सुविचार – विवाह – शादी – 019

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शादी हमारे दुखों को आधा कर देती है, खुशियों को दोगुना कर देती है और हमारे खर्चों को चौगुना कर देती है.

Marriage halves our griefs, doubles our joys, and quadruples our expenses. – Gilbert K. Chesterton

लोगों का मानना ​​है कि शादी हमें बेहतर बनाएगी.

People believe marriage will make us better. – Oprah Winfrey

विवाह का पूरा आनंद यह है कि यह एक सतत संकट है.

The whole pleasure of marriage is that it is a perpetual crisis.

– Gilbert K. Chesterton

विवाह के बाहर कुछ भी स्वतंत्रता और उत्साह जैसा लगता है, -Jeanette Winterson

Anything outside marriage seems like freedom and excitement. – Jeanette Winterson

विवाह दो खंभों पर टिके हुए मंदिर की तरह है ; _यदि वे एक-दूसरे के बहुत करीब आ गए तो मंदिर ढह जाएगा.!!

Marriage is like a temple resting on two pillars. If they come too close to each other the temple will collapse. – Khalil Gibran

एक विवाह को सुखी तभी कहा जा सकता है जब दोनों पक्षों में से किसी को भी इससे अधिक खुशी मिलने की उम्मीद न हो.!!

A marriage is likely to be called happy if neither party ever expected to get much happiness out of it. – Bertrand Russell

विवाह में एक ही घर में दिन-रात एक साथ रहने वाले लोगों के बीच थोड़ी सी छूट, थोड़ी स्वतंत्रता अवश्य होनी चाहिए. – VirginiaWoolf

In marriage a little licence, a little independence there must be between people living together day in and day out in the same house. – VirginiaWoolf

शादी फूलों की सेज नहीं है, कहीं बहुत ज़्यादा उम्मीदें लेकर शादी करवाओ.

_ पूरी मानसिक तैयारी के साथ जाना कि ज़िन्दगी वह नहीं भी हो सकती, जैसी तुमने कल्पना की होगी.
_ शादी के लिए मानसिक तैयारी बेहद ज़रूरी है, जिसकी ओर कोई ध्यान नहीं देता.
_ कितने लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अपने बेटे या बेटी को बताया हो कि शादी का अर्थ क्या है ? शादी के बाद उन्हें कैसे रहना है ? आदि आदि.
_ जब हम कक्षा में फेल हो जाने के डर से अपनी पढ़ाई की तैयारी जी-जान से करते हैं, तो शादी के लिए कोई तैयारी क्यों नहीं करते ?
_ शादी से बड़ा इम्तहान और कौन सा होगा ?
– Manika Mohini
सच ये है : समस्या ‘शादी’ नहीं है.

_ ज्यादातर लोग दुखी इसलिए नहीं हैं कि जिम्मेदारियां ज़्यादा हैं..
_ बल्कि इसलिए कि उन्होंने जीने का तरीका गलत सेट कर लिया है.
“घर को बोझ नहीं, सिस्टम बनाओ”
इसे कैसे लागू करें (Simple, actionable):
1. Role clear करो (दिमाग हल्का होगा)
_ हर चीज खुद करने की कोशिश मत करो.
_ तय करो – क्या मेरी जिम्मेदारी है, और क्या नहीं है.
👉 30% चीजें खुद हट जाएंगी.
2. Fixed routine बनाओ (Decision fatigue खत्म)
_ हर दिन नई लड़ाई नहीं चाहिए.
_ सुबह क्या करना है, शाम को कैसे unwind करना है, family time कब है- ये तय करो।.
👉 सिस्टम बनेगा और सेट होगा तो दिमाग खाली रहेगा – हंसी अपने आप आएगी.
3. पैसे, काम, family – सबका limit तय करो.
_ Unlimited expectation = permanent stress
👉 “बस इतना काफी है” – ये line तय करनी पड़ेगी.
4. हफ्ते में 1 दिन ‘No Responsibility Mode’
_ कम से कम 2–3 घंटे- ना काम, ना planning, ना future
👉 ये reset button है – बिना इसके system hang होगा ही.
✦ “जिंदगी मुश्किल नहीं होती,
_ हम उसे बिना सिस्टम के जीते हैं- इसलिए थक जाते हैं.”
🔹 “थकान जिम्मेदारियों से नहीं, बिखरे हुए जीने से आती है…
_ जिंदगी को सिस्टम दे दो, खुशहाली अपने आप लौट आएगी”
🔹 “समस्या शादी नहीं है, समस्या ये है कि हमने जीने का तरीका सेट नहीं किया…
_ जहाँ सिस्टम होता है, वहाँ इंसान नहीं टूटता”
_ “जिंदगी को सिस्टम दे दो… वरना वही जिंदगी आपको थका देगी”
_ “जिस दिन आपने अपनी जिंदगी का सिस्टम बना लिया,
उसी दिन जिम्मेदारियां बोझ नहीं रहेंगी”
विवाह का आनंद, यदि है तो, परिवार और दोस्तों के साथ है.!
_ वैसे मुझे तो कभी विवाह की रस्मों और समारोह में कभी कोई आनंद दिखा नहीं.!!
विवाहित जीवन में अनेक दुःख हैं, किन्तु अविवाहित जीवन में कोई भी सुख नहीं.
विवाह एक ऐसा बंधन है जो दो लोगों को जोड़ता है,

_ लेकिन यह जरूरी नहीं कि सभी के लिए सही हो.!!

विवाह तभी सार्थक है, जब दो लोगों को दो ही रहने दो, एक न करो.
_ क्यूंकि दोनों कि अपनी-अपनी पहचान है, विचार हैं और नजरिया है.!!
विवाह को एक “साझा यात्रा [shared journey] के रूप में देखा जाना चाहिए,
_ न कि एक स्थायी समझौते [permanent agreement] के रूप में.!!
विवाह सरकस के समान है, क्योंकि उस में जितना विज्ञापन दिखाया जाता है, उतना वास्तव में होता नहीं है.
विवाहित जीवन फूलों की सेज नहीं, कांटों का ताज है,

_ सामान्य ताज में हीरे-जवाहरात बाहर जड़े हुए होते हैं _जबकि इसमें काटें अन्दर गुथे रहते हैं.

विवाह एक साझेदारी है और बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, उस बड़ी जिम्मेदारी के साथ बहुत सी छोटी-छोटी जिम्मेदारियां भी जुड़ी हुई हैं, जो आपको चाहते हुए या ना चाहते हुए भी उठानी ही पड़ेंगी, वरना समाज आपका सांस लेना मुश्किल कर देगा.!!
विवाह संस्था इतनी भी बुरी नहीं कि उसे सिरे से नकार दिया जाए.

_ विवाह ज़रूर करो.
_ क्या पता, कोई सच में मन का मिल जाए.
_ यह रिस्क तो लेना ही पड़ेगा.
_ हाँ, न जमे तो उसे दुनियादारी के डर से खींचे मत जाओ.
_ तोड़ो और आगे बढ़ो.
_ यह जीवन, यह दुनिया विवाह के बगैर भी बहुत खूबसूरत है.
विवाह करने के फायदे- निरंतर साथी, बुढ़ापे का साथी, प्रेम और मनोरंजन, गृहस्थी, संगीत और स्त्री हास्य, खूब सारे बच्चे..

_ विवाह करने के नुकसान- झगड़े, घूमने पर पाबंदी, समाज में बंधन, दोस्तों के साथ मनोरंजन घटना, ख़ामख़ाँ के रिश्तेदारों का बढ़ना, किताबों के लिए पैसे घटना, किताब पढ़ने की संभावना घटना, बच्चों के ढेर सारे खर्च और चिंता।
_ अंतिम निर्णय- विवाह कर ही लिया जाए.!!
“जब लोग शादी करते हैं तो उन्हें लगता है कि यह एक लंबे समय का प्रेम संबंध है, तो वे बहुत जल्द इसे खो देंगे, क्योंकि सभी प्रेम संबंधों का अंत निराशा में होता है,

_ लेकिन शादी एक “आध्यात्मिक पहचान” की पहचान है”
“जब आप शादी में त्याग करते हैं, तो आप एक दूसरे के लिए नहीं _ बल्कि एक रिश्ते में एकता के लिए त्याग कर रहे हैं.”
_इसीलिए अच्छी शादियां होती हैं, _लेकिन सुखद शादियां नहीं होतीं.!!
विवाह वह खुबसूरत संयोग है जिसमे व्यक्ति को अपना सबसे बेहतरीन दोस्त मिलता है.
ज़िंदगी भर समझौते का नाम है ‘शादी’..

_पहले बीवी के साथ, बाद में बच्चों के साथ..!!

शादी का अर्थ है अपनी आज़ादी को आधा और जिम्मेदारियों को दुगुनी करना..!!
शादी करके हम संभवतः जीवन की असुविधाओं के साथ_थोड़ी सी खुशियाँ खरीद रहे हैं..!!
शादी एक रिश्ता है, गुनाह नहीं, कि एक बार कर लिया तो ..उम्र भर इसकी सज़ा भुगतनी पड़ेगी..!!
‘सुना है, शादी के बाद ज़िंदगी तो होती है लेकिन ज़िंदादिली नहीं होती’
हर कोई आपकी ज़िंदगी में आने के काबिल नहीं होते..

_ हर रिश्ते का आधार आकर्षण नहीं, बल्कि मूल्य, सम्मान और समझदारी होनी चाहिए.!!

शादी एक शब्द पहेली है, जिसका परिणाम घोषित हो जाने के बाद पहेली भरने वाले को यही लगता है कि काश,

इस शब्द के बदले अमुक शब्द भरा होता.

विवाह खूबसूरत व छोटी- सी एक नाव है, जिस पर चढ़ने के लिए हर व्यक्ति उत्सुक रहता है,

फिर उतरने के लिए बैचेन हो जाता है.

जो इंसान अपनी खुद की जिंदगी ही नहीं संभाल सकता..

_ उसे प्रेम और विवाह करने का कोई हक नहीं.!!

‘विवाह एक रिश्ता है’ उसमें प्यार होने की गारंटी नहीं है.

_ प्यार के विवाह में बदलने की गारंटी नहीं है.!!
विवाह मित्रता का सबसे दृढ बन्धन है, विश्वास मित्रता की नीवं है, आपसी मेल से ही विश्वास पैदा होता है.

विवाह में जो खूबसूरती, धन और दिखावे को महत्व देता है, उसे सच्चा सुख नहीं मिल पाता.

विवाह की सफलता या असफलता पतिपत्नी की आपसी समझ और सामंजस्य पर निर्भर करती है.

_ दो लोगों को विवाह कर के भी दोस्त होना चाहिए.!!

रिश्ता तब सुंदर बनता है.. जब दो लोग मजबूरी नहीं..
_ समझदारी से एक दूसरे का साथ चुनते हैं.!!
शादी _ “दो लोगों के एक साथ आने का उद्देश्य एक-दूसरे को उनके व्यक्तिगत विकास में मदद करना है न कि इसमें बाधा बनना.

