सुविचार – बेटी – बेटियां – लड़की – 024
When you educate a girl, you begin to change the face of a nation. – Oprah Winfrey
_ताकि वे अपना भविष्य संवार सकें.!!
When the controller of nature wants to talk to us, he reincarnated in our house in the form of a girl child, but how are we able to know and understand the subtle thing.
थक जाने पर प्यार से जो माथा सहलाए, उसे कहते हैं बिटिया
“कल दिला देंगे” कहने पर जो मान जाये, उसे कहते हैं बिटिया
हर रोज़ समय पर दवा की जो याद दिलाये, उसे कहते हैं बिटिया
घर को मन से फूल सा जो सजाये, उसे कहते हैं बिटिया
सहते हुए भी अपने दुख जो छुपा जाये, उसे कहते हैं बिटिया
दूर जाने पर जो बहुत रुलाये, उसे कहते हैं बिटिया
पति की होकर भी पिता को जो ना भूल पाये, उसे कहते हैं बिटिया
मीलों दूर होकर भी पास होने का जो एहसास दिलाये, उसे कहते हैं बिटिया
“अनमोल हीरा” जो इसीलिए कहलाये, उसे कहते हैं बिटिया.
“नाज़ुक” सा “दिल” रखती है “मासूम” सी होती है “बेटिया”.
“बात” बात पर रोती है “नादान” सी होती है “बेटिया”.
“रेहमत” से “भरपूर” “खुदा” की “Nemat” है “बेटिया”.
“घर” महक उठता है जब “मुस्कराती” हैं “बेटिया”.
“अजीब” सी “तकलीफ” होती है, जब “दूसरे” घर जाती है “बेटियां”.
“घर” लगता है सूना सूना “कितना” रुला के “जाती” है “बेटियां”
“ख़ुशी” की “झलक” “बाबुल” की “लाड़ली” होती है “बेटियां”
ये “हम” नहीं “कहते” यह तो “रब ” कहता है.
क़े जब मैं बहुत खुश होता हूँ तो “जनम” लेती है
“प्यारी सी बेटियां”
बसेरा होगा कल मेरा किसी और के आँगन में,
क्यों ये रीत “रब” ने बनाई होगी,
“कहते” है आज नहीं तो कल तू “पराई” होगी,
“देके” जनम “पाल-पोसकर” जिसने हमें बड़ा किया,
और “वक़्त” आया तो उन्ही हाथो ने हमें “विदा” किया,
“टूट” के बिखर जाती है हमारी “ज़िन्दगी ” वही,
पर फिर भी उस “बंधन” में प्यार मिले “ज़रूरी” तो नहीं,
क्यों “रिश्ता” हमारा इतना “अजीब” होता है,
क्या बस यही “बेटियो” का “नसीब” होता है ??
~~~~ ..बेटियाँ….पीहर आती है..
..अपनी जड़ों को सींचने के लिए..
..तलाशने आती हैं भाई की खुशियाँ..
..वे ढूँढने आती हैं अपना सलोना बचपन..
..वे रखने आतीं हैं….आँगन में स्नेह का दीपक..
..बेटियाँ कुछ लेने नहीं आती हैं पीहर..
..बेटियाँ….ताबीज बांधने आती हैं दरवाजे पर..
..कि नज़र से बचा रहे घर..
..वे नहाने आती हैं ममता की निर्झरनी में..
..देने आती हैं अपने भीतर से थोड़ा-थोड़ा सबको..
..बेटियाँ कुछ लेने नहीं आती हैं पीहर..
.बेटियाँ….जब भी लौटती हैं ससुराल..
..बहुत सारा वहीं छोड़ जाती हैं..
..तैरती रह जाती हैं….घर भर की नम आँखों में..
..उनकी प्यारी मुस्कान..
..जब भी आती हैं वे, लुटाने ही आती हैं अपना वैभव..
..बेटियाँ कुछ लेने नहीं आती हैं पीहर..
बिटिया तेरी बहुत याद आयेगी,
पल पल मुझको रुलायेगी।
घर का कोना कोना तुझे पुकारेगा,
कण कण में तेरा चेहरा मुस्करायेगा।
क्या तूने जादु कर रखा था,
जन जन को मोह रखा था।
तुझे टीका लगाते लगाते, मम्मी की भी,
आँखें डबडबाई थी,
मम्मी की रोके नहीं रुकती रुलाई थी।
तुम माँ बेटी हो या सखी सहेली,
मेंरी समझ में कभी ये बात ना आयी।
किचन का menu तेरा, घर का सबका
Dress code था तुम्हारा,
मम्मी कौन सा पार्लर जायेगी,
पापा कहाँ हेयर कलर करायेंगे,
कौन सी साड़ी, कौन सी बिंदी,
कौन सी क्रीम मम्मी लगायेगी,?
पापा की कैसी ड्रेस आयेगी,
कब कौन सा क्या पहनना है ?
सबमें मर्जी तुम्हारी थी,
मम्मी की सारी जिम्मेदारी,
तेरे ही हवाले थी।
कलेजा मेरा फटता है,
कैसे गुजरेंगे दिन तेरे बिन,
ये सोच कर भी दिल फटता है।
आज है मेहन्दी तुम्हारी,
कल फिर जाने की तैयारी,
परसों तुम्हारा गठबंधन, फिर कन्यादान होगा।
सृष्टि के नियम के मुताबिक,
अपने कलेजे के टुकड़े को फिर,
एक बाप, अपने कलेजे से दूर कर देगा।
अब तेरी यादों का ही सहारा होगा,
हर चीज में अक्स तुम्हारा होगा,
भाई तेरा समय से पहले बड़ा हो गया,
मुझसे गम छुपाता है, मेरे सामने बस,
झूठे ही मुस्कराता है,
मुझे मालूम है उस पर भी पहाड़ टूट रहा है,
ऊपर से हँस रहा अन्दर से वो रो रहा है,
तुझे आशीर्वाद है हमारा,
तेरा जीवन सदा हो उजियारा,
हमेशा हँसती हँसाती रहना,
जिस घर जाओ, मन्दिर कर देना,
बड़ों को आदर, छोटों को प्रेम देना ।।
|| पीके ||
बेटी है पराया धन,
ये तुझे भी पता था, माँ
दूर नहीं, तेरे पास हूँ माँ,
तेरे घर के कण कण में ,
मेरा निवास है माँ,
दूर होती तो कैसे में रोज़,
तुझसे बात कर पाती माँ,
तुम मेरे लिए आँसू ना बहाना,
मना लेना दिल को,
पापा को भी समझाना,
कैसे रो रहे थे लिपट कर,
हम बच्चों से भी
छोटा बच्चा बन कर,
टूट ना जाना, उनको हिम्मत बंधाना,
चिरिया थी तेरे घर की
चहक रही थी कोने कोने में,
मुझको तो उड़ना ही लिखा था,
रब ने मेरी किस्मत में, माँ .
