याही है

माँ परमात्मा की स्वयं एक गवाही है

माँ त्याग है, तपस्या है, सेवा है

माँ फूंक से ठंडा किया हुआ कलेवा है

माँ अनुष्ठान है, साधना है, जीवन का हवन है

माँ जिंदगी है, मुहल्ले में आत्मा का भवन है

माँ चूड़ी वाले हााथों पे मजबूत कंधों का नाम है

माँ काशी है, काबा है, चारो धाम है

माँ चिंता है, याद है, हिचकी है

माँ बच्चे की चोट पर सिसकी है

माँ चूल्हा, धुआँ, रोटी और हाथों का छाला है

माँ जिंदगी की कड़वाहट में अमृत का प्याला है

माँ पृथ्वी है, जगत है, धूरी है

मां बिना इस सृष्टि की कल्पना अधूरी है

तो माँ की यह कथा अनादि है, अध्याय नहीं है

और माँ का जीवन में कोई पर्याय नहीं है

तो माँ का महत्व दुनियाँ में कम हो नहीं सकता

औ माँ जैसा दुनियाँ में कुछ हो नहीं सकता

तो मैं कला की पंक्तियाँ माँ के नाम करता हूँ

मैं दुनियाँ की सब माताओं को प्रणाम करता हूँ।

वो मेरी बदसलूकी पर भी मुझे दुआ देती है,,,

आगोश मे ले कर सब ग़म भुला देती है,,,

यूँ लगता है जैसे जन्नत से आ रही है खुशबु ,,,,

जब वो अपने पल्लू से मुझे हवा देती है,,,

मैं जो अनजाने में करूँ कोई गलती,,,

मेरी “माँ” इस पर भी मुस्कुरा देती है,,,

क्या खूब बनाया है रब ने रिश्ता “माँ” का,,,

वीरान घर को भी “माँ” जन्नत बना देती है…!!!

नींद बहुत आती है पढ़ते पढ़ते,

माँ तुम होती तो कह देता, एक कप चाय बना दो।।

थक गया जली रोटी खा-खा के

माँ तुम होती तो कह देता, दो परांठे बना दो।।

भीग जाती हैं आँसुओं से आँखें,

माँ तुम होती तो कह देता,

आंचल से आँसु पोंछ दो।।

रोज वही नाकाम सी कोशिश

करता हूं खुश रहने की,

माँ तुम होती तो मुस्कुरा लेता,

मां बहुत दूर निकल आया हूँ घर से

बस तेरे सपनों की परवाह न होती….

तो कब का घर चला आता।।

ना भेज उसे वृद्धा आश्रम

जिसने खुद के रक्त से, भीगकर जमाया है तुझे

जिसे तू भेज रहा है वृद्धा आश्रम

उसे छोड़कर _ बाकी सब ने भरमाया है तुझे

सुखी रोटियां खाकर सुबह शाम बिताई उसने

बाकी सब ने खुद की आवश्यकता

पूरी करने के लिए फरमाया है तुझे

ना भेज उसे वृद्धा आश्रम

जिसने अपनी जिंदगी को

मौत के तले रख के जमाया है तुझे ..