_अगर दो बहुत जागरूक लोग एक साथ आते हैं, तो यह एक खूबसूरत चीज़ हो सकती है.”

” विवाह जीवन का एक हिस्सा है, लेकिन सफलता वह आधार है जो पूरे जीवन को संवारता है.

_ पहले खुद को स्थापित करना, फिर जीवनसाथी के साथ एक मजबूत भविष्य बनाना ही समझदारी है.
शादी के सातों वचन अनमोल होते हैं ; _इन वचनों में वो जादू है,

_जो इनका पालन करे तो _कभी इस रिश्ते में चूक हो ही नहीं सकती है.!

विवाह जीवन को एक लय देता है. जैसे बिना साज के आवाज अधूरी है वैसे ही बिन विवाह के जीवन अधूरा.

जीवनसाथी का साथ अकेलेपन को दूर करता है.

शादी एक जीवनभर की यात्रा है, जो आप केवल एक अच्छे साथी के साथ ही निभा सकते हैं.
विवाह सरल और कम खर्चीला होना चाहिए ताकि लोग जीवन के अन्य पहलुओं पर ध्यान दे सकें.!!
विवाह क्या है ?

“विवाह” एक ऐसा गठबंधन है – जिसमें दो व्यक्ति मिलकर उन समस्याओं को सुलझाने का जीवन भर प्रयास करते हैं, जो पहले कभी थी ही नही.!!

“सर्वोत्तम विवाह वह नहीं है, जब एक सर्वगुण संपन्न जोड़ा एक साथ जुड़ता है.

_ यह वह है, जब एक जोड़ा सर्वगुण संपन्न न होते हुए भी _ अपने मतभेदों का आनंद लेना सीख लेता है”

शादी की सफलता का श्रेय दोस्ताना व्यवहार को भी जाता है. आप को अपने साथी के साथ दोस्ताना व्यवहार करना चाहिए,

तभी आप का साथी अपने मन की बात बेझिझक आप से कर पाएगा.

कोई भी व्यक्ति परफैक्ट नहीं होता, पर अपनी मैरिड लाइफ को खूबसूरत बनाने के लिए

अपने लाइफपार्टनर को अपने लिए हमेशा परफैक्ट मानें.

विवाह होता है, प्रेम विवाह जैसा कुछ नहीं होता.!!
विवाह हमारे लिए विकास करने, स्वयं को परिष्कृत करने

और प्रेम करना सीखने की सम्भावना लेकर आता है.

खुद की जीने की वजह जिनके पास होती है, _

_ उन्हें शादी के झमेले की जरूरत क्या है..!!

विवाह एक ऐसा पवित्र बंधन है, जिसमें बढ़ी हुई जिम्मेदारियां भी अच्छी लगती हैं.
शादी से पहले जिन्दगी एक मेला हैं _ शादी के बाद जिन्दगी एक झमेला है !!
जीविका का प्रश्न हल होने के बाद ही विवाह शोभा देता है..!!

मैं जब अपने संघर्ष से जीत जाऊंगा, तो निश्चित हीं विवाह कर लूंगा…
_ क्योंकि मैं नहीं चाहता की मेरे संघर्षों के बोझ तले कोई स्त्री दब कर,
_ अपने ख्वाबों की बलि चढ़ा दे..!!
जब तक आप अपनी वित्तीय स्थिति [financial position] ठीक नहीं कर लेते तब तक शादी न करें.
_ _ क्योंकि वे हमें टूटते हुए दिखाई देते हैं.. जो बहुत जल्दी पति की भूमिका निभाने लगते हैं.!!
शादी मतलब ढेर सारी जिम्मेदारियों का भार लेना, जो लोग बोलते है कब तक अकेले रहोगे ?

_ किसी का साथ जरूरी है..! सब बात ठीक है.. मगर जो इंसान खुद की जिम्मेदारी पूरी नही कर पा रहा..
_ उससे ये उम्मीद करना की वो अपने साथ एक और इंसान के भविष्य को दांव पे लगा दे.. इससे बड़ी बेवकूफी दूसरी नही हो सकती…!
शादी एक बहुत बड़ा आर्थिक निर्णय है, _ जिसे हम सामाजिक और भावनात्मक दबाव के चलते ले लेते हैं.!!
Marriage is a huge financial decision,_ Which we take due to social and emotional pressure.!!
“विवाह एक भरोसा है, समर्पण है “

तारीफ उस स्त्री की जिसने खुद का घर छोड़ दिया..

_ धन्य है वो पुरुष जिसने अनजाने स्त्री को अपना घर सौंप दिया.

शादी सिर्फ खुशियों का उत्सव नहीं, बल्कि जीवनभर का साथ निभाने का वादा होती है.

_ हर रिश्ता शुरुआत में आसान लगता है, लेकिन असली ताकत तब सामने आती है जब मुश्किलें दस्तक देती हैं.
_ अगर रिश्ता भरोसे, प्यार और समझ पर टिका हो, तो कोई भी कठिनाई इसे तोड़ नहीं पाती.
_ उल्टा, मुश्किल हालात में और भी गहरे हो जाते हैं… जो रिश्ता हर तूफान में साथ खड़ा रहता है, वही साथ निभाने की गारंटी देता है.
_ शादी का रिश्ता एक दूसरे की पसंद-नापसंद के साथ एडजस्टमेंट होता है.
_ मगर, इसमें जैसे ही जिद और हठ की इंट्री होती है, तो इसे तबाह होने से कोई नहीं रोक सकता है.!!
हिन्दू विवाह में सात फेरे के साथ लिए जाने वाले सात वचन जीवन को संतुलित और अर्थपूर्ण बनाने का संकल्प होते हैं.

सात फेरे – सात वचन (सरल अर्थ)
1.पहला वचन – “भोजन व आजीविका”
_ हम मिलकर ईमानदारी से जीवनयापन करेंगे और परिवार का भरण-पोषण करेंगे.
2.दूसरा वचन – “शक्ति व स्वास्थ्य”
_ हम एक-दूसरे के स्वास्थ्य, मन और सुख-दुख का ख़याल रखेंगे.
3.तीसरा वचन – “धन व समृद्धि”
_ हम धन को समझदारी से कमाएँगे, धन का सही उपयोग करेंगे और परिवार की उन्नति करेंगे.
4.चौथा वचन – “प्रेम व पारिवारिक दायित्व”
_ हम प्रेम, विश्वास, समझ और जिम्मेदारी से परिवार की जिम्मेदारियाँ निभाएँगे.
5.पाँचवाँ वचन – “संतान व संस्कार”
_ हम संतान को अच्छे संस्कार देंगे और उन्हें सही मार्ग दिखाएँगे.
6.छठा वचन – “साथ व निष्ठा’
_ हम हर परिस्थिति में एक-दूसरे का साथ निभाएँगे और ईमानदार रहेंगे.
7.सातवाँ वचन – “मित्रता व जीवनसाथी”
_ हम जीवन भर मित्र, साथी और सहयात्री बने रहेंगे.
इन सात वचनों का सार यही है कि विवाह केवल रस्म नहीं,
_ बल्कि साथ चलने, साथ निभाने और साथ बढ़ने का संकल्प है.
मेरा सवाल : -> क्या कोई व्यक्ति कभी यह रुककर देखता है कि वह किस वचन से भटक गया ?
“लोग जिम्मेदारी तो निभा लेते हैं.. पर मित्रता कहीं खो जाती है.”
हर व्यक्ति शादी के लिए नहीं बना होता.

_ हर कपल माँ/बाप बनने के लिए नहीं बना होता.
_ कई व्यक्ति बिना शादी के, सिंगल रहकर, ज्यादा अच्छी ज़िन्दगी बिता सकते हैं/थे.
_ कई कपल बिना बच्चे के ज्यादा अच्छी ज़िन्दगी बिता सकते हैं/थे.
_ सबको एक ढाँचे में फिट करने का फितूर छोड़ दीजिये..
_ शादी, बच्चे, घर-जायदाद, बेटा-वारिस इन सबने कई युवाओं की ज़िन्दगी बर्बाद की है.!!
जब मेरी शादी हुई, तो मुझे यह ठीक से नहीं पता था और न ही जानता था कि शादी के बाद जीवन कितना बदल जाएगा..

_ बस इतना समझता था कि शादी का अर्थ है, सुख-दुख में साथ निभाने का वादा, हर परिस्थिति में साथी बने रहने का भरोसा..
_ लेकिन सच कहूँ, उस समय मैंने इस रिश्ते की गहराई को पूरी तरह से समझा नहीं था..
_ लेकिन खुद उस सफर पर निकलने के बाद, शादी का असली अर्थ समझा..
_ लेकिन असल में इन दिनों सबसे बड़ी समस्या जो समाज के सामने आ रही है,
_ वो है पति-पत्नी के रिश्तों में नासमझी की,,
_ पति-पत्नी का रिश्ता खून का रिश्ता नहीं है, भावनाओं, समझ और वादों का है.
_ माता-पिता योग्य साथी चुन सकते हैं, या व्यक्ति खुद अपने लिए साथी ढूंढ सकता है,
_ लेकिन इस रिश्ते को निभाने की कसौटी इस बात पर निर्भर करती है कि दोनों साथी मिलकर कैसे एक-दूसरे के जीवन का हिस्सा बनते हैं.
_ बहुत से लोग शादी सिर्फ इसलिए करते हैं.. क्योंकि उम्र हो गई है या समाज का दबाव है.
_ लेकिन शादी का असली अर्थ समझे बिना किया गया यह फैसला अक्सर दुखदायी बन जाता है.
_ शादी तब ही सफल होती है, जब दोनों साथी एक-दूसरे के लिए सेवा और समर्पण के भाव से साथ चलते हैं.
_ जब एक और एक मिल कर दो नहीं, बल्कि एक हो जाने के अहसास को जीने लगते हैं.
_ शादी का असली अर्थ त्याग, समर्पण और समझदारी है.
_ यह एक ऐसा रिश्ता है, जिसमें दो लोग ‘मैं’ और ‘तुम’ से ऊपर उठकर ‘हम’ बनते हैं.
_ यह रिश्ता तभी फलता-फूलता है, जब दोनों साथी एक-दूसरे के सुख-दुख को साझा करें और हर परिस्थिति में एक-दूसरे का साथ दें.
_ शादी को निभाना आसान नहीं है..
_ यह रिश्ता त्याग और समझौते की मांग करता है.
_ दोनों साथी इस रिश्ते को पूरी निष्ठा से निभाएं, तो यह जीवन को सबसे सुंदर अनुभव बना देता है.
_ शादी सिर्फ दो लोगों का जुड़ना नहीं है, बल्कि यह वादा है जिसे हर परिस्थिति में निभाना होता है.
_ शादी का अर्थ केवल प्रेम या संग-साथ तक सीमित नहीं है.
_ इसका असली अर्थ है अपने साथी के साथ हर मुश्किल में खड़ा रहना..
_ यही सच्चा वादा है, यही सच्चा रिश्ता है..!!