किसने ये रीत बनाई,
प्रीत वही, पर बेटी परायी,
अब ना तुझसे झगड़ा करुँगी,
ना अब रूठी को मनाना, माँ,
स्कूल से लौटने में अब कभी,
देर ना होगी माँ,
कपड़ो के लिए अब ना रूठना ,
अब ना तेरा मनाना होगा माँ,
वो मेरी सारी कास्मेटिक,
जिसके लिए में नीत तुझसे,
लड़ती थी माँ,
अब तुम ही रख लेना,
किसी को न देना, माँ,
अब जब भी मेरी डिश बनाओगी,
तुम खा लेना, पापा और भाई को,
खिला देना माँ,
भाई को देखा माँ,
कैसे भैया बनकर मेरे,
मेरे माथे को चूम लिया,
लगा जैसे मुझको सुखी होने का,
आशीर्वाद दिया,
कितना बड़ा हो गया है,
फिर भी वो बच्चा है,
उसको मना लेना, कलेजे से लगा लेना,
तुमको गम कैसा, माँ,
एक घर से निकल कर,
और एक घर मिल गया,
यहाँ भी पापा का साया,
और माँ का आँचल मिल गया,
वहाँ घर की चिरिया थी,
यहाँ मै बुलबुल हूँ,
सबका आशीर्वाद है माँ,
बहुत ही प्यार करनेवाला,
हमसफ़र साथ है माँ …
..PK
शाम हो गई अभी तो घुमने चलो न पापा,
चलते चलते थक गई कंधे पे बिठा लो न पापा,
अंधेरे से डर लगता सीने से लगा लो न पापा,
मम्मी तो सो गई,
आप ही थपकी देकर सुलाओ न पापा,
स्कूल तो पूरी हो गई,
अब कॉलेज जाने दो न पापा,
पाल पोस कर बड़ा किया,
अब जुदा तो मत करो न पापा,
अब डोली में बिठा ही दिया तो,
आंसू तो मत बहाओ न पापा,
आप ने मेरी हर बात मानी,
एक बात और मान जाओ न पापा,
इस धरती पर बोझ नहीं मै,
दुनियाँ को समझाओ न पापा,
” मै बोझ नहीं हूँ “
वह फूल है, उसे कभी रुलाना नहीं
पिता का तो गुमान होती है बेटी
जिन्दा होने की पहचान होती है बेटी
उसकी आँखें कभी नम न होने देना
उसकी जिन्दगी से कभी खुशियां कम न होने देना
उंगली पकड़ कर कल जिसको चलाया था तुमने
फ़िर उसको ही डोली में बिठाया था तुमने
बहुत छोटा सा सफर होता है बेटी के साथ
बहुत कम वक्त के लिए वह होती हमारे पास
असीम दुलार पाने की हकदार है बेटी
समझो रब का आशीर्वाद है बेटी
मैं नहीं मानता इसे,
क्योंकि मेरी बेटी कोई चीज़ नहीं, जिसको दान में दे दूँ ;
मैं बांधता हूँ बेटी तुम्हें एक पवित्र बंधन में,
पति के साथ मिलकर निभाना तुम,
मैं तुम्हें अलविदा नहीं कह रहा,
आज से तुम्हारे दो घर, जब जी चाहे आना तुम,
जहाँ जा रही हो, खूब प्यार बरसाना तुम,
सब को अपना बनाना तुम, पर कभी भी
न मर मर के जीना, न जी जी के मरना तुम,
तुम अन्नपूर्णा, शक्ति, रति सब तुम,
ज़िंदगी को भरपूर जीना तुम,
न तुम बेचारी, न अबला,
खुद को असहाय कभी न समझना तुम,
मैं दान नहीं कर रहा तुम्हें,
मोहब्बत के एक और बंधन में बाँध रहा हूँ,
उसे बखूबी निभाना तुम ……………..
*एक नयी सोच एक नयी पहल*सभी बेटियां के लिए ;
🌿➖बोये जाते हैं बेटे..
🌿➖पर उग जाती हैं बेटियाँ..
🌿➖खाद पानी बेटों को..
🌿➖पर लहराती हैं बेटियां.
🌿➖स्कूल जाते हैं बेटे..
🌿➖पर पढ़ जाती हैं बेटियां..
🌿➖मेहनत करते हैं बेटे..
🌿➖पर अव्वल आती हैं बेटियां..
🌿➖रुलाते हैं जब खूब बेटे.
🌿➖तब हंसाती हैं बेटियां.
🌿➖नाम करें न करें बेटे..
🌿➖पर नाम कमाती हैं बेटियां..
🌿➖जब दर्द देते हैं बेटे…
🌿➖तब मरहम लगाती हैं बेटियां..
🌿छोड़ जाते हैं जब बेटे..
🌿तो काम आती हैं बेटियां..
🌿आशा रहती है बेटों से.
🌿 पर पूर्ण करती हैं बेटियां..
🌿हजारों फरमाइश से भरे हैं बेटे….