*”माँ”*

लेती नहीं दवाई *”माँ”*, जोड़े पाई-पाई *”माँ*।

दुःख थे पर्वत, राई *”माँ*”, हारी नहीं लड़ाई *”माँ*”।

इस दुनियां में सब मैले हैं, किस दुनियां से आई *”माँ”*।

दुनिया के सब रिश्ते ठंडे, गरमागर्म रजाई *”माँ* ।

जब भी कोई रिश्ता उधड़े, करती है तुरपाई *”माँ*” ।

बाबू जी तनख़ा लाये बस, लेकिन बरक़त लाई *”माँ*”।

बाबूजी थे सख्त मगर , माखन और मलाई *”माँ*”।

बाबूजी के पाँव दबा कर सब तीरथ हो आई *”माँ*”।

नाम सभी हैं गुड़ से मीठे, मां जी, मैया, माई, *”माँ*” ।

सभी साड़ियाँ छीज गई थीं, मगर नहीं कह पाई *”माँ”* ।

घर में चूल्हे मत बाँटो रे, देती रही दुहाई *”माँ*”।

बाबूजी बीमार पड़े जब, साथ-साथ मुरझाई *”माँ”* ।

रोती है लेकिन छुप-छुप कर, बड़े सब्र की जाई *”माँ”*।

लड़ते-लड़ते, सहते-सहते, रह गई एक तिहाई *”माँ*” ।

बेटी रहे ससुराल में खुश, सब ज़ेवर दे आई *”माँ*”।

“माँ” से घर, घर लगता है, घर में घुली, समाई *”माँ*” ।

बेटे की कुर्सी है ऊँची, पर उसकी ऊँचाई *”माँ”* ।

दर्द बड़ा हो या छोटा हो, याद हमेशा आई *”माँ”*

घर के शगुन सभी *”माँ”* से, है घर की शहनाई *”माँ*”।

सभी पराये हो जाते हैं, होती नहीं पराई  *मां*

अपनी सत्तर बरस की ” माँ ” को देखकर

क्या सोचा है कभी …?
वो भी कभी कालेज में कुर्ती और ,
स्लैक्स पहन कर जाया करती थी..
तुम हरगिज़ नही सोच सकते .. कि
तुम्हारी “माँ” भी कभी घर के आंगन में
चहकती हुई , उधम मचाती
दौड़ा करती थी ..तो
घर का कोना – कोना गुलज़ार हो उठता था…
किशोरावस्था में वो जब कभी
अपने गिलों बालों में तौलिया लपेटे
छत पर आती गुनगुनानी धूप में सुखाने जाती थी ,तो ..
न जाने कितनी पतंगे
आसमान में कटने लगती थी..
क्या कभी सोचा है कभी …?
अट्ठारह बरस की “मां” ने
तुम्हारे चौबीस बरस के पिता को
जब बरमाला पहनाई , तो मारे लाज से
दोहरी होकर गठरी बन , अपने वर को भी
नज़र उठाकर भी नही देखा..
तुमने तो कभी ये भी नही सोचा होगा, कि
तुम्हारे आने की दस्तक देती उस
प्रसव पीड़ा के उठने पर
कैसे दांतो पर दांत रख अस्पताल की चौखट पर गई होगी
क्या सोच सकते हो क्या कभी ..?
अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि
तुम्हे मानकर
अपनी सारी शैक्षणिक डिग्रियां
जिस संदूक में अखबार के पन्नो में
लपेटकर ताला बंद की थी
उस संदूक की चाभी आज तक उसने नही ढूंढी …
और तुम
उसके झुर्रिदार कांपते हाथों
क्षीण यादाश्त
कमजोर नज़र ,और झुकी हुई कमर को देखकर
उनसे कतराकर
खुद पर इतराते हो
ये बरसो का सफर है …!
तुम कभी सोच भी नही सकते# …!!
*मेरी दुनिया है माँ तेरे आँचल में*
“जब माँ नहीं रहतीं”

_ जब आप अपनी माँ को खोते हैं, तो आप उस इंसान को खोते हैं.. जिसने आपसे सबसे ज्यादा प्यार किया,
_ जो आपको सबसे अच्छे से जानता था और जिसने हमेशा आपको माफ़ किया.
_ वही थी जो आपके डर को मिटाती थी और जब आप खोए हुए महसूस करते थे तो वही आपको ढूँढ़ लेती थी.
_ जब आप अपनी माँ को खोते हैं, तो कोई आपको यह याद नहीं दिलाएगा कि अगर ठंड हो तो खुद को ठीक से ढक लो,
_ न ही कोई आपको हर दो घंटे में फोन करके यह पूछेगा कि आप ठीक हैं या नहीं.
_ जब आप गलती करते हैं, तो लोग गुस्सा होंगे और आपको माफी माँगनी होगी,
_ क्योंकि सिर्फ वही थी.. जिसने आपके बुरे स्वभाव को सहा और सबसे बुरे दिनों में भी आपसे प्यार किया.
_ आप उसे हर जन्मदिन, और हर अच्छे मौके पर याद करेंगे, जब आपको कोई अच्छी खबर मिलेगी, तो आप चाहेंगे कि आप उसे साझा कर सकें.
_ लेकिन आप महसूस करेंगे कि उसकी कुर्सी अब खाली है और वह कभी आपके पास नहीं होगी.
_ कुछ लोग आपको जानेंगे, लेकिन कोई भी उसे जैसे नहीं जान पाएगा.
_ बहुत से लोग आपसे प्यार करेंगे, लेकिन जैसे वह आपसे प्यार करती थी, वैसे कोई नहीं करेगा.
_ जब आप अपनी माँ को खोते हैं, तो दुनिया थोड़ी उदास, अजनबी और छोटी लगने लगेगी… और आप भी..!!