– संजय सिन्हा
शादी दो अनजान लोगों के एक साथ रहने और निभाने का नाम है.

_ शादी मिल-बाँट के गुज़र-बसर करने का नाम है.
_ शादी समझौते का नाम है.
_ शादी प्यार-मोहब्बत का नाम है.
_ शादी दो परिवारों के सम्मिलन का नाम है.
_ शादी सामाजिक होने का नाम है.
_ शादी स्वस्थ और कामयाब संतानें पैदा करने का नाम है.
_ शादी पीढ़ियों को आगे बढ़ाने का नाम है.
_ शादी एक संयुक्त गठबंधन है, वर्तमान से भविष्य तक का, पूर्व पीढ़ी से भावी पीढ़ी तक का.
*
_ जो लोग आपस में मिल कर नहीं रह सकते,
सुख, दुख, ज़िम्मेदारियां एक साथ नहीं बांट सकते
वे, लड़का हो या लड़की, बेहतर हो शादी न करें.
*
_ जो माएं बहुओं को सिर्फ़ इसलिए दुख देती हैं कि वे बहुएं हैं, वे बहुएं न लाएं और अपने बेटों को अपने पास संजो कर रखें.
*
_ जो माएं बेटियों को ससुराल में सिर्फ़ खुशियां छीनने के लिए ब्याहती हैं, वे अपने बेटियों को क्वारा रख कर चैन की नींद सोएं.!!
*
– Manika Mohini
“अकेले हैं

अकेले को न घर चाहिए
न दर चाहिए
मुहब्बत भरी एक नज़र चाहिए।.”
_ मैंने कभी अकेलेपन की वकालत नहीं की, न दुकेलेपन और परिवार की महत्ता को कम आंका. _ अगर जीवन साथी अच्छा हो, केयरिंग हो, दोनों में अच्छा तालमेल हो तो उससे बेहतर और कुछ नहीं.
_ अकेलापन खुशी से किया हुआ चुनाव नहीं होता, मजबूरी होती है.
_ अकेले होकर हम फिर गैरों में अपनापन ढूंढते हैं.
_ यूं गुज़ारा करने का क्या है, गुज़ारा तो हर हाल में हो जाता है, लेकिन हर हाल में जीने को जीना नहीं कहते.
_ आप अकेलेपन की कितनी भी तरफदारी करें, आपके मन में हमेशा एक साथी की तलाश रहती है.
_ यह तलाश विवाह में बंध कर पूर्ण होती है.
“मैं हूं नदी
फ़ितरत है रवानी मेरी
फिर भी ख्वाहिश
किसी पर्वत ने तो रोका होता”
– Manika Mohini

सुविचार – विद्यार्थी – 018

विद्यार्थी की सच्ची सुंदरता उस के गुणों और योग्यता में है, न कि बाहरी फैशन में.
होंठो पे मुस्कान कंधो पे बस्ता था, _ सुकून के मामले में वो ज़माना सस्ता था !!
जिंदगी की पढ़ाई चल रही है, अभी हमारा बैग उतरा नहीं है.

सुविचार – बचपन – बच्चा – बच्चे – बच्चों – 017

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जब मैं छोटा था तब मुझे बड़ा होने की बड़ी जल्दी थी ! आज समझ आया की वो बचपन ही अच्छा था, जब ना किसी की ज़रूरत थी और ना कोई ज़रूरी था.

बचपन चला गया ___ज़िन्दगी की सबसे कीमती _ निशानी चली गई _
वो बचपन बहुत प्यारा था,_ जो कभी हमारा था..!!
बचपन की यादें किसी भी व्यक्ति के जीवन की सबसे खूबसूरत यादें होती हैं.

_ समय में पीछे जाएँ और अपने आप को उस बचपन की मासूमियत में डुबो दें और देखें कि वह कितना सुंदर था.!!
बस कोई लौटा दे वो बचपन के दिन..

_ खाली हाथ होने के बावजूद भी, कुछ न होते हुए भी बहुत कुछ था..

जब छोटे बच्चे थे तो जोर से रोते थे, जो पसंद था उसे पाने के लिए.!

_ आज बड़े हैं तो चुपके से रोते हैं, जो पसंद हैं उसे भुलाने के लिए.!!

अँधेरे से कह दो बचपन बीत चुका, अब तुझसे डर नहीं सुकून मिलता है.!!
बच्चे दर्पण की तरह होते हैं, हमारे लाख छिपाने की कोशिश के बावजूद भी

एक बच्चे में सच को समझने की अनोखी योग्यता होती है.

बच्चे कोरे कपड़े की तरह होते हैं, जैसा चाहो वैसा रंग लो,

उन्हें निश्चित रंग में केवल डुबो देना पर्याप्त है.

बड़े हो चुके होने का एहसास दिला के जिंदगी, झिंझोड़ देती है

बचपन तब ही ख़त्म हो जाता है जब, माँ डाँटना छोड़ देती है।……..

*बचपन साथ रखियेगा ज़िन्दगी की शाम में,*

*उम्र महसूस ही न होगी, सफ़र के मुक़ाम में*

” मिट्टी भी जमा की और खिलौने भी बना कर देखे

ज़िन्दगी कभी न मुस्कुराई फिर बचपन की तरह “

भागते बचपन में भी थे, भागते आज भी हैं !! _

_बस्ता वही है, बस अंदर का सामान बदल गया है !!!

वो बारिश का पानी, वो कागज़ की नाव _

_ बचपन को जिया है, मैंने फिर से एक बार ..

वो शरारत, वो मस्ती का दौर था, _

_ वो बचपन का मज़ा ही कुछ और था !!

लौट कर आती हैँ, वो तारीखें ,,

_ लौट कर, वो दिन नहीं आते …!!

बचपन बीत गया है अब, अब वो ज़माने नहीं आते _

_ यार पुराने दूर हैं मुझसे, अब वो ग़म मिटाने नहीं आते ..

इतनी चाहत तो लाखो रु पाने की भी नही होती,

जितनी बचपन की तस्वीर देखकर बचपन में जाने की होती है…….

बचपन साथ रखिए जिंदगी की शाम में

उम्र महसूस ही ना होगी सफर के मुकाम में।

उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में

फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते.

इसलिए तो बच्चों पर नूर बरसता है,

शरारतें करते हैं, साज़िशें तो नहीं.

बच्चे पौधों के समान होते हैं –

वे प्रेम, प्रसन्नता और स्वतंत्र वातावरण में बढ़ते हैं.

आता है याद मुझ को बचपन वो जमाना,

रहता था साथ मेरे खुशियों का जब जमाना..

गरीबों की बस्ती में जरा जाकर तो देखो,

वहाँ बच्चे भुखे तो मिलेगें, मगर उदास नही.

दोस्ती तो बच्चे ही कर सकते हैं, बड़े तो समझौते और सौदेबाज़ी करते हैं !
माता-पिता बच्चों के नक़ली दोस्तों और बच्चे माता-पिता के नक़ली रिश्तेदारों को पहचानने में माहिर होते हैं..!!
एक बच्चे के लिए बचपन की यादें ही उनके आने वाले कल को खूबसूरत बनाती है,

_ इसलिए हो सके तो अपने बच्चों को संस्कार से ज्यादा प्रेम दें, ताकि वो प्रेम पाने के लिए गलत संगत का सहारा न ले.!!

अब तो बच्चे भी परिंदों जैसे हो गए हैं,

_ साथ रह कर बड़े होते हैं __ और बड़े हो कर उड़ जाते हैं..

बच्चे जल्दी-जल्दी घर आने चाहिएं.

_ एक उम्र के बाद मां-बाप मुरझाने लगते हैं “बच्चों के बिना”.!!

अपनी बच्चों से दोस्ती रखो, ताकि वो अपनी हर बात आप से शेयर कर सके.

_ वरना बुरे लोग घात लगाए बैठे हैं, उसे बुरा बनाने के लिए.!!

बच्चों की परवरिश में केवल आर्थिक उन्नति को शामिल मत कीजिए..

_ बल्कि मानसिक उन्नति को भी शामिल कीजिए.!

क्या हम अपने बच्चों को एक टॉप-ग्रेड मशीन बना रहे हैं, या एक समझदार इंसान ?
जिन बच्चों को बार-बार ताना मारा जाता है.. वो कोशिश करना छोड़ देते हैं.

_ जिन बच्चों को मारा पीटा जाता है.. वो डरपोक बन जाते हैं.
_ जिन बच्चे का मजाक बनाया जाता है.. वो आत्मविश्वास खो देते हैं.
_ जिन बच्चे पर विश्वास नहीं किया जाता है.. वो विद्रोही बन जाते हैं.
_ जिन बच्चों की तारीफ नहीं की जाती है.. वो अपने आप को पसंद करना छोड़ देते हैं.
_ कभी सोचा है हमारे व्यवहार से हमारे बच्चे क्या सीख रहे हैं.
_ बच्चो को फूलों की तरह सम्भालिए, उनका उत्साह बढाइये, मोटिवेशन दीजिए.
_ डराने धमकाने से.. सीखने की गति सौ गुना कम हो जाती है.!!
बचपन का समय एक ऐसा समय होता है…

_ जहां पर वास्तव में जीवन की असली खुशियां मिलती है..
_ कोई जिम्मेदारी नहीं… दुनियादारी नहीं …मन में किसी तरह का छल कपट नहीं…
_ बचपन का समय एक ऐसा समय होता है…जहां पर वास्तव में जीवन के असली खुशियां मिलती है..
_ जीवन में मिलने वाली छोटी-छोटी चीज भी कितनी अच्छी लगती है..
_ जीवन में बचपन का समय तो गुजर जाता है..
_ लेकिन बचपन की खुशियां कुछ तो विशेष होती हैं…
_ जिसके गुजर जाने के बाद अहमियत और बढ़ जाती है..
_ मां-बाप के साथ बीते हुए पल.. उनके द्वारा बनाया हुआ खुशी का माहौल…
_ कम में कैसे खुश रहना है…पता नहीं…
_ वो वक्त बहुत अलग था.. सादगी और मासूमियत से भरा जीवन..!!
” बचपन की यादों का सफर “