🌿पर समय की नज़ाकत को समझती बेटियां..
🌿बेटी को चांद जैसा मत बनाओ कि हर कोई घूर घूर कर देखे..
📍लेकिन📍 ———————– बेटी को सूरज जैसा बनाओ
ताकि घूरने से पहले सब की नजर झुक जाये..
पर जैसे ही पिता मरता है और बेटी आती है तो वो इतनी चीत्कार करके रोती है कि, सारे रिश्तेदार समझ जाते है कि बेटी आ गई है.
सुविचार – बेटा – लड़का -लड़के – 023
_ ये अब अंदर से रोता है बाहरी मुस्कान लिए…!!
_ आधे से ज्यादा सपने तो दूसरों के पूरे करने पड़ते हैं..!!
_ आजकल ढूंढता रहता है खुद को “ज़माने भर में..”
_ घर बनाने के लिए अपना घर ही छोड़ देते हैं..!!
_ कोई सैलरी को पूछता है तो कोई काम पूछता है..!!
_ मैं लड़का हूं अगर रोया तो मेरी तौहीन होगी_
_ वो बस चुपचाप बैठे रहते हैं चाय की दुकानों पर घंटो तक.!!
_ हम लड़के कितनी भी कोशिशें कर लें, वो पूरी नही पड़ती और उस पे ये बोझ रहता है कि हम बता नही पाते कि ..हमने बहुत चाहा मगर कर कुछ ना सके,
_क्योंकि हम जानते है कि दुनिया परिणाम देखती है, कोशिशें नही…!
*कोई नौकरी का पूछता है कोई सैलरी का पूछता है !!
_ कोई सैलरी को पूछता है तो कोई काम पूछता है.!!
_ लड़कों को बस सीने से लगाइए, वो हर जंग जीत जाएंगे.!!
_ लेकिन बहुत सी बातें उसके अंदर ही अंदर हलचल मचाती रहती हैं और भीतर बहुत कुछ उमड़ता घुमड़ता रहता है.
सुविचार – पिता – बाप – पापा – 022
पिता के ऐसा करने की दार्शनिक व्याख्या है कि “हर पिता अपनी संतान को अपनी दुनिया से ’बड़ी दुनिया’ दिखाना चाहता है, और इसके लिए आवश्यक ’सहारा’ और ’त्याग’ भी करता है.
लेकिन इसके लिए जरूरी है कि “पिता को पता होना चाहिए कि ’मुझसे बड़ी दुनिया’ है, जिसे वह स्वयं नहीं देख सकता या देख सका, लेकिन उसकी संतान के पास वो ’दृष्टि’ (vision) है, यह विश्वास भी होना चाहिए.
_ और दिल में पाव भर का भरोसा कि “जो होगा ठीक ही होगा”; वही बाप है..
_ सब कुछ ठीक ठाक होने के लिए.!!
_ आप को अहसास होगा कि यह आदमी बहुत कुछ पाने का हक़दार है..!!
मेरे बच्चे मुझसे भी ज्यादा कामयाब हों.
_ जहाँ वो पांव रखना भी पसंद नहीं करता है !!
कितना प्यार करता है तुम्हें, ये कभी जताएगा नहीं,
जिम्मेदारियों को उससे अच्छे से, और कोई निभाएगा नहीं,
पिता से महान शख्स इस जन्म में, तुम्हें कभी मिल पाएगा नहीं ..
हम पर आने से पहले दुःख पापा आप सह लेते हो,,,,,
_ सिर्फ एक ही इंसान होते हैं और वो आपके पिता होते हैं.
_ उसी पिता के कई ” सपने ” बुढ़ापे में ” लावारिस ” हो जाते हैं !!
_ उन्हें सबसे ज्यादा चिंता किस बात की है, ये अक्सर अनकहा रह जाता है.!!
_एक ऐसा फरिश्ता देखा हैं मैंने पिता के रुप में !!
_ पर बिन कहे हमारी हर ज़रूरत पिता निभा देता है ..
_ औलाद पालने मे अपना पूरा जीवन जला देता है..!!
_ कंधा बाप का है साहेब बड़ा मज़बूत होता है..
_ सर पर साया जब तलक पिता का होता है.
_बाप है मियां, परेशानी मेँ भी हंसता बहुत है..
उसके न रहने पर उसके बच्चों का क्या होगा.
किसी शख़्स के वजूद की ” पिता ” ही पहली पहचान है.
सिर्फ़ अपनी औलाद की खुशी खरीदने के लिए..
_ जब अपने पे आई तो, रोटी ठंडी और मकान किराए का मिला.!!
_ जहाँ तक पहुँचने के लिए उसने अपना पूरा जीवन खपा दिया.!!
_ वो शर्म खो देते है तुम्हारी अच्छी ज़िंदगी बनाने के लिए…
_ लेकिन हर मोड़ पर सबसे पहले वही साथ खड़ा मिलता है.!!
_ गहराई होती बहुत है लेकिन दिखाई नहीं देती..
खुद लाठी टेकने लगता है, मगर आपको अपने पाँव पर खड़ा कर जाता है..
अगर बाप जिंदा हो तो एक काँटा भी नहीं चुभने देता…!!
सूरज गर्म जरूर होता है लेकिन अगर न हो तो अंधेरा छा जाता है.
सिर्फ एक दिन अंगूठे बिना सिर्फ उंगलियों से अपने सारे काम करके देखें,
“पिता की कीमत पता चल जाएगी”
_ उसी पिता के कई सपने बुढ़ापे में लावारिस हो जाते हैं.
और उनके चले जाने से अक्सर घर पर वीरान हवाओं की एक लहर आ जाती है !!
_ वे एक इस तरह के व्यक्ति हैं जो जीवन में आपका समर्थन करेंगे और आपको ताकत देंगे.
_ और जब तक औलाद को समझ में आता है, तब तक बाप रहता नहीं !!
_ एक ” पिता ” अपनी सारी उम्र गुज़ार देता है !!