सुविचार – माता-पिता – माँ-बाप – 020

एक दूरदर्शी माता-पिता बनने के लिए, हमें खुद पर काम करते रहना होगा, हमेशा के लिए नया और बेहतर बनना होगा.

To be a visionary parent, we need to keep working on ourselves, becoming forever new and improved.

पिता और माँ बनना सिर्फ एक शारीरिक घटना नहीं है.

_ यह मन के भीतर घटित होने वाली घटना है.

_ अगर रब ने आपको माता-पिता बनने का मौका दिया है तो इसे एक जिम्मेदारी समझें और प्यार से निभाएं.

जिंदगी में दो लोगों का ख़याल रखना बहुत जरुरी है,

पिता जिसने तुम्हारी जीत के लिए सब कुछ हारा हो, _माँ जिसको तुमने हर दुःख में पुकारा हो.

अपने माँ-बाप का अपने कठोर शब्दों से कभी दिल मत दुखाना,

_ क्योंकि इस दुनिया में वही हैं, जो बिना किसी मतलब के आपसे प्यार करते हैं.!!

माता – पिता वो होते हैं –

_ ‘वो जिन्होंने अपने बच्चों के लिए अपने जीवन, आराम और सुख की परवाह नहीं की….

_ वो जो अपने बच्चों को unconditionally प्यार करते हैं …

_ वो जो बच्चों के बड़े हो जाने पर भी उतना ही लाड़ देते हैं जैसे कोई छोटे बच्चे को…

जब आपके माता-पिता संपन्न न होने के बावजूद भी, वे आपको सबसे अच्छा जीवन दे सकते हैं, तो उनकी सराहना करें..

_ शायद आप जितना जानते हैं, वे उससे ज़्यादा संघर्ष करते हैं..!!

आजकल माता-पिता अपने बच्चों से ज़्यादा उम्मीद नहीं करते..

_ वे दो वक्त के भोजन और ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर की मदद से संतुष्ट हो जाते हैं.!!

” नीचे गिरे सूखे पत्तों पर अदब से ही चलना ज़रा

कभी कड़ी धूप में तुमने इनसे ही पनाह माँगी थी।”

( These lines encourage to Respect Parents in their old age )

जब भी हाथ बढ़ाया उन्होंने थाम लिया, _ माँ बाप ने हर मुसीबतों में मेरा साथ दिया..
” जब आप अपनी माँ और बाप को देखते हैं, तो आप सबसे शुद्ध प्यार को देख रहे होते हैं _जिसे आप कभी नहीं जान पाएंगे.”
परिस्थितियाँ और आपके आस-पास के लोग बदल जाते हैं, खुशी की परिभाषा बदल जाती है,

– लेकिन जो आपको जोड़े रखते हैं ..वे आपके माता-पिता हैं और यही महत्वपूर्ण है.

पिता की गरीबी और माँ के पहनावे पर कभी शर्म मत करना..
माँ और पिता के रोल में बस इतना सा फर्क है,

माँ का रोल जीते जी समझ में आ जाता है, और पिता का रोल उनके चले जाने के बाद..