*************************
ए बचपन, मीठा कितना था तेरा सफर
प्यारा कितना, तेरी यादों का सफर
बीत गए कितनी जल्दी बरस दर बरस
पर ठहर गया तेरी बातों का सफर ।
किताब मांगना, फिर उसे लौटा देना
छत पर आना उसका, वो रातों का सफर।
रूठना बिना बात मेरा, मनाना तेरा
देखना साथ हमारा, तारों का सफर।
क्यों हुआ बचपन की बातो का छिड़ना
हां वो मास्टर जी की बेतों का सफर।
होली में भीगना, गुब्बारे फोड़ना
बहुत सुहाना था त्योहारों का सफर।
याद है वो हौज पे घंटो नहाना
सुहाना था सुबह की सैरों का सफर।
याद वो कपिल का वर्ल्ड कप जीतना
रेडियो पर मुकेश के गानों का सफर।
जून की तपती दोपहरी में खेलना
प्यारा लू से बेपरवाहियो का सफर।
वो नानाजी का प्यार से पढ़ाना
उनकी बेपनाह मुहब्बतों का सफर।
सिलसिला छिड़ा तो, उसका बंद न होना
ए बचपन, मीठा कितना था तेरा सफर
प्यारा कितना, तेरी यादों का सफर
आज बच्चों को शोर मचाने दो

कल जब ये बड़े हो जाएँगे
ख़ामोश ज़िंदगी बिताएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
गेंदों से तोड़ने दो शीशें
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
दिल तोड़ेंगे या ख़ुद टूट जाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
बोलने दो बेहिसाब इन्हें
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
इनके भी होंठ सिल जाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
दोस्तों संग छुट्टियों मनाने दो
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
दोस्ती-छुट्टी को तरस जाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
भरने दो इन्हें सपनों की उड़ान
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
पर इनके भी कट जाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
बनाने दो इन्हें काग़ज़ की कश्ती
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
ऑफ़िस के काग़ज़ों में खो जाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
खाने दो जो दिल चाहे इनका
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
हर दाने की कैलोरी गिनाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
रहने दो आज मासूम इन्हें
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
ये भी “#समझदार” हो जाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
एक सुझाव : – ध्यान रहे कि मैं बच्चे के जन्म के खिलाफ नही हूं..

_ _लेकिन जब हमें पता है कि बच्चे के जन्म होते ही क्या होने वाला है.. उसके साथ..
_ तो हम सोच सकते हैं कि क्या करना है,
_ यदि आप उन छोटे बच्चों का ध्यान जीवन भर रख सकते है तो जरूर जन्म लेने दें और उनका ख्याल रखें.
_ लेकिन ये भी ध्यान रहे कि बिना सोचे समझे बच्चे पैदा न करें..!!
_ हर कोई कह सकता है कि वो बच्चे चाहते हैं, लेकिन सभी बच्चे पालने में सक्षम नहीं होते.!!
_ हमारी सबसे बड़ी कमी, बच्चे तो पैदा कर लेते हैं, पर उन्हें कैसे पालना है, उनकी कैसी परवरिश करनी है, पता नहीं होता,
_ और ऐसे लोग ही आगे चलकर मनोविकार से ग्रस्त हो जाते हैं, मेंटल हेल्थ से गुजरते हैं.
हम बच्चे पैदा किसकी खुशी के लिए करते हैं ?
_ इस दुनिया मे जंहा तकलीफ, दुख, संताप, संघर्ष, धोखे भरे पड़े हैं,
_ ये सब जानते हुए भी क्यों माँ बाप एक और जिंदगी ला रहे हैं ?
_ सिर्फ बाप को समाज को साबित करना है कि मै नपुंसक नहीं हूँ और औरत को कि मैं बांझ नही हूँ.
_ फिर कौन उस से पूछ रहा है कि तु इंसान बनेगा या हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई ?
_ सब मां बाप धर्म थोप रहे हैं.
_ माता पिता को माफ कर दें बच्चे, उनको इस घटिया इंसानो की दुनिया में लाने के लिए तो भी बहुत है..!!
जब बच्चों के लिए सही होशपूर्ण- सचेत वातावरण और परवरिश न हो तो उन्हें जन्म क्यों देना.!!
माता-पिता बनने के लिए योग्यता और पात्रता होनी चाहिए, हर कोई माता-पिता बनने में सक्षम नहीं होता, खराब पालन-पोषण का परिणाम आपराधिक प्रवृत्ति को ही बढ़ावा देता है, यदि बच्चे ठीक से प्रेम प्यार से पाले नहीं जाते तो पैदा ही न करें.

_ भारत में ज्यादातर पुरुष बाप बन जाते हैं, पिता कुछ ही बन पाते हैं.!!

आजकल के बच्चों में जिंदगी के झटके सहने की क्षमता बहुत कम है ;
_यही कारण है कि आज मानसिक अवसाद और तनाव अधिक व्याप्त है.!!
सामाजिक ताने बाने के भीतर आखिर हमने ऐसा खोखला डर क्यों बनाया हुआ है कि,
_ हम अपने ही घरों के बच्चों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को समझ नहीं पा रहे हैं.
बच्चों को बचपन में केवल एक अनुशासन सिखाइए कि अपनी चीज़ें सही जगह पर रखो.

_ बड़े होने पर उन्हें अपना जीवन सही जगह पर रखना आ जाएगा.
कभी-कभी होता यूँ है कि हम जिसे बच्चा समझ कर समझा रहे होते हैं,
_ वो अपनी विचारधारा में हमसे भी बड़े होते हैं.. वो खुद जानते हैं हर परिस्थिति से बाहर निकलना..!!
बच्चों को उड़ने से मत रोकिए._

_ वे कई बार गिरेंगे, कई गतिविधियों/कोर्सेज़ में पैसा व समय भी खराब करेंगे.
_ फिर भी उन्हें मत रोकिए.
_ अगर वे खुश होकर उड़ेंगे, तो उड़ते-उड़ते एक न एक दिन अंबर को छू ही लेंगे.
_ घर वालों को चाहिए कि वे अपने बच्चो के जीवन को बहोत कंट्रोल न करें…!
अपने बच्चों को खुद अपने सपने बुनने दीजिए..

_ उसे पूरा करने के लिये.. उसके सारथी बनिये..
_ मगर, उसकी आँखों में अपना सपना मत बो देना..
_ बच्चे की आंखों में परिवार का बोया सपना बड़ा भारी होता है..
_ वह सपना बच्चे को बूढ़ा कर देता है.. ‘उसे थका देता है’
_ दूसरों का सपना, सबसे पहले बचपन चट कर जाता है और फिर बाकी का जीवन..!!
माता-पिता कृपया अपने बच्चों पर अपने सपने मत थोपें, बच्चों के जो मनपसंद विषय है, उन्हें चुनने दें..
_ ताकि वो अपने भविष्य का निर्माण हंसते खेलते तनाव रहित होकर कर सकें..!!
संघर्ष में पले बच्चे भटक नहीं सकते, उन्होंने कामयाबी से पहले पसीना देखा होता है.
मै और मेरी पत्नी कभी अपनी बच्चों पर अपना सपना नहीं थोपते,

_ हमनें बच्चों को बोल कर रखा है कि.. आपसे ज्यादा हमारे लिए कुछ कीमती नहीं..
_ सही गलत की शिक्षा देते रहते हैं,
_ और फिर भी कोई बात हो या कोई गलती..
_ उसके लिए वो हमसे बेझिझक बात करे.. ऐसा माहौल बनाया है..!!
जीवन वाकई में दुखों और कष्टों की सेज है..

_ पर फिर लगता है कि हमारा क्या भरोसा, हम कब तक रहेंगे, और इस लिए बच्चों को आगे बढ़ने के लिए, स्वछंद उड़ान भरने की लिए अपने कलेजे पर पत्थर रखना ही पड़ता है..!!
पेरेंटिंग पर अधिक से अधिक बात, विचार, किताबें होनी चाहिए,

_ क्योंकि साबित हो चुका है कि अधिकांश पेरेंट्स केवल बच्चे की पढ़ाई, खिलौने, खाने आदि ज़रूरतों को पूरा करना ही पेरेंटिंग समझते हैं,
_ उनकी भावनात्मक, संज्ञानात्मक ज़रूरतों की जानकारी.. उन्हें इस आपाधापी भरे जीवन में नहीं हो पाती..!!
बच्चों की अपनी जिंदगी होती है, उन्हें जीने दीजिए,

_ वे साथ दें तो धन्यवाद, साथ न दें तो भी आशीर्वाद दें >>’वृद्धावस्था में स्वयं स्वाबलंबी और समर्थ बनें रहें, बाकी सब मिथ्या..!!
_ फिर साथ मिले या आदर- सत्कार मिले तो ” सोने पर सुहागा “
स्वयं को अक्षम समझना हमें हीन, कमजोर और लाचार बनाता है,

_जबकि दूसरों में दोष देखना, हमें परछिद्रान्वेषी, घमंडी, ईर्ष्यालु, बहानेबाज और गैरजिम्मेदार बनाता है.
_मनुष्य के लिए आदर्श और सकारात्मक सोच है- मैं सही, तुम भी सही..
_ डा॰ एरिक बर्न की उक्त कसौटी पर माता-पिता और उनके बच्चों के मध्य विकसित होने वाले मनोभावों को आसानी से समझा जा सकता है.
_बचपन में माता-पिता पर निर्भरता बच्चे पर उनके प्रति अनुकूल प्रभाव रखती है,
_लेकिन उस निर्भरता के समाप्त होते ही, वह आत्म-स्वतन्त्रता की ओर उन्मुख होने लगता है.
_माता-पिता का मार्गदर्शन और आदेश उसे नहीं सुहाता.
_ दरअसल, वयस्क मन स्वयं समझ विकसित करके निर्णय लेना चाहता है,
_जिसमें माता-पिता उसे बाधक समझ आते हैं.
_यहीं से उनके मध्य मतभेद उत्पन्न होने लगते हैं,
_जो धीरे-धीरे मनभेद की ओर बढ़ जाते हैं, और कालांतर में संघर्ष का रूप ले लेते हैं.
– द्वारिका प्रसाद अग्रवाल [ लेखक ]
अपने बच्चों से प्यार कीजिए, उन्हें बात-बात पर लज्जित मत कीजिए ;

_ कभी किसी बच्चे से तुलना करते हुए उसे कमतर मत बताइए.
_ बच्चा गलती कर सकता है, उसकी कुछ गलतियों की अनदेखी कीजिए.
_ मौका मिले तो समझाइए, बात कीजिए, लेकिन जलील मत कीजिए.
_ कोई उसकी आपसे शिकायत लगाए, तो भी अपने बच्चे को प्रोटेक्ट कीजिए.
_ कहिए कि वो छोटा है, टीन एज में है, नासमझ है,
_ पर उनकी हां में हां मिला कर बच्चे का दिल मत तोड़िए.
_ बच्चे अपने मां-बाप की ओर बहुत हसरत भरी नज़रों से देखते हैं.
_ उन्हें उम्मीद होती है कि जब पूरा संसार उनके विरुद्ध हो जाएगा, तब भी मां-बाप खड़े रहेंगे ..उसकी तरफ से.!!
— हर मां-बाप को अपने बच्चों से बात करनी चाहिए, उनके दिल का हाल पूछिए.
_ उनसे स्कूल में होने वाली गतिविधियों पर चर्चा कीजिए.
_ वो कभी पार्टी करना चाहे तो करने दीजिए.
_ आखिर उसे इसी संसार में बड़ा होना है, जीना है.
_ हर छोटी-बड़ी बात पर उसका मूल्यांकन मत कीजिए और टीचर से जब मिलने जाएं तो उनकी ओर से नहीं, अपने बच्चे की ओर खड़े दिखिए.
_ बच्चे सही मायने में भविष्य की अमानत हैं.
_ उन्हें बड़ा कीजिए. प्रोडक्ट बना कर नहीं, इंसान बना कर.
_ उनमें भरोसा जताइए.
_ भरोसे से प्यार बढ़ता है, प्यार से नजदीकियां..
_ अपने बच्चे के नज़दीक आइए..
— प्यार ही हर रिश्ते की बुनियाद है.
_ जब आप बच्चे को डांटेंगे, फटकारेंगे, जलील करेंगे तो प्यार कम होगा.
_ जब प्यार कम होगा ..फिर रिश्ते रहें न रहें क्या फर्क पड़ने वाला है ?
_ किसी को डांटना, पीटना रिश्तों की कड़ियों को टूटने देना है.
_ मत टूटने दीजिए रिश्तों की कड़ियों को.
_ प्यार ज़िंदगी है, प्यार बंदगी है, प्यार से प्यार कीजिए.
_ आदमी वही आदमी होता है, जो प्यार करना जानता है.
हर इंसान की चाहत होती है कि उसकी कद्र हो और उसके अस्तित्व की अहमियत समझी जाए, ये बात दुनिया को बताई जाए..