जो तमाम उम्र…अपने परिवार की जिम्मेदारी को उठता है…
_ क्योंकि दोनों सोचते हैं, दूसरे समझ नहीं पाएंगे.!!
-“मैं जलूंगा तो मेरे घर में रोशनी होगी”
_ हर लड़के का हौसला सौ गुना बढ़ा देता है.
खुशियां सबकी मांगता, बन कर पिता फ़कीर ..
_ बस इसी की वजह से हमारे घर में उजाले हैं ..
शान से जीना सिखाया जिसने, “पापा” उनका नाम है।।
पिता रूह की ठंडक, पिता ज़िंदगी का साज़ है..!!
_ इनके रहते किसी बात की चिंता नहीं करनी पड़ती..!!
जिसके लिए वो झुकता भी है और टूटता भी है.
पिता के घुटने इसी में जवाब दे गये.
पिता से मां की बिंदी और सुहाग है.
वो तो फ़िक्रमन्द है आकाश में बाज़ बहुत हैं.
_ पिता अपने बच्चों से भले ज्यादा बातें न करे, पर वो उन्हें चाहता बहोत है..!!
_ लेकिन बच्चे पिता के साथ धीमा नहीं चल सकते..!!
_ एक समय के बाद पिता बिना कुछ कहे कमरे में झाँक कर आगे बढ़ जाते हैं, किसी भी चीज में ज़बरदस्ती नहीं करते..!!
One father is more than a hundred schoolmasters. – George Herbert
_ उसकी एक बूंद नहीं पड़ने देते हैं वो..
_ दिन-रात बचत में लगे रहता है कि आगे उनके लिए कुछ छोड़ कर जाना है..!!
_ जैसे यही अब उसका एकमात्र लक्ष्य रह गया हो..!!
जिसके पसीने की एक बूंद की कीमत भी औलाद अदा नहीं कर सकती.
पिता अपने मन की आँखों से भी पुत्र जो देख रहा होता है, उसे देखने की कोशिश करता है.
बुढ़ापे में पिता- पुत्र के पास बैठकर अधिक सुख पाता है.
ऐसा होता है “पिता”
_ सुना है बाप जिंदा हो तो कांटे भी नही चुभते..
पर पिता से ज्यादा प्यार कोई नहीं करता..
अपने बच्चे की ख्वाइश पूरी करने के लिए जी जान लगा देता है.
खिलौनों की ज़िद में एक बच्चा ही नहीं रोता है,_ न दिला पाने की मज़बूरी में उसका बाप भी रोता है.
यह सब पिता की दुआओं और आशीषों का असर है,
कि धरती फ़तेह करने निकले हैं हम और कदमों में हमारे आसमाँ झुकता है.
” जो किरदार बाप पूरी जिंदगी निभाता है “
_ पिता से महान इंसान भला कहां कोई और होता है ..
_ मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा नहीं होने देते ..!!
अगर बाप जिंदा हो तो, एक कंकड़ भी नही चुभता….
एक फरिश्ता देखा है मैंने, अपने पापा के रूप में..
जिसके पास ये है_वह सबसे अमीर है..
कहने को सब ऊपर वाला देता है
पर खुदा का ही एक रूप_ _ पिता का शरीर है.
जिंदगी को तरस के खुदा ने ये तस्वीर बनाई है,
हर दुख वो बच्चों का खुद पर सह लेते हैं,
उस खुदा की जीवित प्रतिमा को हम पिता कहते हैं..
पिता सृष्टि के निर्माण की अभिव्यक्ति है.
पिता अंगुली पकड़े बच्चे का सहारा है,
पिता कभी कुछ खट्टा कभी खारा है.
पिता पालन है, पोषण है, परिवार का अनुशासन है.
पिता धौंस से चलाने वाला, प्रेम का प्रशासन है.
पिता रोटी है, कपड़ा है, मकान है,
पिता छोटे से परिन्दे का बड़ा आसमान है.
पिता अप्रदर्शित अनन्त प्यार है,
पिता है तो बच्चों को इन्तजार है.
पिता से ही बच्चों के ढेर सारे सपने हैं,
पिता है तो बाजार के सब खिलौने अपने हैं.
पिता से परिवार में हर पल राग है,
पिता से ही माँ की बिंदी और सुहाग है.
पिता अपनी इच्छाओं का हनन और परिवार की पूर्ति है,
पिता रक्त में दिये हुए संस्कारों की मूर्ति है.
पिता एक जीवन का, जीवन को दान है,
पिता दुनिया दिखाने का अहसान है.
पिता सुरछा है अगर सिर पर हाथ है,
पिता नहीं तो बचपन अनाथ है.
वो पिता👤 ही होता है
जो अपने बच्चो👦 को अच्छे
विद्यालय में पढ़ाने के लिए
दौड🏃भाग करता है…
उधार लाकर donation भरता
है, जरूरत पड़ी तो किसी के भी
हाथ🙏 पैर भी पड़ता है
……. वो पिता👤 होता है ।।
हर कॉलेज🏬 में साथ👥साथ
घूमता है, बच्चे के रहने के
लिए होस्टल🏨 ढुँढता है…
स्वतः फटे कपडे पहनता है
और बच्चे के लिए नयी जीन्स👖
टी-शर्ट👕 लाता है
………. वो पिता👤 होता है ।।
खुद खटारा फोन📞 चलाता है पर
बच्चे के लिए स्मार्ट📱 फोन लाता है…
बच्चे की एक आवाज सुनने के
लिए, उसके फोन में पैसा💰 भराता है
……. वो पिता👤 होता है ।
बच्चे के प्रेम विवाह के निर्णय पर
वो नाराज़😔 होता है और गुस्से
में कहता है सब ठीक से देख
लिया है ना, “आप कुछ
समझते भी हैं ?” यह सुन कर
बहुत रोता😢 है
…….वो पिता👤 होता है ।।
बेटी की विदाई पर दिल की
गहराई से रोता😭 है,
मेरी बेटी का ख्याल रखना हाथ
जोड़👏 कर कहता है
……… वो पिता👤 होता है ।।
पिता का प्यार दिखता नहीं है
सिर्फ महसूस किया जाता है।
वो पिता👤 ही होता है.