जो अपने बच्चों की भूख मिटाने के लिए खुद की भूख भूल जाए..
_ वो सिर्फ़ माता पिता ही हो सकते हैं.!!
सहानुभूति देने वाले हज़ार मिल जाएंगे…

साथ केवल वही देंगे जिन्होंने आपको पैदा किया है…!!

अपनी सफलता का रौब माता- पिता को मत दिखाओ,

उन्होंने अपनी जिन्दगी हार कर आपको जिताया हैं.

कुछ लोग जो हमारे अच्छे बुरे समय में भी हमारे साथ होते हैं

वो सिर्फ माँ बाप कहलाते हैं.

धूप में बाप और चूल्हे पर माँ जलती है,

तब कहीं जाकर औलाद पलती है…

मां के बिना सारा घर बिखर जाता है,

पर बाप के बिना पूरी जिंदगी ही बिखर जाती है.

थोड़ा सा छुप-छुप कर खुद के लिए भी जी लिया करो,,,

माँ – बाप के सिवा कोई नहीं कहेगा थक गए हो आराम कर लिया करो !!!!

माँ अपनी छाती से दूध पिला कर बच्चे को सींचती है

और पिता अपने खून और पसीने से बच्चों का लालन – पालन करता है.

कुछ समय माँ – बाप के साथ भी बिता कर जाओ तुम, _

_ कितने कीमती हो तुम उनके लिए, ज़रा ये भी तो देख कर जाओ तुम ..

इंसान की बर्बादी का वक़्त तब शुरू होता है, _ जब उसके मां – बाप

_ उसके गुस्से से डर कर अपनी “जरूरत” बताना या “नसीहत” देना छोड़ देते हैं.

माता पिता की नसीहत सबको बुरी लगती है,

मगर माता पिता की वसीयत सबको अच्छी लगती है.

माता – पिता उस मेडिकल स्टोर की तरह होते हैं,

जहां हमारी हर उदासी और दर्द की दवा मिलती है.

हम क्या उपहार दे सकते हैं, अपने माता पिता को ?

_ उन्होंने हमें जीवन दिया है, वह जीवन जिसका हम मनचाहा उपयोग करते हैं..!!

आप कितने भी बड़े व्यक्ति क्यों न बन जाएं, लेकिन

आप कभी पिता की, आपके पीछे मेहनत और माँ की ममता का अंदाजा नही लगा सकते.

उस चीज के बारे में कभी भी किसी से कोई शिकायत मत करना.. जो हमारे मां-बाप हमको नहीं दे सके क्योंकि….

_ उनसे जो संभव हुआ वो सब कुछ हमको दिया.!!

माता-पिता अपनी पूरी जिंदगी अपने बच्चों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए मेहनत करते हैं, ताकि भविष्य में उन्हें किसी परेशानी का सामना न करना पड़े.

_ ऐसे में वे अपने बच्चों को ज्यादा समय नहीं दे पाते.
_ जब वे अपने सारे काम निपटाकर फुर्सत पाते हैं और अपने बच्चों के साथ समय बिताना चाहते हैं, तो बच्चों के पास समय नहीं होता.
_ यही जीवन की विडम्बना है.
सुख भोगने का अधिकार बिन मांगे ले लेते हैं बच्चे लेकिन जिन माता पिता ने सुख के साधन जुटाए उनकी रोज मर्रा की जरूरत भी अहसान जता कर पूरी करते हैं.
मां- बाप के पास बैठने के दो फायदे हैं,

आप कभी बड़े नहीं होते और मां- बाप कभी बूढ़े नहीं होते.

बच्चों को पालने का सुख माता को मिलता है

और उनके जीवन को सही ढाँचे में ढालने का सुख पिता को.

दुनिया वाले एक गलती पर भी हमें पराया कर देते हैं,

लेकिन माँ बाप हमारी हज़ार गलतियों के बाद भी हमें अपना बना लेते हैं.

अपने माता – पिता से बहस ना करें, क्योंकि उनके जमाने के हिसाब से

उनकी बात भी सही है __ आपके जमाने के हिसाब से आप !