_ हर किसी के अंदर एक बच्चा दुबकी मार के बैठा है..
_ जो गलतियां कर कर के सीखता रहना चाहता है पूरा जीवन..
_ इस बात को आप नकार सकते हो ..चूंकि ये आपके बड़प्पन के आड़े आ रहा होगा..
_ लेकिन मन ही मन सोच रहे होंगे कि __ मन की बात कह दी बच्चे ने !!
भारतीय समाज में विवाह और संतानोत्पत्ति की एक सुविचारित, सुदृढ़ और सुदीर्घ परंपरा के कारण माता पिता बनना बहुत आसान और अनिवार्य कार्य समझा जाता है..

_ बच्चे को जन्म देना, पढ़ाना लिखाना, खिलाना पिलाना और फरमाइशें पूरी करना ही यहां पेरेंटिंग समझा जाता है जबकि उसके संवेदात्मक, भावनात्मक विकास के लिए माहौल तैयार करना कोई ज़रूरी काम या जिम्मेदारी नहीं मानी जाती..
_ अधिकतर परिवारों में बेहद टॉक्सिक माहौल होता है, मां बाप बच्चों के आगे ही आपस में या परिवार, पड़ोस से झगड़ते, गाली गलौच करते हैं बिना यह सोचे कि इसका बच्चे के ऊपर क्या प्रभाव पड़ेगा !
_ बिना मानसिक, आर्थिक, शारीरिक तैयारी के, बिना प्लान के बस शादी हो गई है तो बच्चा पैदा करना है के दबाव, आदत, परम्परा के कारण बच्चे पैदा कर दिए जाते हैं और फिर कभी उस बच्चे के कारण या उसे मोहरा बनाकर सारी जिंदगी लोग झगड़ते ,भटकते रहते हैं..
_ जिसे दुनिया में ला रहे हैं उसके लिए एक सुंदर दुनिया बनाने और उसे दुनिया को सुंदर बनाने लायक करना लोगों को नहीं आता…जब बच्चों से पूछकर उन्हें पैदा नहीं किया जाता तो पैदा होने के बाद वह किस बात की कीमत ज़िंदगी भर चुकाते हैं..
_ पारिवारिक, सामाजिक, शारीरिक, आर्थिक सुविधाएं देकर बच्चों का मानसिक शोषण करना, उन्हें नीचा दिखाना,पालन पोषण का ताना देना और ज़िंदगी भर उनके हर कदम की आलोचना करना और अंत में असहाय होने पर उन्हीं बच्चों से प्यार, इज़्ज़त,देखभाल की अपेक्षा करना यहां आम बात है..
_ घर नाम की जगह को इतना सुकून भरा,प्यार भरा और भरोसे भरा होना चाहिए कि पढ़ने, कमाने या दुनिया देखने निकला बच्चा बार बार वहां लौटना चाहे, वर्ना तो जिसे जब जैसा बहाना, मौक़ा मिलेगा वह घर छोड़ जाएगा फिर आप रोते रहिए नए ज़माने को..
_ बच्चों से ज़्यादा यहां पेरेंट्स को ट्रेनिंग की ज़रूरत है…
– Mamta Singh
कुछ लोग तो आज के दौर में भी इतने गैर जिम्मेदार होते हैं.. ऊपर वाले के भरोसे बच्चे पैदा करते हैं..

_ और उनमें से कुछ आज भी ऐसे होते हैं जो लड़के की चाहत में बच्चे पैदा करते जाते हैं, _ गैर जिम्मेदाराना तरीके से इस तरह अनियमितता लाना… अपने स्वयं के साथ और धरती के साथ अन्याय है,
_ साथ ही उस बच्चे के साथ भी जिसे अनचाहे तरीके से आप जन्मते हो..
_ पति पत्नी का साथ एक संतुलित व्यवस्था है.. इसे असंतुलित ना करो,
_ यदि अपने मनोरंजन के लिए तुम किसी का जीवन खराब करते हो और इस धरती को.. तो तुम मनुष्य नहीं हो..!!
– Rhythm Rahi
हम पूरी उम्र गुज़ार देते हैं श्रम करते हुए कि बच्चों का जीवन बनाना है, ताकि उन्हें भविष्य में कोई तकलीफ़ न उठानी पड़े.

_ उस समय हम बच्चों को ज़्यादा वक़्त नहीं दे पाते.
_ जब हम सारे फ़र्ज़ पूरे करके खाली होते हैं, और बच्चों के साथ वक़्त बिताना चाहते हैं तो बच्चों के पास वक़्त नहीं होता.
_ यही जीवन की विडम्बना है.!!
– Manika Mohini
बच्चों के लिए केवल यह शिक्षा काफी नहीं है कि अच्छे बनो,

_ बल्कि उन्हें यह भी सिखाया जाना चाहिए कि यदि कभी बुरों से पाला पड़ जाए तो उनसे कैसे निबटो ?
_ सिर्फ़ इतना बताना पर्याप्त नहीं है कि अच्छाई क्या है बल्कि यह भी कि बुराई क्या है.
_ अन्यथा वे अच्छाई तो सीख लेंगे, पर उन्हें बुराई से बचना नहीं आएगा.
_ यूँ तो किसी को बीच नदी में धकेल दो तो वह जान बचाने के लिए हाथ पाँव मार ही लेगा,
_ पर यदि उसे तैरना आता होगा तो उसके लिए आसानी होगी.
_ वैसे कुछ ही बातें होती हैं जो बच्चों को बैठा के सिखाई जाती हैं.
_ वस्तुतः बच्चे अपने बड़ों के आचरण से सीखते हैं.
_ जैसा बड़ों को करते देखते हैं, वही सीखते हैं.!!
– Manika Mohini
जो-जो पेरेंट्स अपने बच्चों को निकम्मा, निठल्ला और कमीना बोलते हैं ना, तो मैं बताती हूँ, वो पेरेंट्स खुद निकम्मे हैं.

_ अरे भाई, अगर किसी बच्चे से एग्जाम पास नहीं हो पाया तो इसमें उसकी क्या गलती है ?
_ बिना रिसोर्सेज के पहले तो बच्चे पैदा कर रखे हैं इतने सारे, खाने को दाने नहीं हैं, ऊपर से फालतू का प्रेशर, ‘तू IPS बन जा, तू IAS बन जा, हमारे सपने पूरे करके दिखा दे.’
_ अरे भाई, तुम खुद क्यों नहीं कर रहे अपने सपने पूरे ?
_ तुम अच्छे पेरेंट्स कहाँ से हो गए ?
_ तुम ही दे देते उसको 20-30 करोड़ रुपये, बताओ ?
_ उसको तो ज़रूरत नहीं थी, IAS-IPS का एग्जाम पास करने की और अगर एग्जाम पास नहीं हो रहा है, तो इसमें बच्चे की क्या गलती है ?
_ 300 सीट्स हैं, 10 करोड़ बच्चे पैदा कर रखे हैं, सब लगे पड़े हैं उसी अंधी दौड़ में.
_ नहीं होगा यार सब का, 300 का होगा बस.
_ अब यह चीज़ उनकी समझ में नहीं आती तो क्या करें,
_ अपने ऊपर फालतू का लोड मत लो कि ‘मैं एग्जाम में पास नहीं हो पाया, मैं फेल हो गया, अब माँ-बाप के सपने पूरे नहीं कर पाया’
_ तुम्हारी कोई ज़िम्मेदारी नहीं है अपने माँ-बाप के सपने पूरे करने की, तुम सिर्फ़ अपने जीवन को देख लो.
_ वो अपने सपने खुद देख लेंगे और जो वो अपने सपने पूरे नहीं कर पाए, तो इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है, वो उनकी खुद की गलती है.
​_ मैं उस लड़के को पर्सनली नहीं जानती थी, लेकिन जब मैंने उसकी फेसबुक प्रोफाइल देखी, तो उसके बायो (Intro) में लिखा था “wubba lubba dub dub”, जिसका मतलब होता है “मैं बहुत तकलीफ में हूँ, मेरी मदद करो”
_ यह डायलॉग प्रसिद्ध कार्टून ‘रिक एंड मॉर्टी’ का है.
_ हम सब जानते हैं कि आत्महत्या किसी समस्या का हल नहीं है, लेकिन इसके लिए किसी को मजबूर कर देना बेहद घटिया मानसिकता है.
_ यहाँ तक कि सबसे ताकतवर इंसान भी लगातार मिल रही असफलताओं से टूट जाता है.
_ कोई व्यक्ति निराशा और अंधेरे के किस दौर से गुजर रहा है, उसकी गहराई का अंदाजा लगाना हमारे बस में नहीं है.
_ आखिरकार, हम इंसान ही तो हैं.
_ यकीन मानिए, खुद को संभाल कर रखना कभी आसान नहीं होता, खासकर तब जब वो सूरज जो आपके दोस्तों पर प्यार से चमकता है, आप पर दयाहीन होकर झुलसाने लगे.!
– Neha Chandra
अपने बच्चों को अपने पास रखिए – मत भेजिए बाहर, शिक्षा में चालीस साल काम करके यही समझ आया है कि मटके में पानी उतना ही आयेगा – जितना घर के नल में – आप चाहे उसे समंदर में रख दो.