मेरी ताकत मेरी पूँजी मेरी पहचान है पिता,
घर की इक- इक ईंट में शामिल उनका खून- पसीना,
सारे घर की रौनक उनसे सारे घर की शान पिता,
मेरी इज्जत मेरी शोहरत मेरा रुतबा मेरा मान है पिता,
मुझको हिम्मत देने वाले मेरा अभिमान है पिता,
सारे रिश्ते उनके दम से सारे नाते उनसे है,
सारे घर के दिल की धड़कन सारे घर की जान पिता,
शायद रब ने देकर भेजा फल ये अच्छे कर्मों का,
उसकी रहमत उसकी नैमत उसका है वरदान पिता.
जब मेरे कंधे पे खड़ा हो गया
मुझी से कहने लगा
देखो पापा मैं तुमसे बड़ा हो गया
मैंने कहा, बेटा इस खूबसूरत
ग़लतफ़हमी में भले ही जकड़े रहना
मगर मेरा हाथ पकड़े रखना
जिस दिन यह हाथ छूट जाएगा
बेटा तेरा रंगीन सपना भी टूट जाएगा
दुनिया वास्तव में उतनी हसीन नहीं है
देख तेरे पाँव तले अभी जमीं नहीं है
मैं तो बाप हूँ बेटा बहुत खुश हो जाऊंगा
जिस दिन तू वास्तव में मुझसे बड़ा हो जाएगा
मगर बेटे कंधे पे नहीं…
जब तू जमीन पे खड़ा हो जाएगा
ये बाप तुझे अपना सब कुछ दे जाएगा
और तेरे कंधे पर दुनिया से चला जाएगा.
जो अपने सुख भूल जाते हैं।
जो जीवन भर कर्ज़ चुकाते हैं,
वो पापा ही तो हैं जो हर फर्ज़ निभाते हैं।
अपनी बेटी के चेहरे पर ख़ुशी देख
जो चेहरे पर मुस्कान लाते हैं,
वो पापा ही तो हैं जो हर पल साथ निभाते हैं ।
जब बेटा प्रणाम करता है,
वो पापा ही तो हैं जिन्हें सुख प्राप्त होता है।
हर पल जो अपने चेहरे पर मुस्कान रखे हुए रहते,
अपने दुख को कभी अपने चेहरे पर नहीं लाने देते,
वो पापा ही तो हैं जो बेटी की बिदाई पर आँखों में सुकून के आँसू लाते हैं।
जो बिना दिखाए भी इतना प्यार करते हैं
वो पापा ही तो है जो हमारी पहचान बनते हैं।
Written by – Ashvini Vyas
पिता की जेब में आये सिक्के, पिता ने आधे दे दिये
फिर एक दिन दुःख आए, पिता ने पूरे रख लिए
जब दुःख बांटने का समय आता है, सारे पिता स्वार्थी हो जाते हैं
तुम और मैं पति पत्नी थे, तुम माँ बन गईं मैं पिता रह गया।
सारे जहान की खुशियाँ आप पर कुर्बान करता हूँ
अपनी सारी कमाई आपने मुझे पर लगा दी है
आपने अपने लिए कहाँ आराम की ज़िन्दगी जी है
अनगिनत कुर्बानी आपने मेरे लिए दी है
बिन कहे ही मेरी हर ज़रूरत पूरी की है
आप मेरी ज़िन्दगी का नूर हो
आप मेरी ज़िन्दगी का ग़ुरूर हो
आप मेरे हर दुःख को हर लेते हो
सारे सुख मेरे आगे कर देते हो
आपसे मुझे इतना प्यार है
जान मेरी आपके लिए निसार है
दुःख आप अपना मुझे बताते नहीं हो
ख़ुद सहते हो मुझे एहसास कराते नहीं हो
हर मुश्किल में आप मेरा साथ निभाते रहे हो
ख़ुद दुःख में होने पर भी आप मुस्कुराते रहे हो
सब धन-दौलत आपके आगे व्यर्थ है
आप हो तभी मेरी ज़िन्दगी स्वर्ग है
मैं हूँ आपका अंश अभी ये भी तो आपको दिखाना है
गले लगा कर आप को अभी प्यार अपना जाताना है..
~ Imtarun
खुद के लिए बूँद नही पानी की,
मेरे लिए समुंदर ही लाते हैं पापा,
ख्वाहिशों के जाहिर होने से पहले,
मेरी गोद तक सब पहुँचाते हैं पापा,
उँगलियाँ पकड़ कर चलना सिखाते हैं पापा,
काँधे पर बिठा कर मेला घुमाते हैं पापा,
रात को जगाकर खुद हाँथ से खिलाते हैं पापा,
गोद मे सुलाकर घंटों कहानियाँ सुनाते हैं पापा,
अच्छा बुरा रास्ता सब बताते हैं पापा,
रूठ कर भी मुझसे मुझको मनाते हैं पापा,
कोई फर्ज से पहले अपना फर्ज निभाते हैं पापा,
खुद दर्द मे भी रहकर मुझको हंसाते हैं पापा,
मेरी जीत का हर जश्न मनाते हैं पापा,
मेरी हार पर सीने लगा समझाते हैं पापा,
दुनिया मे सभी है जो संग मे हैं पापा, !!
सब नजर आते हैं एक आप ही नहीं !
आज भी लगता है आप आओगे और पूछोगे “ठीक है बेटा”
पर ये शब्द कानों तक आते ही नहीं !
ज़िन्दगी में बहुत उलझनें हैं, पापा पास आप भी नहीं,
कोई नहीं है जो आकर बोले, “बेटा घबराना नहीं”
मन करता है पहले के जैसे आपसे घंटों बातें करूँ,
पर अब ये मेरी किस्मत में ही नहीं !