माँ बाप के अलावा दुनिया में कोई और आपको आगे बढ़ता हुआ नही देख सकते ;

_ बाकि लोग कभी न कभी तो जलन की भावना दिखा ही देते हैं !!

हर माता-पिता को सबसे बड़ी ख़ुशी तब मिलती है,

_ जब उनके बच्चे कोई उपलब्धि हासिल करते हैं तो ..उन्हें लगता है कि आज तक उन्होंने उनके लिए जो भी किया ..वह सफल हुआ,

_ यही उनकी सबसे बड़ी ख़ुशी होती है !!

चाहे बेटे-बेटियाँ कितने ही समर्थ हो जाएं, कितना ही अपने पैरों पर खड़े हो जाएं,

_ उन्हें भावात्मक आश्रय [emotional shelter] देने के लिए माता-पिता को हमेशा तैयार रहना चाहिए.
_ बेटे-बेटियों के जीवन में टूटने के बहुत अवसर आते हैं, माता-पिता का स्नेह-सहयोग न मिला तो उन्हें बिखरते देर नहीं लगती.
_ बेटा-बेटी कभी टूटे-बिखरे नहीं..
_ माता-पिता के घर और दिल के दरवाजे उसके लिए हमेशा खुले रहें.
_ जन्मदाता से बढ़ कर कौन ?
हर तूफान में अगर कोई छाया बनकर साथ खड़ा रहता है तो वो सिर्फ माँ-बाप होते हैं.. दुनिया तो बस तमाशा देखती है.!!
आजमा के देख लो सारे जमाने को, _

_ मां बाप के सिवा कोई और हमदर्द नहीं है..

बस यही फर्क है माँ और पिता में..

_पिता सीने पर पत्थर रखता है और माँ सीने में..!!

सहानुभूति देने वाले हज़ार मिल जाएंगे…

साथ केवल वही देंगे जिन्होंने आपको पैदा किया है…!!

अपनों के कर्ज उतारते उतारते याद आया,

एक माँ बाप ही हैं जो कभी हिसाब नहीं मांगते.

पंख क्या लगे की घोंसले से उड़ गए सभी..

माँ बाप फिर अकेले रह गये बच्चो को पाल कर…

माँ – बाप के अलावा इस दुनिया में कोई भी नहीं है, _ जो हमे समझते हैं और समझाते भी हैं…!!!
माता – पिता आपके सच्चे दोस्त हैं, जो बुरे तथा अच्छे दोनों वक्त में आपका साथ देते हैं.
नखरे तो सिर्फ माँ बाप उठाते हैं, लोग तो बस उंगलियाँ उठाते हैं.
मां बाप का औलाद के प्रति प्यार किसी मकसद से नहीं होता.
मां जमीं है तो पिता आसमां है

खुदा की नेमतों से रोशन ये जहां है.

मां के कदमों में जन्नत है तो

पिता उसका दरवाजा है.

माता- पिता साथ है जिसके

दुनिया में वह राजा है.

माँ अगर शीतल छाया है. पिता बरगद है जिसके नीचे बेटा- बेटी उन्मुक्त भाव से जीवन बिताते हैं.

माता अगर अपनी संतान के लिए हर दुःख उठाने को तैयार रहती है. तो पिता सारे जीवन उन्हें पीता ही रहता है.

हम तो बस उनके किये गए कार्यों को आगे बढ़ाकर अपने हित मे काम कर रहे हैं.

आखिर हमें भी तो अपने बच्चों से वही चाहिए ना ……..!

जब माता-पिता नहीं रहते हैं, तो सब कुछ बदल जाता है.