_ अबोध किशोर या युवाओं को किसके भरोसे बाहर भेज रहे हो आप, इस सरकार के – जो खुद गैर जिम्मेदार, लापरवाह, भ्रष्ट निकम्मी, और हरामखोर है, न्यायपालिका के भरोसे – जिसके न्यायाधीश करोड़ों के नोट जला देते है और फिर भी नौकरी करते रहते है, मीडिया के – जो दलाली के अलावा कुछ नहीं कर रही.
_ बच्चे आपके बुढ़ापे का सहारा है, आपने मन्नतों से पैदा किया, हसरतों से पाला – अपना पेट काटकर और भेज दिया – एक गैर जवाबदेह तंत्र के भरोसे, गलती बच्चों की नहीं – आपकी है, या तो आप खुद जाकर साथ रहिए या फिर उन्हें अपने पास रखिए – जैसा भी हो आधी रोटी खाकर गुजर – बसर करिए, पर अपनी महत्वकांक्षाओं के लिए अबोध बच्चों की बलि मत चढ़ाइए मेहरबानी करके.
_ देवास का यह किशोर देखिए कितना छोटा है और दिल्ली या कोई भी महानगर लील जाते है जीवन, हम सबको पता है – फिर भी आपको समझ नहीं आ रहा.!!
_ रक्षाबंधन मनाकर लौटा था देवास का अर्पित कल सुबह ही साढ़े नौ बजे दिल्ली पहुंचा और दोपहर डेढ़ बजे खत्म हो गया – उफ्फ, कितना दर्दनाक है यह सब, दो लाख के मुआवजे से क्या यह सरकार हमारे शहर का किशोर लौटा सकेगी, कब तक हम नागरिक के रूप में चुप रहेंगे, अपने जीवन से समझौते करते रहेंगे,
_ अस्सी साल के बाद मूल सुविधाएं और देखरेख का तंत्र यदि हम ईजाद नहीं कर पाएं है तो लानत है ऐसी सरकार पर और पूरे तंत्र पर.!!
-Sandip Naik

सुविचार – टाइम मैनेज – 016

~~ समय ~~

आप यह नहीं कह सकते कि आपके पास समय नहीं है क्योंकि आपको भी दिन में उतना ही समय (24 घंटे) मिलता है जितना समय महान एंव सफल लोगों को मिलता है.

परिवार, पुस्तक एवम प्रकृति के साथ समय बिताना सिख जाओ…

_ वरना समय भी एक समय तक ही मोहलत देता है…!!!!

धन बर्बाद कर के आप निर्धन होते हैं, _

_ लेकिन समय बर्बाद कर के आप अपना जीवन नष्ट करते हैं..!!

कई लोग ऐसी बातों के बारे में सोच रहे हैं, जो कभी होने वाली नही है, खैर !…
_ यह भी एक अच्छा टाइम पास है.!!
समय एक नदी की तरह है. आप एक ही पानी को दो बार नहीं छू सकते, क्योंकि जो प्रवाह बीत चुका है वह फिर कभी नहीं गुजरेगा.; _अपने जीवन के हर पल का आनंद लें !

Time is like a river. You cannot touch the same water twice, because the flow that has passed will never pass again. Enjoy every moment of your life !

समय मुफ़्त है, लेकिन अमूल्य है ; _ आप इसके मालिक नहीं हो सकते, लेकिन आप इसका उपयोग कर सकते हैं.

आप इसे रख नहीं सकते, लेकिन आप इसे खर्च कर सकते हैं ; _ एक बार आपने इसे खो दिया तो आप इसे कभी वापस नहीं पा सकते..

हम अपने जीवन में सबसे बड़ी गलती यह सोचते हैं कि हमारे पास समय है.

Time is free, but it’s priceless. You can’t own it, but you can use it. You can’t keep it, but you can spend it. Once you’ve lost it you can never get it back. The biggest mistake we make in our life is thinking we have time.

अगर हम रोजाना अपने कामों की लिस्ट बनाएँ और टाइम मैनजमेंट के अनुसार उन्हें निबटाएँ, तो सारे काम बड़े आसानी से हो सकते है. इधर- उधर की चीजों में , बेकार के तनाव में अपना समय न गँवाएँ — स्मार्ट वर्किंग से काम पूरा करें और अपनी ज़िन्दगी को एन्जॉय भी करें.

जो लोग यह कहते हैं ” मेरे पास बहुत काम है, वक्त नहीं है….. ” दरअसल वे लोग दिशाहीन होते हैं, उन्हें खुद को मैनेज करना नहीं आता.

एक बात जान लीजिए – समय एक ऐसा संसाधन है जिसका भविष्य के लिए संग्रह नहीं किया जा सकता है. अमीर हो या गरीब, सभी के पास एक दिन में चौबीस घंटे ही होते हैं. जो समय चला जाता है, उसे वापस कभी नहीं लाया जा सकता है.

इसलिए समय का अधिक से अधिक इस्तेमाल करना चाहिए. जब कभी लगे कि समय कम पड़ गया है, तो अपना एक रूटीन बना लेना चाहिए. जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए टाइम मैनेजमेंट में पारंगत होना जरुरी है. ऐसा नहीं होने पर कभी लगेगा समय कट नहीं रहा है और कभी अनुभव होगा कि समय है ही नहीं- इसलिए समय से पंगा नहीं.

समय का सदुपयोग किन किन चीजों में है ये बात हमें पता होनी चाहिए. एक ही टाइम टेबल 365 दिन काम नहीं आता. हमें समय का पूर्ण सदुपयोग करना चाहिए.
Time management  का सबसे अच्छा तरीका यह है कि सबसे पहले आप यह पता लगाएं कि आपका समय कहाँ बर्बाद हो रहा है. अगर आप ये पता लगा पाए तो आप उन सभी कार्यों को छोड़ सकते हैं जो आपका टाइम वेस्ट कर रहे थे.
सोचिये यदि आप कोई जरुरी कार्य कर रहे हैं और तभी आपका कोई दोस्त आ जाता है और आपसे बातें करने लगता है. ऐसे समय में आपको उससे अच्छे शब्दों में “न” कह देना चाहिए, वरना आपका टाइम वेस्ट हो जायेगा.
ध्यान दीजिए, क्या आप व्हाट्सप्प या फेसबुक पर कितना समय देते हैं. क्या आप ज्यादा टीवी देखकर अपना टाइम वेस्ट तो नहीं कर रहे. अगर ऐसा है तो तुरंत सावधान हो जाएँ और ऐसे तरीके अपनाएं जिससे आपका टाइम वेस्ट न हो और आप समय बचा कर उसे अच्छे कार्यों में प्रयोग कर सकें.

सुविचार – ईर्ष्या – ईर्ष्यालु – द्वेष – घृणा- कुढ़ना – नफ़रत – नफरत – जलन – 015

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दूसरे की तरक्की से जलना नहीं चाहिए..

_ इंसान के पास अपनी ही खुशियां इतनी होनी चाहिए कि दूसरे की खुशी से जलने का समय न बचे.
_ लोगों की तारीफ़ करना सीखिए..
_ उनकी खुशी में शरीक होना सीखिए… खुश रहना सीखिए.
_ न जलिए, न जलाइए.. – ज़िंदगी इन बातों से आगे की कहानी है.
_ “किसी से जलना- उसकी ज़िंदगी को रौशन करना होता है, जिससे आप जलते हैं”
– Sanjay Sinha
यदि आपसे कोई व्यक्ति ईर्ष्या करता है, तो उससे नफरत ना करें, क्योंकि यही लोग जानते है कि आप उनसे बेहतर हैं.

दरअसल, ईर्ष्या हमारे व्यक्तित्व और स्वभाव का हिस्सा है. कम या अधिक हर किसी में ईर्ष्या विद्यमान होती है. एक कहावत है, ईर्ष्या आदमी को उसी प्रकार खा जाती है, जैसे कपड़े को कीड़ा. ईर्ष्या व्यक्ति को अशांत और क्रोधी बना देती है. इसका बोझ आपको दुनिया का सबसे दुखी व्यक्ति बना देगा.

ईर्ष्या आत्म- विश्वास की कमी से पैदा होती है और आत्म- विश्वास का साथी है ज्ञान. आप अपने ज्ञान की धार मजबूत करके ईर्ष्या से मुक्ति पा सकते हैं. यदि हम अपने जीवन में ऐसा कर पाये तो कोई भी नकारात्मक शक्ति हमें अपने डगर से विचलित नहीं कर पायेगी.
ईर्ष्या, राग, द्वेष जैसे कुविचारों को अपने पास फटकने न दें. किसी की उन्नति और विकास को देख कर, चिढ़ने, कुढ़ने के बजाय अपने कर्म पर भरोसा रखें. धैर्य रखें और प्रतीछा करें.
अगर कोई व्यक्ति दूसरे को खाता- पीता देख कर, फलता- फूलता देख कर, सुखी होता देख कर, उन्नति करता देख कर मन में जलता हो, उसे ईर्ष्या आती हो, बुरा सोचने लगता हो..

– हम इनसान हो कर यह आदत अपनाएँ, तो हमारे लिए यह अच्छी बात नहीं है.
हर छोटी-छोटी बात पर किसी के प्रति द्वेष रखना अक्सर इंसान की संकीर्ण और ओछी मानसिकता को दर्शाता है.

_ क्योंकि समझदार व्यक्ति मतभेदों को दिल में बोझ बनाकर नहीं रखता,
_ वह बातों से आगे बढ़ना जानता है,
_ जबकि छोटी सोच वाले लोग हर बात में दुश्मनी तलाश लेते हैं.!!
ईर्ष्या से ग्रसित होकर किसी की निन्दा कर उसका नुकसान करने का प्रयास नहीं करना चाहिए,

_ क्योंकि पलटवार होने पर इसका परिणाम घातक हो सकता है.

एक समझदार व्यक्ति वह है, जो दूसरों को देख कर उनकी विशेषताओं से सीखता है,

_ उनसे तुलना या ईर्ष्या नहीं करता.

अंजान लोग नापसंद करते हैं, नफ़रत नहीं.!!
अपना बना कर छल करना ये तो पुराना रिवाज है..

_ किंतु ईर्ष्या रखने वालों का आप कुछ नहीं कर सकते सिवाय दूरी बरतने के…हमने ये बात गाँठ बाँध ली है;
_ ऐसे लोगों को इग्नोर करना और खुश रहना _क्योंकि “बात उनकी होती है.. जिनमें कोई बात होती है”
_ जीवन अनमोल है.. इसे किसी ऐरे-गैरे के लिए दुखी नहीं करना है.!!
Because…”जिंदगी मिलेगी न दोबारा”
किसी के लिए सारे दरवाजे बंद करने के बाद भी लोग खिड़कियों से झांकना बंद नहीं करते !!
कुछ लोग दूसरों की ज़िंदगी में झांकने में ही अपना क़ीमती वक्त जाया कर देते हैं..