आप यादों में जिंदा हो पापा,
फिर भी ये दिल चुपके चुपके रोता है !
कोई नहीं है आंसू पोछने वाला, खुद ही चुप होना पड़ता है !
आज भी वो पल याद है, लगता है कल ही की बात है !!
सुविचार – माँ – 021
हर जगह महिलाओं को इसकी घोषणा करनी चाहिए.
Being a mother is the hardest job on earth. Women everywhere must declare it so. – Oprah Winfrey
_ जनम लेते ही मां का दर्द, बच्चे को भी रुला गया ..!!
वो मां है …..घर सजाना भी जानती है..
_ माँ कहती है, बेटा तू सदा खुश रहना !!
_ माँ ना जाने कैसे बिन कहे मेरी हर बात जान लेती है ..
_ उसकी हर प्रार्थना में सिर्फ़ अपने बच्चों का नाम होता है.!!
_ मां आवाज सुनकर बुखार नाप लेती है !!
_ ये तो बस….. “ख्याल” ही हो सकता है…
_ कह के ना ना मेरी हर बात मान लेती है !!
और जो अपने बच्चों से बदले में कुछ भी उम्मीद किए बिना असीम प्रेम करती है.
_ जो खुद से भी शायद नहीं कह पाते, _ वो माँ सुन लेती है ..
पर सारा कीमती सामान उसी में छुपा रहता है.
माँ की गोद में एक झपकी, सपने साकार सभी होते.
खिल उठता हूँ जब पड़ती है मुझ पर मेरी माँ की नज़र.
बच्चा गर भूखा हो तो माँ शर्म को भुला देती है.
रहे किसी भी शरीर में माँ तो फिर माँ होती है ।।
गांव में बैठी मां ने खाना छोड़ दिया..
_ माँ है जनाब _ वो कहाँ हार मानती है..
महंगे होटल में आज भी भूख मिटती नहीं मां..!
_ धरा पर कौन भला तुझसा स्वरुप है माँ !!
स्वागत में चेहरों को हाथों में लेकर चूमती,
विदा में सिर पर हाथ रख कर देती आशीष..
घर अब भी है, लेकिन माँ नहीं..
विदा के समय, मुड़ कर देखने पर, अब वह दिखाई नहीं देती..!!
अब माँ से टूट जाये तो, कुछ मत कहना,
जब मांगता था गुब्बारा, बचपन में माँ से,
अब माँ चश्मा मांगे तो, ना मत कहना,
जब मांगता था चॉकलेट, बचपन में माँ से,
अब माँ दवाई मांगे तो, तू ना मत कहना,
जब डांटती थी माँ, शरारत होती थी तुझसे,
अब वो सुन ना सके तो, बुरा उसे मत कहना,
जब चल नहीं पाता था, माँ पकड़ के चलाती थी,
अब चल न पाए वो, उसे सहारा तुम देना,
जब तू रोता था तब, माँ सीने से लगाती थी,
अब सह लेना दुःख तुम, माँ को रोने मत देना,
जब पैदा हुए थे तुम, तब माँ तुम्हारे पास थी,
जब अंतिम वक्त हो तो, तुम उसके पास रहना.
।। माँ ।।
मेरे इस वजूद की, तू वजह है माँ।
कैसे कह दूँ बस एक mother’s day, तेरा है माँ।
मेरी हर साँस है तू, माँ,
मेरी हर आस है तू माँ ।
उँगली पकड़ कर चलना सीखा,
मेरे हर एक कदम में, तेरा ही साहस है माँ ।
मेरे हकलाने को तूने जुबान दी है,
मुझे इस दुनिया में, मेरी पहचान दी है
मुँह में दूध की धार, अब तक है उधार,
उठना,बैठना, चलना फिरना,
सब में तेरी छाप है माँ,
तुझे ढूंढ़ता है, मन विचलित है,
तेरा बेटा उदास है, माँ ।
कैसे कह दूँ ?
सिर्फ एक ही दिन तेरा है,
मेरे जीवन का एक एक पल,
हर दिन, हर छण, तेरा ही है माँ ।
।। पीके ।।
माँ संवेदना है, भावना है, अहसास है
माँ जीवन के फूलों में खुशबू का वास है
माँ रोते हुए बच्चे का खुशनुमा पलना है
माँ मरुथल में नदी या मीठा सा झरना है
माँ लोरी है, गीत है, प्यारी सी थाप है
माँ पूजा की थाली है, मंत्रों का जाप है
माँ आखों का सिसकता हुआ किनारा है
माँ गालों पर पप्पी है, ममता की धारा है
माँ झुलसते दिनों में कोयल की बोली है
माँ मेहंदी है, कुमकुम है, सिंदूर की रोली है
माँ कलम है, दवात है, स्याही है
माँ परमात्मा की स्वयं एक गवाही है
माँ त्याग है, तपस्या है, सेवा है
माँ फूंक से ठंडा किया हुआ कलेवा है
माँ अनुष्ठान है, साधना है, जीवन का हवन है
माँ जिंदगी है, मुहल्ले में आत्मा का भवन है
माँ चूड़ी वाले हााथों पे मजबूत कंधों का नाम है
माँ काशी है, काबा है, चारो धाम है
माँ चिंता है, याद है, हिचकी है
माँ बच्चे की चोट पर सिसकी है
माँ चूल्हा, धुआँ, रोटी और हाथों का छाला है
माँ जिंदगी की कड़वाहट में अमृत का प्याला है
माँ पृथ्वी है, जगत है, धूरी है
मां बिना इस सृष्टि की कल्पना अधूरी है
तो माँ की यह कथा अनादि है, अध्याय नहीं है
और माँ का जीवन में कोई पर्याय नहीं है
तो माँ का महत्व दुनियाँ में कम हो नहीं सकता
औ माँ जैसा दुनियाँ में कुछ हो नहीं सकता
तो मैं कला की पंक्तियाँ माँ के नाम करता हूँ
मैं दुनियाँ की सब माताओं को प्रणाम करता हूँ।
आगोश मे ले कर सब ग़म भुला देती है,,,
यूँ लगता है जैसे जन्नत से आ रही है खुशबु ,,,,
जब वो अपने पल्लू से मुझे हवा देती है,,,
मैं जो अनजाने में करूँ कोई गलती,,,
मेरी “माँ” इस पर भी मुस्कुरा देती है,,,
क्या खूब बनाया है रब ने रिश्ता “माँ” का,,,
वीरान घर को भी “माँ” जन्नत बना देती है…!!!