_ हम अब बच्चे नहीं रहते, हम उनके गले लगाने और उत्साहवर्धक शब्दों से बहकते नहीं हैं.
_ लेकिन अब ऐसा लगता है जैसे जीवन कठिन हो रहा है, क्योंकि उनकी सुरक्षा देनेवाली ममता अब हमारे पास नहीं है.
_ जब माता-पिता हमारे बीच नहीं रहते, हम अनाथ हो जाते हैं, और यह बहुत कठिन है, चाहे हम कितने भी बड़े क्यों न हो जाएं.
_ हालांकि आपने अपना परिवार बना लिया हो, लेकिन आपके माता-पिता का चेहरा हमेशा आपके भीतर अमिट रूप से बसा रहता है.
_ हर व्यक्ति, चाहे वह बड़ा हो या बच्चा, अंदर एक जीवित बच्चा होता है, जो हमेशा अपने माता-पिता द्वारा सुरक्षा चाहता है.
_जब भी जरूरत हो, उनके बिना शर्त प्रेम की तलाश करता है, लेकिन जब वे हमारे बीच नहीं रहते, तब यह विकल्प अब मौजूद नहीं रहता…!!!
हम अपना जन्म स्थान और जन्मदाता नहीं चुन सकते.

_ हम भारत में पैदा हुए, युगांडा या अमेरिका में भी पैदा हो सकते थे.
_ हम गरीब माँ-बाप के घर पैदा हुए, किसी अमीर या किसी फ़क़ीर के घर भी पैदा हो सकते थे.
_ बात तो तब है जब हम अपनी जड़ों पर गर्व करते हुए अपनी नियति को बदल दें और उन ऊँचाइयों पर पहुँचें,
_ जहाँ पहुँच कर हमें संतुष्टि मिले तथा हमारे देश व जन्मदाता का नाम भी रोशन हो.!!
देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..

सुबह की सैर में कभी चक्कर खा जाते है ..

सारे मौहल्ले को पता है…पर हमसे छुपाते है

दिन प्रतिदिन अपनी खुराक घटाते हैं और

तबियत ठीक होने की बात फ़ोन पे बताते है.

ढीली हो गए कपड़ों को टाइट करवाते है,

देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..

किसी के देहांत की खबर सुन कर घबराते है,

और अपने परहेजों की संख्या बढ़ाते है,

हमारे मोटापे पे हिदायतों के ढेर लगाते है,

“रोज की वर्जिश”के फायदे गिनाते है.

‘तंदुरुस्ती हज़ार नियामत “हर दफे बताते है,

देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..

हर साल बड़े शौक से अपने बैंक जाते है,

अपने जिन्दा होने का सबूत देकर हर्षाते है,

जरा सी बढी पेंशन पर फूले नहीं समाते है,

और FIXED DEPOSIT रिन्यू करते जाते है,

खुद के लिए नहीं हमारे लिए ही बचाते है.

देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..

चीज़ें रख के अब अक्सर भूल जाते है,

फिर उन्हें ढूँढने में सारा घर सर पे उठाते है,

और एक दूसरे को बात बात में हड़काते है,

पर एक दूजे से अलग भी नहीं रह पाते है.

एक ही किस्से को बार बार दोहराते है,

देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..

चश्में से भी अब ठीक से नहीं देख पाते है,

बीमारी में दवा लेने में नखरे दिखाते है,

एलोपैथी के बहुत सारे साइड इफ़ेक्ट बताते है,

और होमियोपैथी/आयुर्वेदिक की ही रट लगाते है,

ज़रूरी ऑपरेशन को भी और आगे टलवाते है.

देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..

उड़द की दाल अब नहीं पचा पाते है,

लौकी तुरई और धुली मूंगदाल ही अधिकतर खाते है,

दांतों में अटके खाने को तिली से खुजलाते हैं,

पर डेंटिस्ट के पास जाने से कतराते हैं,

“काम चल तो रहा है” की ही धुन लगाते है.

देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..

हर त्यौहार पर हमारे आने की बाट देखते है,

अपने पुराने घर को नई दुल्हन सा चमकाते है,

हमारी पसंदीदा चीजों के ढेर लगाते है,

हर छोटी बड़ी फरमाईश पूरी करने के लिए,

माँ रसोई और पापा बाजार दौडे चले जाते है.

पोते-पोतियों से मिलने को कितने आंसू टपकाते है,

देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते है..

देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते है..

संघर्ष पिता से सीखें, संस्कार माँ से सीखें

बाकी सब कुछ दुनिया सिखा देगी !