_ और ये ही आदत_उनकी ज़िंदगी को तबाह कर देती है, क्योंकि ये आदत ईर्ष्या की जननी है.. ..!

मन में नफ़रत पालने की बजाए उन लोगों से दूरियां बना लेना ज़्यादा बेहतर है..

_ जो आपकी अहमियत नहीं समझते हैं.!!

जब किसी के मन में आपके लिए ज़हर भर गया हो,

_ तो फिर आपकी सारी अच्छाई भी उसे छलावा ही लगती है.
_ एक बार घृणा बस जाए —
तो कोई दलील, कोई सच — कुछ भी असर नहीं करता.!!
जब हम किसी अन्य से तुलना करने लगते हैं, तो ईर्ष्या का जन्म होता है और हमें यह भी नहीं पता चलता कि हम कब इसके प्रभाव में आकर अपना कीमती समय व्यर्थ कर देते हैं.
_ इस ईर्ष्या से सावधानी बरतना आवश्यक है.!!
कभी-कभी लगता है कि दूसरों की तरक्की देखकर हमें ईर्ष्या करने से ज़्यादा ये सोचने की जरुरत है कि “हम उनसे पीछे क्यों हैं ?”

और हमें गुस्सा आता है कि “उनके पास यह सब क्यों है ?”
_ लेकिन असली विकास शायद वहाँ शुरू होता है जहाँ तुलना और ईर्ष्या की जगह सवाल आता है –
“उन्होंने क्या ऐसा किया, जिसे हम भी सीख सकते हैं ?”
दूसरे की तरक्की से ईर्ष्या करना आसान है,
_ उससे सीखकर अपनी व्यवस्था और खुद को बदलना मुश्किल.!!
अपने मन में किसी के प्रति नफरत रखने की बजाय..

_ अपनी ज़िंदगी से उनके अस्तित्व को ख़त्म कर देना ज़्यादा बेहतर है.!!

नफ़रत करने वालों की नापसंदगी,

_अक्सर आपके सही होने की निशानी होती है.

“जब हम नेक इंसान से बेवजह ईर्ष्या करते हैं, तो प्रकृति का नियम हमारे अच्छे भाग्य को उठाकर चुपचाप उसे सौंप देता है”
नफरत वो ही करते हैं.. जो आपकी बराबरी करने की चाहत तो रखते हैं, पर हिम्मत नहीं जुटा पाते.!!
ख़तरा दुश्मनों से नहीं बल्कि अपनों से है _ वो नहीं चाहते की आपकी कीर्ति और वैभव दुनिया में बढ़े ..! ईर्ष्यालु होना ज़्यादातर लोगों की मानसिकता है !

“हम खुद को बरगद बना कर छाँव बाटते रहे, और हमारे ही हमें थोड़ा थोड़ा काटते रहे !!”

जब इंसान ईर्ष्या करता है तो वह दुनिया में आग नहीं लगाता, बल्कि अपना ही घर जला देता है और दूर खड़ा होकर चुपचाप तमाशा देखता रहता है.!!
“असली ताकत नफ़रत में है”- जिन लोगों ने भी ऊँचाइयाँ हासिल कीं, उनके अंदर एक आग थी, एक चिंगारी जो नफ़रत के बिना कभी नहीं जल सकती थी.!!
इंसान की एक स्वाभाविक प्रवृत्ति है, जिसने जीवन में कुछ नहीं किया होता है, वह उस से नफरत करता है, जिसके पास उस से ज्यादा होता है.
ईर्ष्या और द्वेष रखना आपको मजबूत नहीं बनाता, बल्कि आपको कड़वा बनाता है.

_माफ़ करना आपको कमज़ोर नहीं बनाता. यह आपको मुक्त करता है.!!

“ईर्ष्यालु लोग आपको एक प्रतियोगी के रूप में देखते हैं ;

_जबकि आप उन्हें परिवार या दोस्तों के रूप में देखते हैं.”

नफरत से भरा व्यक्ति कला का सृजन नहीं कर सकता..
_ वह केवल जहर फैला सकता है.!!
बैठ कर केवल उन लोगों से ईर्ष्या न करें, जिन्होंने अपना लछ्य पा लिया हो.

_ उनकी बराबरी का एक ही उपाय है, आप अपने काम में जुट जाएं.

“जलन वहाँ जन्म लेती है, जहाँ तुलना रहती है..
_ और तुलना वहाँ रहती है.. जहाँ इंसान खुद को भूलकर दूसरों को देखने लगता है”
दूसरों का दीया बुझाने से आपकी रोशनी नहीं बढ़ेगी;
_ अपनी तरक्की पर ध्यान दें, ईर्ष्या से कभी किसी का भला नहीं होता.!!
“नफरत बोझ है, माफी सुकून” बदला मत लो, बस सफल बनो..
_ आपकी कामयाबी ही सबसे तगड़ा जवाब है.!!
ईर्ष्या और जलन ने हमको इस स्तर तक नीच कर दिया..

_अगर तरक्की करे कोई वो हमे पसंद नहीं आता.!!

कुटिलता, चालाकी, लोभ, ईर्ष्या शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट में चार गुना से भी ज़्यादा वापसी की गारंटी देते हैं,

_ इन्हें आप अपनों में, परायों में, जहां चाहें वहां बो सकते हैं ..और यह एक बार बोने पर बार बार फसल देते हैं..

एक भिखारी अमीर आदमी से ईर्ष्या नहीं करता. _ वह उस भिखारी से ईर्ष्या करता है, जिसे उससे ज़्यादा भीख मिलती है.

_ सच यह है कि लोग अपने स्टेटस वालों से ही जलते-कुढ़ते हैं,
_ अपने से बहुत निम्न या बहुत उच्च वर्ग के लोगों से नहीं.!!
मन में किसी के प्रति ईर्ष्या और द्वेष रख कर मनुष्य सफल तो हो जाता है, _

_ पर कभी सुकून से जी नहीं पाता ..!!!

जब कोई आप पर अपनी मर्जी नहीं चला पाता है..

_ तब वो आपसे नफ़रत करने लगता है..!!

जो लोग नफरत करते हैं, उन पर तरस खाना चाहिए.

_ उनका दिमाग छोटा होता है, दिल और छोटा होता है..!!

जो लोग आपसे ईर्ष्या करते हैं..

_ वे आपके विरुद्ध बकवास करते रहेंगे और खुश होते रहेंगे.!!

नफ़रत ढोने से बेहतर है इज़्ज़त की दूरी रखकर, बिना शोर के अलग हो जाना.
कभी कभी लोगो को गलतफहमी हो जाती है कि लोग उनसे जलते हैं.!!
हृदय में द्वेष है, ज़ुबान पर प्रेम है और आजकल लोग इसे ‘बुद्धिमत्ता’ कहते हैं.!!
ईर्ष्या एक ऐसी मनोस्थिति है, जिस में प्रेम, क्रोध, विद्वेष, छोभ, अपमान और कुंठा के भाव मिले जुले होते हैं.
नफरती आदमी अपनी नफरत का तीर कभी भी किधर भी घुमा सकता है.
_ जो इनके मन की न करे तो ये उसके विरोधी हो जाते हैं.!!
ईर्ष्या का तात्पर्य यही है कि ईर्ष्या करने वाला व्यक्ति जिस से ईर्ष्या करता है, _

_ उसे वह स्वयं बड़ा मानता है.

आपको किसी व्यक्ति से ईर्ष्या हो रही हो तो समझ जाइये, _

_ आप का विचार का दायरा सीमित हो रहा है..!!!

तारीफ झूठी हो सकती है, मगर ईर्ष्या कभी झूठी नहीं हो सकती.!!
किसी से ईर्ष्या करके मनुष्य उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता है पर अपनी नींद और सुख चैन अवश्य खो देता है.

_जो ईर्ष्या करता है _ वह पहले अपना नुकसान करता है.

द्वेष रखना आपको मजबूत नहीं बनाता, बल्कि आपको कड़वा बनाता है.

_क्षमा करना आपको कमज़ोर नहीं बनाता, बल्कि आपको आज़ाद करता है.

ज़रा सी समझ बहुत कुछ सुधार सकती है, बचा सकती है.

_ नफ़रत करना बहुत आसान है ..उससे भी आसान है ..अक्ल लगाकर उस नफरत को हराना..!!

लोगों से नफरत व ईर्ष्या करना चूहे से छुटकारा पाने के लिए अपने ही घर को जलाने जैसा है.
मन में ईर्ष्या तभी पनपती है जब हम दूसरों को खुश नहीं देखना चाहते..!!
नफ़रत भी कोई करने की चीज है, सब्र कीजिए, रहम कीजिए, माफ़ कीजिए.!!
आज कल लोग होठों पर दुआ और आँखों में जलन रखते हैं..!!
कभी भी उस से अपना दुख ना कहें, जो आप से ईर्ष्या करता है..!!
ईर्षालु मनुष्य स्वयं ही ईर्ष्याग्नि में जला करता है, उसे और जलाना व्यर्थ है.!!
नफरत फैलाने वाले को बदले में नफरत ही मिलेगी.!!
‘जलन और ईर्ष्या’ खुद के छोटे होने का सबूत है.!!
कभी किसी से ईर्ष्या मत रखें, _क्योंकि कोई फायदा नहीं है

_ इससे सिर्फ दुखी ही मिलता है और गलत विचार आते हैं बस..!!

जब आपके पास कुछ नहीं होगा तब लोग आपको बेचारा समझेंगे,

_ मगर जैसे ही आप उठेंगे.. लोग आपसे ईर्ष्या करने लगेंगे.!!

नफरत, ईर्ष्या से सृष्टि का चक्र रुक जाता है.

_ मदद कीजिए ..मदद मिलेगी ..शुरुआत करके देखिए..!!

आपसे ईर्ष्या करने वाले अधिकांश लोग वही होंगे,

_ जिनकी आपने कभी अपना समझ कर मदद की थी..!!

मेरे लिए नफ़रत पालने वालों के लिए भी बेहतरी की दुवाएं मांगता हूं..

– उन्हें दुआओं की गठरी थमा के लौट आया, वो जो मुझको बर्बाद करना चाहते थे..!!
लोगों में ज्यादा उलझना अपनी ही हानि करना है.

_ लोगों को उनके हाल पर छोड़ दो.
_ लोगों से ये अपेक्षा रखना कि वे अपनी मूढ़ता, अंधविश्वास, अहंकार, ईर्ष्या, आस्था वगैरह से तुरंत मुक्त हो जायेंगे.. ठीक नहीं है.!!
नफरत एक बार मन में घुस गयी तो उससे बाहर निकलने में हमारा संदेह बाधा उपस्थित करता है.
_ जिनसे भी मुझे नफरत हुई, किसी ठोस कारण से हुई लेकिन जब भी मैंने उस नफरत को कम करने की कोशिश की, मैं असफल रहा.
_ समझ में यह आया कि एक निश्चित दूरी बनाकर रखी जाए, तुम अपने रास्ते, हम अपने रास्ते.!!
_ कुछ गलतियों की माफिया, शब्दों में तो मिल जाती है.. अंतर्मन नहीं दे पाता..!!
_ फिर सौंप दिया जाता है, उसको.. प्रकृति और ऊपर वाले के हवाले.!!
_ क्योंकि, जब इंसान खामोश हो जाता है, फैसले ऊपर से होते हैं..!!
अगर किसी के मन में दूसरों की खुशी और तरक्की देखकर ईर्ष्या की भावना है..