माँ तुम होती तो कह देता, एक कप चाय बना दो।।
थक गया जली रोटी खा-खा के
माँ तुम होती तो कह देता, दो परांठे बना दो।।
भीग जाती हैं आँसुओं से आँखें,
माँ तुम होती तो कह देता,
आंचल से आँसु पोंछ दो।।
रोज वही नाकाम सी कोशिश
करता हूं खुश रहने की,
माँ तुम होती तो मुस्कुरा लेता,
मां बहुत दूर निकल आया हूँ घर से
बस तेरे सपनों की परवाह न होती….
तो कब का घर चला आता।।
जिसने खुद के रक्त से, भीगकर जमाया है तुझे
जिसे तू भेज रहा है वृद्धा आश्रम
उसे छोड़कर _ बाकी सब ने भरमाया है तुझे
सुखी रोटियां खाकर सुबह शाम बिताई उसने
बाकी सब ने खुद की आवश्यकता
पूरी करने के लिए फरमाया है तुझे
ना भेज उसे वृद्धा आश्रम
जिसने अपनी जिंदगी को
मौत के तले रख के जमाया है तुझे ..
लेती नहीं दवाई *”माँ”*, जोड़े पाई-पाई *”माँ*।
दुःख थे पर्वत, राई *”माँ*”, हारी नहीं लड़ाई *”माँ*”।
इस दुनियां में सब मैले हैं, किस दुनियां से आई *”माँ”*।
दुनिया के सब रिश्ते ठंडे, गरमागर्म रजाई *”माँ* ।
जब भी कोई रिश्ता उधड़े, करती है तुरपाई *”माँ*” ।
बाबू जी तनख़ा लाये बस, लेकिन बरक़त लाई *”माँ*”।
बाबूजी थे सख्त मगर , माखन और मलाई *”माँ*”।
बाबूजी के पाँव दबा कर सब तीरथ हो आई *”माँ*”।
नाम सभी हैं गुड़ से मीठे, मां जी, मैया, माई, *”माँ*” ।
सभी साड़ियाँ छीज गई थीं, मगर नहीं कह पाई *”माँ”* ।
घर में चूल्हे मत बाँटो रे, देती रही दुहाई *”माँ*”।
बाबूजी बीमार पड़े जब, साथ-साथ मुरझाई *”माँ”* ।
रोती है लेकिन छुप-छुप कर, बड़े सब्र की जाई *”माँ”*।
लड़ते-लड़ते, सहते-सहते, रह गई एक तिहाई *”माँ*” ।
बेटी रहे ससुराल में खुश, सब ज़ेवर दे आई *”माँ*”।
“माँ” से घर, घर लगता है, घर में घुली, समाई *”माँ*” ।
बेटे की कुर्सी है ऊँची, पर उसकी ऊँचाई *”माँ”* ।
दर्द बड़ा हो या छोटा हो, याद हमेशा आई *”माँ”*
घर के शगुन सभी *”माँ”* से, है घर की शहनाई *”माँ*”।
सभी पराये हो जाते हैं, होती नहीं पराई *मां*
सुविचार – माता-पिता – माँ-बाप – 020
To be a visionary parent, we need to keep working on ourselves, becoming forever new and improved.
_ यह मन के भीतर घटित होने वाली घटना है.
_ अगर रब ने आपको माता-पिता बनने का मौका दिया है तो इसे एक जिम्मेदारी समझें और प्यार से निभाएं.
पिता जिसने तुम्हारी जीत के लिए सब कुछ हारा हो, _माँ जिसको तुमने हर दुःख में पुकारा हो.
_ क्योंकि इस दुनिया में वही हैं, जो बिना किसी मतलब के आपसे प्यार करते हैं.!!
_ ‘वो जिन्होंने अपने बच्चों के लिए अपने जीवन, आराम और सुख की परवाह नहीं की….
_ वो जो अपने बच्चों को unconditionally प्यार करते हैं …
_ वो जो बच्चों के बड़े हो जाने पर भी उतना ही लाड़ देते हैं जैसे कोई छोटे बच्चे को…
_ शायद आप जितना जानते हैं, वे उससे ज़्यादा संघर्ष करते हैं..!!
_ वे दो वक्त के भोजन और ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर की मदद से संतुष्ट हो जाते हैं.!!
कभी कड़ी धूप में तुमने इनसे ही पनाह माँगी थी।”
( These lines encourage to Respect Parents in their old age )
– लेकिन जो आपको जोड़े रखते हैं ..वे आपके माता-पिता हैं और यही महत्वपूर्ण है.
माँ का रोल जीते जी समझ में आ जाता है, और पिता का रोल उनके चले जाने के बाद..
_ वो सिर्फ़ माता पिता ही हो सकते हैं.!!
साथ केवल वही देंगे जिन्होंने आपको पैदा किया है…!!
उन्होंने अपनी जिन्दगी हार कर आपको जिताया हैं.
वो सिर्फ माँ बाप कहलाते हैं.
तब कहीं जाकर औलाद पलती है…
पर बाप के बिना पूरी जिंदगी ही बिखर जाती है.
माँ – बाप के सिवा कोई नहीं कहेगा थक गए हो आराम कर लिया करो !!!!
और पिता अपने खून और पसीने से बच्चों का लालन – पालन करता है.
_ कितने कीमती हो तुम उनके लिए, ज़रा ये भी तो देख कर जाओ तुम ..