ऐसा नहीं है कि हमारे माता-पिता हमें कभी कुछ नहीं कहते _या वे हमपे कभी क्रोधित नहीं होते, _ लेकिन उनके गुस्से के बाद उनका प्यार भी उमड़ता है.

_बाकी दुनिया सबकुछ करती है _बस प्यार ही नहीं करती _लेकिन बदले में कर्तव्यों का पहाड़ जरूर सर पर लाद देती है.

दुनिया के हर मॉं – बाप को चाहिए कि वह अपने बच्चों को समझाने, डांटने, शिक्षा देने या कोई राय देने से पहले अपने जीवन में झांक लें कि, क्या वो वाकई जीवन में सफल हैं ? कहीं ऐसा तो नहीं कि बच्चा उनकी उंगली पकड़े बगैर स्वयं के निर्णयों व स्वतंत्रता के दम पर ही उनसे आगे निकलने की संभावना रखता हो.

Before teaching, scolding, advising or giving opinion to children, every parent of the world should look deep into their lives and question themselves, are they really successful in their life? Is it not possible that a child, without holding the hand of his parents, has the potential to surpass them purely on the basis of his own decisions and freedom ?

दुनिया के हर माँ- बाप को चाहिए की अपने सड़े हुए बदबूदार अतीत को अपने बच्चों को विरासत के रूप में न दें.

बच्चों का अपना भविष्य है, _ उन्हें उनके अनुरूप बढ़ने दें, _ प्रकृति हमसे कहीं अधिक बुद्धिमान है.!!

Don’t give your rotten stinking pasts as an inheritance to your children. Children have their own future. Let them grow in their accord Nature is much more intelligent than we ever can be.

सच पूछिए तो अधिकतर बच्चे माता-पिता के प्रति संवेदनशील नहीं होते.

_ वे माता- पिता के महत्व को नहीं समझते कि ..यदि उन्हें दुनिया में लाया ही नहीं जाता तो ?
_ कुछ बच्चे रब से माँग कर, मिन्नतें करके लिए जाते हैं, इस दुनिया में आने के बाद लड़-झगड़ कर अपने पास रखे जाते हैं.
_ लेकिन ज़्यादातर बच्चे इस बात को नहीं समझते.
_ आज के माँ-पिता कोख का हवाला देकर बच्चों को अपनी ओर नहीं कर सकते.
_ बच्चे अपने मन से ही माता-पिता को उचित सम्मान दें, यह भाग्य की बात है या ये बच्चों की अपनी समझ पर निर्भर करता है.
माता –पिता अपने बच्चों की ख़ुशी के लिए न जाने किन–किन चीजों का त्याग कर देते हैं,

_ पर बच्चे भी क्या मां बाप के लिए उतना समर्पण और त्याग कर पाते हैं,
_ क्या बच्चे उन जिम्मेदारी को पूरा कर पाते हैं जो उन्हें पूरा करना चाहिए..??
_ शायद नहीं..!!
_ आज के समय में बच्चों को अपने मोबाइल से ही फुर्सत नहीं मिलती,
_ अधिकांश समय तो बाबू सोना करते समय निकल जाता है,
_ अपने मां बाप के लिए उन्हें कुछ सोचने का समय ही कहा मिलता है…!!!!
–Geerisha
हम जिन बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर भेजते हैं या अपने से दूर करते हैं, यह देखना भी हमारे लिए बहुत ज़रूरी है कि _वह शिक्षा उनको बेहतर इंसान बना रही है _या और संवेदनहीनता की तरफ़ ले जा रही है.
बहुत बार देखते हैं जीवन की सन्ध्या बेला में बच्चों की लाख मिन्नत चिरौरी के बावजूद माँ – बाप अपना घर गांव शहर छोड़कर जाना नहीं चाहते..

_ वो अपनी भावनात्मक जड़ों से कट कर बिलखने लगते हैं..

_’हाँ’ शारीरिक शिथिलता अन्य मजबूरी से ही वो दिल पर पत्थर रख उस स्थान को छोड़ पाते हैं.

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