_ तब वह तिनका तिनका राख हो रहा है और दीमक कि तरह खोखला..
आपसे जलने वाले आपके बारे में अफ़वाहें उड़ाते हैं..

_ और बेवकूफ लोग बिना सोचे समझे उन अफ़वाहों पर विश्वास कर बैठते हैं.!!
कुछ लोग आपसे नफ़रत इसलिए करते हैँ कि आपकी मौजूदगी उनके वज़ूद को बेकार बना देती है !
ईर्ष्यालु और आपसे जलने वाला आपकी बुरी ख़बरें जानने में बहुत दिलचस्पी लेता है.!!
जब लोग आपको अपनी बातों के झाँसे में नहीं फँसा पाते,
_ तब वो आपसे नफ़रत करने लगते हैं.!!
आपसे जलने वालों की हरकतों पर कोई भी प्रतिक्रिया न दें.!!
जीवन में इज्जत और प्रेम पाने के भूखे कभी मत रहो..
_ वरना ये दुनिया ऐसे लूटेगी कि आप इससे नफरत करने लगोगे..!!
जैसे-जैसे आपकी प्रगति का स्तर बढ़ेगा,
_लोगों की ईर्ष्या का स्तर भी बढ़ेगा और आप दूर से भी उनकी ईर्ष्या की तपिश को महसूस कर पाओगे.
दूसरों की तरक्की से जलने वालों की किस्मत अकसर ठंडी ही रह जाती है !
_ आप अपने काम में लगे रहो, क्योंकि जो आपको गिराने में व्यस्त हैं, वो खुद कभी ऊपर नहीं उठ सकते !!
कुछ लोगों में ईर्ष्या और घृणा का स्तर इतना अधिक होता है कि जब वे अपने सामने वाले की सफलता और खुशी देखते हैं, तो वे…

_ वे ऊपर से तो बहुत चिकनी-चुपड़ी और बनावटी बातें करते हैं, लेकिन भीतर से पूरी तरह ख़त्म हो जाते हैं.. आपके आस-पास भी ऐसे कई होंगे.!!
आमतौर पर देखा जाता है कि जिस इंसान में ईर्ष्या अधिक होती है..

_वह किसी भी स्थिति में अधिक ही रहती है.!
कोई अगर खुश है तो ईर्ष्या मत करो, ध्यान दीजिए कि आप क्यों दुखी हैं..!!
यह देखकर बहुत ख़राब लगता है कि हमारे आस-पास के लोग बेवजह ईर्ष्या, जलन, नफ़रत और बदले की भावना रखते हैं.

_ बिना बात के एक-दूसरे को जज करते हैं.
_ वे लोगों को अपनी मर्ज़ी के मुताबिक ढालने की कोशिश करते हैं.!!
अहंकार और ईर्ष्या से ग्रस्त इंसान को जीवन में कभी भी सच्ची खुशी नहीं मिलती,

_ क्योंकि उनके मन में हमेशा दूसरों के प्रति ईर्ष्या और अपने आप को बड़ा दिखाने की चाह रहती है.
_ ऐसे लोगों को अपने जीवन में सुधार करने के लिए प्रयास करना चाहिए और अपने अंदर के अहंकार और ईर्ष्या को दूर करना चाहिए.
अक्सर हमें लगता है कि अगर कोई हमसे नफ़रत कर रहा है, तो शायद हमने कुछ गलत किया है.

_ लेकिन हकीकत यह है कि नफ़रत हमेशा जलन की वजह से नहीं होती.
_ कई बार यह इस बात का सबसे बड़ा सबूत होता है कि आप अपनी ज़िंदगी के सफर में उन लोगों से बहुत आगे निकल चुके हैं.
_ जब आप अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर भीड़ से अलग दिखने लगते हैं, तो जो लोग आपका मुकाबला नहीं कर पाते, वो अक्सर नफ़रत का सहारा लेते हैं.
_ उनकी यह कड़वाहट दरअसल उनकी अपनी हार का शोर है.
_ यह इशारा है कि आपकी रफ्तार इतनी तेज़ है कि वो आपको पकड़ नहीं पा रहे, इसलिए बस दूर से पत्थर फेंक रहे हैं.
_ इस नकारात्मकता को बोझ बनाने के बजाय इसे अपनी ‘सक्सेस रिपोर्ट’ समझिए.
_ याद रखिए, पेड़ पर पत्थर भी तभी मारे जाते हैं.. जब उस पर मीठे फल लगे हों.
_ अगर लोग आपके बारे में बातें कर रहे हैं या आपसे बेवजह चिढ़ रहे हैं, तो समझ लीजिए कि आप कुछ ऐसा कर रहे हैं.. जो वो कभी नहीं कर पाए.
_ उनकी बातों को दिल पर लेने के बजाय अपनी मंज़िल पर ध्यान लगाइए.
_ आपकी कामयाबी ही उनकी नफ़रत का सबसे करारा जवाब होगी.. आगे बढ़ते रहिए, _ क्योंकि आसमान छूने वालों को ज़मीन पर शोर मचाने वालों से कोई फर्क नहीं पड़ता.!!
उन लोगों से कभी नफरत न करें जो आपसे ईर्ष्या करते हैं,

_बल्कि उनकी ईर्ष्या का सम्मान करें, क्योंकि वे वही हैं जो सोचते हैं कि आप अद्भुत हैं.
Never hate those people who are jealous of you, but respect their jealousy, because they are the ones who think you are amazing.
नफ़रत मेरे स्वभाव में नहीं

सच कहूँ तो, ये एक choice भी नहीं
मैं उस level तक नहीं जाऊंगा
जहाँ मन ज़हर से भर जाए।😔
मैंने गुस्से में जीना नहीं सीखा,
बदले की आग में नहीं जलना
हाँ, मैंने तुम्हें माफ़ किया है।
अब मेरे दिल में तुम नहीं हो
न अच्छे में, न बुरे में।😶
मेरे मन में जगह कम नहीं–
पर उसे कचरे से नहीं भरूंगा।
थोड़ा-सा कचरा☠️
अच्छी चीज़ों की खुशबू बिगाड़ता है।
मन एक कमरा है—
जहाँ या तो शांति रहती है,
या पुराने झगड़ों की बदबू।
दोनों साथ नहीं रह सकते।❌
इसलिए मैंने तुम्हें माफ़ किया–
जो हुआ, सो हुआ।
तुमने दुख दिया, पीड़ा दी,
कई बार वो भी नहीं जो मेरा हक़ था।
अब मुझे कोई हिसाब नहीं करना।
मैंने शिकायतों की फाइल बंद की है।
लेकिन माफ़ करना👈
वापस वही रिश्ता जीना नहीं होता।
हर माफ़ी एक दूरी को जन्म देती है
जहाँ आत्मसम्मान खुलकर साँस ले।
Stay away now✔️
तुम्हारी कोई ज़रूरत नहीं है।
न तुम्हारा ज़िक्र,न नाम, न कहानी।
तुमने जैसा भी किया—
मैंने सब छोड़ा है।अपनी राह चलो
मुझे भी अपनी राह पर चलने दो।
कुछ लोग माफ़ तो कर दिए जाते हैं,
पर दिल के घर में❤️
उन्हें दोबारा जगह नहीं दी जाती।🌷
-Yu Hi

सुविचार – वाणी – 014

एक सरल सी टिप्पणी भी किसी का मान-सम्मान उस सीमा तक नष्ट कर सकती है, जिसे वह व्यक्ति किसी भी दशा में दोबारा प्राप्त करने में सक्षम नहीं हो सकता,

इसलिए यदि किसी के बारे में कुछ अच्छा नहीं कह सकते, तो चुप रहें.

जिसकी वाणी विनम्र, शिष्ट और सभ्य होती है, _ उसका ह्रदय विशाल, पवित्र और उदात्त होता है.
मीठा बोल…[ वचन] …

मीठा बोलने मेँ हमारा कुछ नहीं जाता, किन्तु इससे हमें अमूल्य लोग, मित्र मिलते हैं और अनेक समस्याए मुफ्त मेँ हल हो जाती हैं !

अतः मधुर बोलें, वाणी संयम एक महान तप है !!!

दुर्भाषित वाणी हलाहल विष के समान ऐसा नाश करती है, जैसा तेज किया हुआ शस्त्र भी नहीं कर सकता,

इसलिए बुद्धिमान व्यक्ति को चाहिए कि वाणी की समय- असमय रछा करे.

वाणी पर हमारा नियंत्रण होना चाहिए, ताकि हम शब्दों के दास न बनें.
जमीन अच्छी है खाद अच्छा हो परंतु पानी अगर खारा हो तो फूल खिलते नहीं.

भाव अच्छे हों  कर्म भी अच्छे हों, मगर वाणी खराब हो तो सम्बन्ध कभी टिकते नहीं.

वाणी में सरलता और सज्जनता होनी चाहिए,

बोलने के दौरान संयम के अभाव में कई तरह की समस्याएँ पैदा हो जाती हैं.

वाणी की मधुरता मित्रता बढाती है और

वाणी की कठोरता के कारण व्यक्ति अपनों से भी दूर हो जाता है.

वाणी के व्यवहार को लेकर जितनी लड़ाईयाँ होती हैं,

उतनी धन और सम्पत्ति को लेकर नहीं होती.

इंसान जब जब अपनी जुबान चाबुक की तरह चलाता है तब उसको यह पता नहीं होता कि

उसका एक कठोर शब्द दूसरे इंसान को कितना गहरा जख्म दे देता है.

बोलना या चुप रहना हमारे औजार और हथियार हैं,

इनका इस्तेमाल बहुत सोच- समझ कर करना चाहिए.

हमारी वाणी प्रेम पूर्ण हो. दूसरों में दोष ढूंढ़ना एक ऐसी आदत है

जो स्वयं के लिए भी दुख का कारण बन जाती है.

अगर पानी अपनी मर्यादा तोड़े तो विनाश होता है,

लेकिन वाणी अगर मर्यादा तोड़े तो सर्वनाश होता है.

पानी को छान कर पीते हो ! क्या वाणी को भी छान कर बोलते हो ??
जब बात जरुरत की हो तो, _ जुबान सब की मीठी हो जाती है !!!
सुसंस्कृत वाणी दिलों पर राज करती है..
कर्कश वाणी से कलह का जन्म होता है.
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