_ उसके गुस्से से डर कर अपनी “जरूरत” बताना या “नसीहत” देना छोड़ देते हैं.
मगर माता पिता की वसीयत सबको अच्छी लगती है.
जहां हमारी हर उदासी और दर्द की दवा मिलती है.
_ उन्होंने हमें जीवन दिया है, वह जीवन जिसका हम मनचाहा उपयोग करते हैं..!!
आप कभी पिता की, आपके पीछे मेहनत और माँ की ममता का अंदाजा नही लगा सकते.
_ उनसे जो संभव हुआ वो सब कुछ हमको दिया.!!
आप कभी बड़े नहीं होते और मां- बाप कभी बूढ़े नहीं होते.
और उनके जीवन को सही ढाँचे में ढालने का सुख पिता को.
लेकिन माँ बाप हमारी हज़ार गलतियों के बाद भी हमें अपना बना लेते हैं.
उनकी बात भी सही है __ आपके जमाने के हिसाब से आप !
_ बाकि लोग कभी न कभी तो जलन की भावना दिखा ही देते हैं !!
_ जब उनके बच्चे कोई उपलब्धि हासिल करते हैं तो ..उन्हें लगता है कि आज तक उन्होंने उनके लिए जो भी किया ..वह सफल हुआ,
_ यही उनकी सबसे बड़ी ख़ुशी होती है !!
_ मां बाप के सिवा कोई और हमदर्द नहीं है..
_पिता सीने पर पत्थर रखता है और माँ सीने में..!!
साथ केवल वही देंगे जिन्होंने आपको पैदा किया है…!!
एक माँ बाप ही हैं जो कभी हिसाब नहीं मांगते.
माँ बाप फिर अकेले रह गये बच्चो को पाल कर…
खुदा की नेमतों से रोशन ये जहां है.
मां के कदमों में जन्नत है तो
पिता उसका दरवाजा है.
माता- पिता साथ है जिसके
दुनिया में वह राजा है.
माता अगर अपनी संतान के लिए हर दुःख उठाने को तैयार रहती है. तो पिता सारे जीवन उन्हें पीता ही रहता है.
हम तो बस उनके किये गए कार्यों को आगे बढ़ाकर अपने हित मे काम कर रहे हैं.
आखिर हमें भी तो अपने बच्चों से वही चाहिए ना ……..!
सुबह की सैर में कभी चक्कर खा जाते है ..
सारे मौहल्ले को पता है…पर हमसे छुपाते है
दिन प्रतिदिन अपनी खुराक घटाते हैं और
तबियत ठीक होने की बात फ़ोन पे बताते है.
ढीली हो गए कपड़ों को टाइट करवाते है,
देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..
किसी के देहांत की खबर सुन कर घबराते है,
और अपने परहेजों की संख्या बढ़ाते है,
हमारे मोटापे पे हिदायतों के ढेर लगाते है,
“रोज की वर्जिश”के फायदे गिनाते है.
‘तंदुरुस्ती हज़ार नियामत “हर दफे बताते है,
देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..
हर साल बड़े शौक से अपने बैंक जाते है,
अपने जिन्दा होने का सबूत देकर हर्षाते है,
जरा सी बढी पेंशन पर फूले नहीं समाते है,
और FIXED DEPOSIT रिन्यू करते जाते है,
खुद के लिए नहीं हमारे लिए ही बचाते है.
देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..
चीज़ें रख के अब अक्सर भूल जाते है,
फिर उन्हें ढूँढने में सारा घर सर पे उठाते है,
और एक दूसरे को बात बात में हड़काते है,
पर एक दूजे से अलग भी नहीं रह पाते है.
एक ही किस्से को बार बार दोहराते है,
देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..
चश्में से भी अब ठीक से नहीं देख पाते है,
बीमारी में दवा लेने में नखरे दिखाते है,
एलोपैथी के बहुत सारे साइड इफ़ेक्ट बताते है,
और होमियोपैथी/आयुर्वेदिक की ही रट लगाते है,
ज़रूरी ऑपरेशन को भी और आगे टलवाते है.
देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..
उड़द की दाल अब नहीं पचा पाते है,
लौकी तुरई और धुली मूंगदाल ही अधिकतर खाते है,
दांतों में अटके खाने को तिली से खुजलाते हैं,
पर डेंटिस्ट के पास जाने से कतराते हैं,
“काम चल तो रहा है” की ही धुन लगाते है.
देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..
हर त्यौहार पर हमारे आने की बाट देखते है,
अपने पुराने घर को नई दुल्हन सा चमकाते है,
हमारी पसंदीदा चीजों के ढेर लगाते है,
हर छोटी बड़ी फरमाईश पूरी करने के लिए,
माँ रसोई और पापा बाजार दौडे चले जाते है.
पोते-पोतियों से मिलने को कितने आंसू टपकाते है,
देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते है..
देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते है..
बाकी सब कुछ दुनिया सिखा देगी !
_बाकी दुनिया सबकुछ करती है _बस प्यार ही नहीं करती _लेकिन बदले में कर्तव्यों का पहाड़ जरूर सर पर लाद देती है.
Before teaching, scolding, advising or giving opinion to children, every parent of the world should look deep into their lives and question themselves, are they really successful in their life? Is it not possible that a child, without holding the hand of his parents, has the potential to surpass them purely on the basis of his own decisions and freedom ?
बच्चों का अपना भविष्य है, _ उन्हें उनके अनुरूप बढ़ने दें, _ प्रकृति हमसे कहीं अधिक बुद्धिमान है.!!
Don’t give your rotten stinking pasts as an inheritance to your children. Children have their own future. Let them grow in their accord Nature is much more intelligent than we ever can be.
_ वो अपनी भावनात्मक जड़ों से कट कर बिलखने लगते हैं..
_’हाँ’ शारीरिक शिथिलता अन्य मजबूरी से ही वो दिल पर पत्थर रख उस स्थान को छोड़ पाते हैं.






